36 घंटे के अंदर दोहरे अंधेकत्ल का खुलासा

*किरीट ठक्कर।

गरियाबंद। अपने खेत की रखवाली कर रहे दयाराम नेताम ने जब पास से गुजर रहें एक व्यक्ति को बुलाया, तब उसे गुमान नही था कि वो अपनी मौत को बुला रहा है। उस व्यक्ति ने आकर न सिर्फ दयाराम को मौत के घाट उतारा बल्कि उसकी पत्नि को भी मार डाला।
घटना दिनांक 23 – 24 दिसंबर की दरम्यानी रात की है। मैनपुर ब्लाॅक के थाना शोभा से 10 किमी दुर ग्राम डुमरबुडरा में दो व्यक्तियो पति पत्नि की हत्या की सुचना पुलिस को प्राप्त हुई। पुलिस ने मर्ग कायम कर अपराध क्रं 12/18 धारा 302 भादवि पंजीबद्ध कर हत्याकांड की गंभीरता से जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारीयों को सुचित करते हुऐ उनसे प्राप्त मार्गदर्शन के आधार पर संदेहियों से संघन पुछताछ की।
इनमें से एक संदेही हरिशचंद साहु पिता मोहनलाल 25 वर्ष साकिन तोरला थाना गोबरा नवापारा जिला रायपुर पहले तो टाल-मटोल करता रहा, किंतु कडाई से पुछताछ करने पर उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शोभा थाना अंतर्गत ग्राम डुमरबुडरा निवासी दयाराम नेताम , गांव से दुर अपने खेत में लारी बनाकर रात्रिकाल में अपनी पत्नि के साथ रखवाली कर रहा था उसी दिन दोपहर भेडी चरवाहो की एक टोली वहा पहुंची थी इस टोली के कुछ लोगो ने रात्रिकाल में दयाराम की लारी से कुछ दुर एक अन्य लारी में शराब पी, बाकी लोग तो वहा से चले गये किंतु आरोपी हरिशचंद जो और शराब रखे हुऐ था दयाराम की लारी के पास से गुजर रहा था तब दयाराम ने उससे पुछताछ की और उसके पास शराब देखकर उसे अपने लारी में बुला लिया। इसके बाद दयाराम तथा उनकी पत्नि के साथ हरिशचंद ने फिर शराब पी, और शराब के नशे में हुऐ विवाद के फलस्वरूप आरोपी ने लाठी से पीटकर दयाराम और उसकी पत्नि की हत्या कर दी।
इस अंधे कत्ल को सुलझाने में थाना प्रभारी शोभा उपनिरीक्षक प्रशांत मिश्रा , आ. राहुल तिवारी, तरूण सिदार , महताब अहमत , रंविन्द्र गिरि, मनोज ध्रुव, का विशेष योगदान रहा।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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