किरीट ठक्कर
देवभोग। युवा कांग्रेस के बिन्द्रानवागढ़ उपाध्यक्ष कन्हैया मांझी ने मंगलवार, लोक निर्माण, गृह ,जेल एवम जिले के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू को ज्ञापन सौंपकर देवभोग बीईओ पर आर्थिक अनियमितता के आरोप लगाते हुये जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है, कन्हैया मांझी के अनुसार बीईओ द्वारा शिक्षाकर्मियों के हक के पैसे को नहीं लौटाया जा रहा है। जबकि शिक्षाकर्मी पैसे दिए जाने की मांग को लेकर कई बार बीईओ से संपर्क कर चुके है।
कन्हैया मांझी ने प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू को बताया कि शिक्षाकर्मी बीते दो साल से कटौती की गई राशि पाने के लिए बीईओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में शिक्षाकर्मियों के वेतन से लगभग 19 से 20 क़िस्त में कटौती कर लगभग 80 लाख रूपए को शासन के कोष में जमा करने के स्थान पर बीईओ ने अपने खाते में जमा कर दिया था, जिले के अन्य सभी ब्लाकों में काटी गई राशि वापस की जा चुकी है, लेकिन देवभोग में इस पैसे को लेकर संबंधित अधिकारी द्वारा गोलमोल जवाब देकर बात को टाला जा रहा है।
कन्हैया ने प्रभारी मंत्री के सामने ही उच्चाधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ऐसे ही एक मामले में जब नगरी बीईओ पर निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है, तब देवभोग के बीईओ पर कार्यवाही क्यों नही की जा रही। कन्हैया मांझी ने जिले के उच्चाधिकारियों पर भी आरोप लगाया है कि उनके संरक्षण की वजह से देवभोग विकास खंड शिक्षा अधिकारी पर ना कोई कार्यवाही की जा रही है और ना ही मामले की समुचित जांच की जा रही है।

कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष ने भी की है शिकायत

देवभोग ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुखचंद्र बेसरा ने भी नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया से जांच की मांग की थी। बेसरा ने बीईओ प्रदीप शर्मा पर आरोप लगाया था कि वर्ष 2014-15 में शिक्षाकर्मियों के वेतन से कटौती कर लगभग 80 लाख रूपए की वसूली कर शासन के कोष में जमा करने के स्थान पर बीईओ खाते में जमा कर उसका निजी उपयोग करने के साथ ही हेराफेरी किया गया है। इसी प्रकार वर्ष 2016 से 2018 तक लगभग 01 करोड़ की स्कूल मरम्मत हेतु स्वीकृत राशि को कूटरचित कर फर्जी बिल व्हाउचर प्रस्तुत कर शासकीय राशि का गबन किया गया था। मामले में मंत्री द्वारा आदेश किए जाने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मंत्री के आदेश का माखौल उड़ाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी, मंत्री के आदेश के बाद मामले में खानापूर्ति करने के लिए डीईओ ने जांच का जिम्मा एक लिपिक को दे दिया। वहीं मामले में तीन महीने बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट का कोई पता नहीं चल पाया, कि आखिर जांच रिपोर्ट में क्या बातें सामने आई। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी एस.एल. ओगरे से पूछे जाने पर वह पिछली जांच रिपोर्ट के विषय में कुछ कहने से बच रहे है , अब एक नई समिति बनाकर जल्द ही मामले में जांच करवाने की बात उनके द्वारा कही जा रही है।
मामले मेें मैंने पिछले दिनों जांच के लिए नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया को आवेदन किया था। वहीं मंत्री के आदेश के बाद एक बाबू से जांच करवाकर मंत्री के आदेश का मजाक बनाया गया। जांच से मैं संतुष्ट नहीं हूं,पुनः मंत्री को मामले से अवगत करवाकर जांच किए जाने की मांग करूंगा।
सुखचंद्र बेसरा, अध्यक्ष, ब्लाक कांग्रेस कमेटी, देवभोग।
शीघ्र ही जांच कार्यवाही की जाएगी।
एसएल ओगरे,                                                  जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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