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अफीम की खेती पर दयादृष्टि, आम तोड़ते मासूम पर कुदृष्टि !

एक ओर प्रदेश में अफीम की अवैध खेती के मामलों में सियासी संरक्षण की चर्चाएं, दूसरी ओर बलौदाबाजार के अंबुजा-अडानी प्लांट में आम तोड़ने पर 12 वर्षीय बच्चे की बेरहमी से पिटाई।

अफीम खेती मामला का मामला इन दिनों प्रदेश में गंभीर चर्चा का विषय बनते जा रहा है। एक ओर अलग-अलग इलाकों से अफीम की अवैध खेती के मामले सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बलौदाबाजार की घटना ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में इन दिनों दो ऐसी घटनाएं चर्चा के केंद्र में हैं जो भले ही अलग-अलग जगहों पर हुई हों, लेकिन उन्हें साथ रखकर देखा जाए तो व्यवस्था की संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं पर कई सवाल खड़े होते दिखाई देते हैं।

अफीम खेती मामला लगातार चर्चा में है

ग्रामीण इलाकों में इस बात की चर्चा भी तेजी से फैल रही है कि जिन खेतों में यह अवैध खेती पकड़ी जा रही है, उनके पीछे किसी न किसी स्तर पर राजनीतिक संरक्षण की बात कही जा रही है। कहीं आरोपितों को सत्ताधारी दल से जुड़ा बताया जाता है तो कहीं उन्हें किसी प्रभावशाली नेता का करीबी कहा जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में यह भी सुनने में आया कि अफीम की फसल को किसी दूसरी फसल का नाम देकर मामले को हल्का दिखाने की कोशिश की गई, जिससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर इतने बड़े अवैध कारोबार पर लगाम लगाने में व्यवस्था की गंभीरता कितनी है।

आम तोड़ने पर मासूम की बेरहम पिटाई

balodabazar child beating caseइधर इसी दौरान बलौदाबाजार जिले से सामने आई एक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। बताया जा रहा है कि जिले में स्थित अंबुजा-अडानी प्लांट के परिसर के आसपास एक लगभग 12 वर्षीय बच्चा आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने उसे पकड़ लिया और फिर इतनी बेरहमी से पटक-पटक कर मारा कि बच्चा अधमरी हालत में पहुंच गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक बच्चे की हालत देखकर आसपास मौजूद लोग भी सन्न रह गए। मामूली सी बात पर एक मासूम के साथ इस तरह की हिंसा ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया और घटना की चर्चा तेजी से फैलने लगी।

अवैध अफीम की खेती पर उठते सवाल

दरअसल इन दोनों घटनाओं को लेकर लोगों के बीच तुलना भी शुरू हो गई है। एक तरफ अफीम की खेती जैसे गंभीर अपराध के मामलों में बार-बार सियासी संरक्षण की चर्चाएं सामने आती हैं, वहीं दूसरी तरफ एक मासूम बच्चा आम तोड़ ले तो उसके साथ इतनी बर्बरता हो जाती है कि वह अधमरी हालत में पहुंच जाता है। यही वजह है कि आम लोगों के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि कानून की कठोरता आखिर किनके लिए है और उसकी नरमी किसके लिए। जब बड़े अपराधों के पीछे प्रभावशाली नामों की चर्चा होती है तो कार्रवाई की रफ्तार सुस्त क्यों दिखती है, और जब कोई गरीब बच्चा पेड़ से आम तोड़ ले तो उस पर गुस्सा इस हद तक क्यों उतर आता है।

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Image Courtesy: @INCChhattisgarh / X.com

सुशासन के दावों के बीच जमीन की हकीकत

इधर दूसरी ओर सरकार लगातार सुशासन और सख्त कानून व्यवस्था के दावे करती नजर आती है। मंचों से लेकर सरकारी कार्यक्रमों तक व्यवस्था की मजबूती और कानून के राज की बातें दोहराई जाती हैं। लेकिन जमीन पर सामने आने वाली घटनाएं अक्सर एक अलग ही तस्वीर पेश करती दिखाई देती हैं। एक तरफ अवैध अफीम की खेती की खबरें सुर्खियां बनती हैं, दूसरी ओर एक मासूम बच्चे की बेरहमी से पिटाई की घटना लोगों को भीतर तक बेचैन कर देती है। ऐसे में जब सुशासन के दावों की गूंज सुनाई देती है, तो कई लोग यही पूछते नजर आते हैं कि आखिर यह सुशासन किसके लिए है… और उसका डंडा आखिर किस पर चलता है।

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