छात्रों से रिपोर्ट साझा किए बिना ही निकाल दिया रिजल्ट।

मामले का विवाद पूरी तरह थमा नहीं है।

रायपुर। दिनांक 6 जून को छात्रों के द्वारा अनिश्चित कालीन अनशन किया गया था जिसमे कुलपति ने आश्वासन दिया था की 2 दिन मे नई जाँच कमिटी गठित करके छात्रों को रिपोर्ट दे देंगे। किन्तु 5 दिन बीत जाने पर भी रिपोर्ट नही दिया गया| बल्कि रिजल्ट जारी कर दिया गया और छात्रों को बोला गया की सूचना का अधिकार, अधिनियम लगाकर आप जाँच की रिपोर्ट ले सकते हो। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुरोध पर छात्रों ने अनशन वापस ले लिया। छात्रों को आश्वासन दिया गया था की उन्हें पहले रिपोर्ट दिया जायेगा। पर आनन फानन में छात्रों को बिना रिपोर्ट दिखाये रिजल्ट निकाल दिया गया। सोचने वाली बात है काउंसलिंग में अभी बहुत समय है फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन इतनी जल्दबाजी में क्यों है?
विश्वविद्यालय ने यह भी आश्वासन दिया था कि जहाँ से पेपर लीक की सुचना आयी थी वहाँ के छात्रों की अपने MIS के साइबर एक्सपर्ट द्वारा साइबर जाँच की जायेगी एवं उसके बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जायेगा। पर विश्वविद्यालय के साइबर एक्सपर्ट मुख्य आरोपी जिसने सभी छात्रों को कॉल किया था उसकी ही डाटा रिकवरी करने में असमर्थ रहें। इसके बाद भी विश्वविद्यालय ने रिपोर्ट बना के प्रस्तुत कर दी।
सभी छात्रों की मांग थी की साईबर जाँच हो लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने साईबर जाँच के लिये साफ इंकार कर दिया गया?
मामले की जाँच पूरी नही हो पाई और रिजल्ट को इस प्रकार जल्दबाजी मे घोसित करना संदेह का विषय हैं। विश्वविद्यालय के इस रवैये से छात्रों में बहुत असंतोष एवं आक्रोश है।

यह है मामला : कमेटी में विवि के छह लोग

इंदिरा गांधी कृषि विवि रायपुर ने एमएससी (कृषि), एमएससी (उद्यानिकी), एमटेक (कृषि अभियांत्रिकी) एवं पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कंबाइंड इंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) का आयोजन 26 मई को किया। विवि के नौ महाविद्यालयों में एग्जाम हुआ। परीक्षा का मॉडल आंसर 27 मई को विवि की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया। इसके बाद विवि को शिकायत मिली कि वाट्सएप के माध्यम से एक ऑडियो टेप वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति कुछ छात्रों को एमएससी (कृषि) सीईटी का प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है और छात्रों से इसके एवज में पैसे मांग रहा है। इस पर विवि ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण की अध्यक्षता में छह वरिष्ठ प्राध्यापकों की एक जांच समिति गठित की। समिति ने 31 मई को कृषि महाविद्यालय भाटापारा के संबंधित छात्रों से पूछताछ की, एक जून को परीक्षा से जुड़े संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से चर्चा की। समिति ने अपनी रिपोर्ट विवि को सौंपी। विवि का कहना है कि समिति ने जांच में पाया कि सीईटी का कोई प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ है। समिति का अभिमत है कि चूंकि कोई प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ है अतः दोबारा परीक्षा आयोजित करने की आवश्यकता नहीं है।

साभार : *सूत्र।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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