रात में तमाशे बाज के लिए पूरा मंच सजाया गया था…… खुद इसरो प्रमुख तमाशे बाज की अगवानी के लिए इसरो मुख्यालय के गेट पर पहुंचे, ओर उन्हें ससम्मान सबसे ऊंचे पैवेलियन लाउन्ज में लगे सोफे पर बैठाया गया, क्लाइमेक्स का सीन था हर चैनल पर एंकर मोदी जी की जय …, मोदी की जय, करने को आतुर बैठा हुआ था। एक से एक क्लिपिंग तैयार थी, स्क्रिप्ट राइटरों ने सलीम जावेद भी फेल हो जाए साहेब की प्रशंसा में ऐसे डायलॉग लिख कर रखे थे… मोदी जी चाँद पर , मोदी जी का मून वाक, आदि; आदि…. PR देखने वाली प्रचार एजेंसियों ने पूरा मटेरियल रेडी कर रखा था IT सेल के नए नए मीम भी सोशल मीडिया पर छाने को तैयार थे।
अचानक से जमी जमाई बाजी पलट गयी ! इसरो प्रमुख मोदी जी के पास गए ओर उन्हें सूचना दी कि सर विक्रम लैंडर से सम्पर्क टूट गया है। मोदी जी के अरमान ठन्डे हो गए, मुँह लटका कर इसरो मुख्यालय से निकले और होटल की तरफ चल दिये…।
रात गहराती जा रही थी बड़ी-बड़ी PR एजेंसियों के प्रमुख जगे हुए थे; और मन्त्रणा कर रहे थे कि कैसे इस स्थिति को संभाला जाए…..? अचानक उनके दिमाग मे एक आइडिया आया और मोदी जी को फोन लगाया गया मोदी जी वैसे ही होटल में उखड़े हुए बैठे हुए थे, फोन देखकर चिढ़ गए, लेकिन जैसे ही दूसरी तरफ से आती हुई आवाज सुनी उनके चेहरे पर मंद-मंद मुस्कान आ गयी।
सुबह 7 बजे तमाशेबाज उठे, तैयार हुए, कपड़े बदले और इसरो मुख्यालय चल पड़े। गेट पर ही सारे कैमरे तैयार थे; इसरो प्रमुख सिवम को भी गेट पर बुला लिया गया जैसे ही सिवम गेट पर मोदी जी से मिले; मोदी जी ने उन्हें जबर्दस्ती अपनी ओर खींच लिया और लगे पीठ पर हाथ फेरने…!
यह दृश्य अप्रत्याशित रूप से लंबा खींचा गया इतने में कैमरे की खचाक खचाक की आवाज गूंजने लगी और वैज्ञानिक की भावुक कर देने वाली बाइट तैयार थी।
मोदी जी की तरफ PR एजेंसी के मालिकों ने थम्स अप का साइन दिया और मोदी जी मुस्कराते हुए इसरो के गेट से निकल पड़े, उनका काम हो चुका था।

@Girish Malviya

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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