रायपुर (hct)। गरियाबंद के “कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय” में अध्ययनरत छात्रा प्रियंका नागेश की आत्महत्या का मामला लगातार तूल पकड़ते जा रहा है। बालोद जिले के एक आदिवासी युवक जिसने बालोद एस पी को “रात्रि काल आवासीय विद्यालय में अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश” संबंधित जांच की मांग को लेकर एक सप्ताह भी नहीं हुआ कि; अब इसी मामले में जिले के आदिवासी समाज से ही एक व्यक्ति ने पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज से जांच की मांग करने की जानकारी मिली है।
आपको बता दें किहाईवे क्राइम टाइम” वेबपोर्टल में उक्त घटना से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को लेकर जब से खबर का प्रकाशन किया गया है, समाज से जुड़े जागरूक व्यक्ति विशेषों की इस सन्दर्भ में उनकी प्रतिक्रिया/संवेदना खुलकर आनी शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया के मार्फ़त से जानकारी मिल रही है कि गरियाबंद जिला के जिलाधीश; माननीय श्याम धावड़े ने भी इस अपना रुख जाहिर करते हुए कहा है कि “आश्रम-छात्रावास का नियमित निरिक्षण करें।”

क्योंकि सवाल “एक निर्दोष की आत्महत्या” का है।

विद्यालय की तत्कालीन अधीक्षिका चंद्रप्रभा फुलझेले के रिश्तेदारों व जवान लड़के नंदू फुलझेले के छात्रावास में रात्रि के समय आने, रुकने,वही खाना खाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि जिला प्रशासन द्वारा चंद्रप्रभा फुलझेले को निलंबित कर दिया गया हैसाथ ही पुलिस ने इस मामले में धारा 306 की कार्यवाही की है, जिस पर अधीक्षिका फुलझेले मैडम को जमानत मिलने की बात भी सामने आई है, किन्तु गिरफ्तारी के बाद बेहोश होने, तबियत खराब होने चलते अधीक्षिका को हॉस्पिटल एडमिट कराया गया था, जिसके बाद महीने डेढ़ महीने तक उसकी फरारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ज्ञात हो कि 3 जुलाई 2019 को गरियाबंद स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की कक्षा 7 वी की छात्रा प्रियंका नागेश ने अधीक्षिका की डांट-फटकार के बाद छात्रावास में ही आत्महत्या कर ली थी, घटना के बाद जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी घटना स्थल पहुंचे थे। जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से भी जांच कमेटी बनाई गई थी। मगर जिस तरह मामला रफा-दफा कर दिया गया उससे कई शंकाये उत्पन्न होती है।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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