नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में छात्रावास के नियमों में बदलाव को लेकर विवि प्रशासन के खिलाफ पिछले 8 दिनों से छात्रसंघ के बैनर तले छात्रों ने अपना हड़ताल जारी रखा है। प्रशासन के खिलाफ चल रहे इस हड़ताल में अब छात्र संघ के साथ सभी छात्र संगठन एक हो गए हैं।
बता दें जेएनयू प्रशासन ने 14 साल बाद छात्रावास के नियमों में बदलाव को लेकर बीते दिनों नया प्रारूप तैयार किया है। जिसके सार्वजनिक होने के बाद छात्रों ने अपना विरोध जताया था।
यह नज़ारा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) का हैं, जिसका पूरा कैम्पस केंद्रीय रिजर्व पुलिस (CRPF) के हवाले कर दिया गया है। शायद सरकार चाहती है कि देश के इस अग्रणी विश्वविद्यालय में समाज के कमजोर तबके यानी जिसे तथाकथित “एलीट क्लास” अपनी कुंठाओं के कारण ‘केटल क्लास’ कहता है, के छात्र शिक्षा ग्रहण करने से वंचित किये जायें। इसीलिए उसने कुलपति के माध्यम से फीस 3000/- से बढ़ाकर एक लाख बीस हजार कर दी है। क्या ऐसी स्थिति में किसी गरीब का बच्चा इस उच्चकोटि के शिक्षण संस्थान में प्रवेश पा सकेगा?
इसी शुल्क वृद्धि के विरोध में JNU के छात्र एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन; सरकार और वीसी शिक्षा विरोधी हो तो इस विश्वविद्यालय का बर्बाद होना तय है।
संघ द्वारा नियुक्त कुलपति एम. जगदीश कुमार ने होस्टल फीस में 300% से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है, जिसका विरोध जेएनयू के सभी छात्र-छात्रायें एकजुट होकर कर रहे हैं। जिनकी आवाज को दबाने के लिए सरकार ने अर्धसैनिक बल—CRPF की टुकड़ियाँ विश्वविद्यालय में नियुक्त कर दी हैं।

@Mahesh sayta

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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