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भूपेश के बंगले में पदस्थ ओएसडी के भतीजे का नंगा सच।

जुम्मा-जुम्मा के सरकार की ओएसडी के भतीजे का एक लड़की के साथ नग्न तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल होने से चूक गया, कारण ? क्योंकि; वह एक रसूखदार है और उसका सगा सूबे के मुखिया भूपेश बघेल का ओएसडी…

रायपुर (hct)। उसका नाम अरुण है और वह स्वयं को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बंगले में पदस्थ ओएसडी आशीष वर्मा का भतीजा बताता है।
बता दें कि इस शख्स ने अपनी अय्याशी की नग्न तस्वीर अपने ही फेसबुक के स्टोरी में साझा कर दिया था, जिसे शायद उसके ही किसी दोस्त ने स्क्रीनशॉट लेकर उसकी सम्पन्नता से प्रभावित होकर संभवतः रकम ऐंठने के उद्देश्य से उसे भयादोहन करने लगा था और शायद सफल भी हो जाता मगर; बात कम रकम में निपटा दिए जाने की वजह से उक्त तस्वीर को उसके द्वारा कुछ और लोगों तक साझा कर दिया गया। इसी माध्यम वह तस्वीर एक-दो (महिला) पत्रकार को भी प्राप्त हो गया और यहीं से बात बिगड़ना शुरू हो गया !
विचार-विमर्श के इरादे से उक्त पत्रकार ने एक *वकील मोहतरमा से संपर्क साधा और उस मोहतरमा ने स्वयं को महिला आयोग में उपाध्यक्ष और किसी मानवाधिकार संस्था में ओहदेदार पद का रुतबा दिखाते हुए लालच से लब्ध होकर अरुण से भयादोहन कर कुछ मोटी रकम की मांग रख ऐसा सूत्रों से जानकारी मिली है।
यहां यह बताना लाजमी है कि उक्ताशय से सम्बद्ध अरुण, वकील मोहतरमा तथा पत्रकारों के सारी बातें आपस मे मोबाइल पर होती थी जिसे अरुण वर्मा ने रिकार्ड कर रखा था।
यहीं से बात बिगड़ते गई और समाचार प्रकाशित हों जाने पर इज्जत तथा बदनामी के डर से अय्याश अरुण वर्मा ने सूबे के मुखिया के कार्यालय में पदस्थ अपने तथाकथित चाचा आशीष वर्मा के माध्यम से पुलिस के एक उच्चाधिकारी से संपर्क साधा। आश्चर्य यह कि जिस अनैतिक कार्य के लिए उक्त पुलिस अधिकारी को अय्याश अरुण के मामले में तत्काल संज्ञान लेना चाहिए था, जो भादवि की धारा 294, 295 (क) के प्रावधान के तहत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है, जोकि एक जमानती, संज्ञेय अपराध है और बतौर सजा तीन महीने कारावास या आर्थिक दण्ड अथवा दोनों हो सकता है से परे, उसने मुख्यमंत्री के बंगले में पदस्थ एक अदने से कर्मचारी के प्रभाव में आकर तत्काल दुर्ग जिलांतर्गत नेवई थाना को निर्देशित कर फोन करवाया गया ताकि पत्रकारों को कानून का भय दिखाकर शांत रहने की कोशिश की जा सके।
उक्त जानकारी जब समाचार पत्र/वेबपोर्टल “हाईवे क्राइम टाईम” के सम्पादक दिनेश सोनी को मामले में सम्मिलित महिला पत्रकारों के माध्यम से ज्ञात हुआ तो सच्चाई जानने के उद्देश्य से उनके द्वारा अरुण वर्मा का नम्बर लेकर उससे बात किया; जिसे भी उसने रिकार्ड कर लिया और संभवतः उसे भी उक्त पुलिस अधिकारी को प्रदान करवा कर दुर्ग थाना प्रभारी (योगिता खापर्डे) के माध्यम से
सोमवार दिनांक 03 जून 2019 को दोपहर 2:30pm को मोबाइल नंबर 9479192031 से पूछताछ (बयान के लिए आना होगा) के उद्देश्य से फोन आया था।

 

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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