*जावेद अख्तर

न्यायधानी याने बिलासपुर, और इसी जिले से 176 नाबालिग बच्चे लापता हैं। हैरानी की बात है कि आज तक इनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है कि रहस्यमयी रूप से गायब हो रहे बच्चों को आसमां निगल रहा है या जमीन.? ये बेहद चिंता का भी विषय है। सरकारी डेटा के अनुसार ये सिलसिला सालों से चलता चला आ रहा है, शायद ही किसी बच्चे को रिकवर किया जा सका है। पुलिस, बाल अधिकार सरंक्षण आयोग, महिला एवं बाल विकास विभाग समेत लगभग तीस से ज्यादा एनजीओ बच्चों के सरंक्षण व सुरक्षा को लेकर चल रहें हैं। इतने सबके के बाद भी बच्चों का यूं अचानक गायब हो जाना कई सवालों को खड़ा करता है।

बच्चों की तस्करी, बाल मज़दूरी समेत तमाम तरह के अपराध से आज समाज का आम नागरिक जूझने को विवश है। पुलिस के पास खानापूर्ति के लिए बहानों की कमी नहीं है। आयोग और एनजीओ कागज़ी शेर है और सीधे साधे लोगों के लिए मुसीबत से कम नहीं। हमारा कहना ये कत्तई नहीं है कि इन आयोग व एनजीओ की आवश्यकता नहीं है किंतु जब ये कागज़ी शेर साबित हो रहें हों तो सवाल उठाना स्वाभाविक है और इनकी गुणवत्ता कार्य शैली व प्रणाली पर विचार करना जरूरी है। कि आखिरकार सबके होते हुए बच्चे लगातार गायब हो रहें हैं और किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता। ये समाज के सफेदपोश व अफसरों का दूसरा स्याह पहलू है, इस पर भी विचार होना ही चाहिए?

कबीरधाम में भी लगातार गुम हो रहे लोग 

जिले मे गुम इंसानो की संख्या लगातार बढ़ रही है जिले के विभिन्न थानों मे एक ही दिन में एकसाथ 4 लोगों के गुम होने की रिर्पोट लिखी गयी। बताते हुए आश्चर्य हो रहा पंडरिया के वनांचल क्षेत्र थाना कुकदूर से तीन बैगा आदिवासी महिला गायब है हैरत कि बात तो यह है कि एक ही गांव की दो बैगा महिला विगत अक्टूबर माह से लापता है। सूत्रों के अनुसार प्रार्थियों द्वारा गुम इंसान की सूचना आई, जिसमें एक पुरूष एवं 3 महिलाएं है।

कवर्धा के रामनगर से देवेन्द्र कौशिक पिता स्व.अशोक कौशिक उम्र 23 वर्ष बिना बताये कहीं चला गया।
कुकदुर थाना अंतर्गत के ग्राम रोखनी की कुंवरियाबाई पति पहरसिंह उम्र 32 वर्ष वहीं फुलबाई पति पहरसिंह उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम रोखनी। कुकदुर थाना के ग्राम कामठी की कु. कुंती पिता ईश्वर गोड़ उम 18 वर्ष 09 माह यह लड़की ग्राम दैहानडीह से मतदान वाले दिन 18 अप्रेल से लापता हुई है जिसकी सूचना परिजनों ने पता तलाश के बाद कुकदूर थाना में दी। पुलिस ने गुम इंसान मामले दर्ज कर पतासाजी कर रही है। जिले मे लापता होने की घटना मे लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है ऐसे मामले मे खासकर युवक युवती ज्यादात्तर गुम होने की जानकारी आ रही है। पुलिस रिकार्ड से पता चलता है कि औसतन रोज एक व्यक्ति गुम हो रहे है।

न्यायधानी में हालत सबसे गंभीर 

इतना ही नहीं लगभग हर दिन नाबालिग बच्चे लापता हो रहें हैं। शिकायत मिलने पर पुलिस अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज करती है, लेकिन इन गायब हो रहे बच्चों के तलाश के लिए चलाया जाने वाला अभियान भी ठंडा पड़ गया है। पिछले 3 महीनों में पुलिस ने इस गुम हो गए बच्चों को तलाशने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया है। जो आंकड़े हैं उसके अनुसार जिले से 45 बालक और 131 बालिकाएं लापता हैं। बता दें कि जिले से 355 बच्चों के लापता होने की खबर पर सन 2016 मे हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रदेश शासन व एसपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। हाईकोर्ट ने बच्चों की तलाश के लिए न्याय मित्र की स्थापना के साथ-साथ बच्चों को तलाशने के लिए अभियान चलाने के आदेश पुलिस को दिए थे। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग को भी बच्चों को तलाश करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने सबसे पहले आपरेशन मुस्कान शुरू किया था।
हर दो महीनों में पुलिस ने इस अभियान के चलाया और मुस्कान अभियान 5 तक चलाकर करीब 100 से अधिक बच्चों को बरामद किया था। इसके बाद पुलिस ने आपरेशन तलाश भी शुरू किया। पिछले 1 साल में पुलिस ने आपरेशन तलाश 1, 2, 3 चलाकर करीब 80 से अधिक बच्चों को बरामद किया है। लेकिन पिछले 3 महीनों से ये अभियान ठप है, इसी बीच गुम हो रहे बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चों के लापता होने का आंकड़ा 176 से पार हो गया है।

तत्कालीन एसपी के आदेश का भी असर नहीं

तत्कालीन एसपी अभिषेक मीणा ने जिले में लापता बच्चों को तलाश करने के लिए पुलिस टीम बनाकर दूसरे प्रदेश व जिलो में भेजने के आदेश थानेदारों को दिए थे। आदेश के आद भी थानदारों ने बच्चों को तलाश करने का कोई प्रयास नहीं किया।

इन थानों से लापता हैं बच्चे

थाना       –   बालक – बालिका
गौरेला             03           07
कोनी              0             02
कोटा              02           11
मरवाही           0             01
मस्तूरी             02          20
बिल्हा              02          01
हिर्री                02          01
सिविल लाइन    14          07
सिरगिट्टी           05         06
सिटी कोतवाली  0           02
पचपेड़ी            0           01
पेण्ड्रा               0           05
रतनपुर            02         09
सकरी              03         10
सीपत               02         09
सरकंडा            04         25
चकरभाठा         01         01
तखतपुर            01         08
तारबाहर           0           01
तोरवा               04         04

*साभार : scgnews.in

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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