आबकारी उड़नदस्ता पर उगाही का साया…!
'ओवर रेट' कार्रवाई का डर, लाखों की कथित वसूली और कर्मचारियों पर दबाव के आरोप; जांच की निष्पक्षता पर भी उठे सवाल

रायपुर hct : आबकारी उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वॉड) आबकारी विभाग के जिला स्तरीय कार्यप्रणाली; एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। विभागीय सूत्रों और कर्मचारियों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार, आबकारी उड़नदस्ता से जुड़े कुछ अधिकारियों पर शराब दुकानों के कर्मचारियों को कथित रूप से धमकाकर अवैध वसूली करने, झूठे प्रकरणों का भय दिखाने तथा शिकायतों को दबाने के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और वे सही पाए जाते हैं, तो यह मामला आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचने वाला साबित हो सकता है।
‘ओवर रेट’ केस का डर बना कथित उगाही का हथियार

सूत्रों का दावा है कि जिला उड़नदस्ता के प्रभारी ADEO अनिल बंजारे तथा SI कमल कोड़ोपी के नेतृत्व में कुछ दुकानों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है। आरोप है कि जिन दुकानों से कथित तौर पर नियमित भुगतान नहीं मिलता, वहां ‘ओवर रेट’ (निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री) का मामला दर्ज करने की चेतावनी देकर दबाव बनाया जाता है। जानकारी के अनुसार, कई दुकानों से 30 हजार से 50 हजार रुपये तक की कथित वसूली किए जाने की चर्चा विभागीय गलियारों में लंबे समय से है।
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‘क्लीन चिट’ के लिए कर्मचारियों पर दबाव?
आबकारी उड़नदस्ता मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह बताया जा रहा है कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगे हैं, उन्हीं के प्रभाव में जांच प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में कुछ शराब दुकानों के कर्मचारियों को जिला कार्यालय बुलाकर ऐसे बयान देने के लिए कहा गया, जिनसे संबंधित अधिकारियों को राहत मिल सके। आरोप है कि एक कर्मचारी द्वारा ऐसे बयान पर हस्ताक्षर से इनकार करने पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और नौकरी पर संकट खड़ा करने की चेतावनी तक दी गई। बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम के कई विभागीय कर्मचारी प्रत्यक्षदर्शी हैं।
आबकारी उड़नदस्ता : पुराने विवाद भी फिर चर्चा में
SI कमल कोड़ोपी का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पंडरी-मोवा स्थित विदेशी मदिरा दुकान में कथित रूप से बनाए गए एक ओवर रेट प्रकरण की जांच संभागीय उड़नदस्ता द्वारा की गई थी, जिसमें कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। इसके बावजूद बाद में उन्हें जिला उड़नदस्ता में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर विभाग के भीतर सवाल उठते रहे हैं।
एक अधिकारी, कई अहम जिम्मेदारियां… क्यों?

विभाग के भीतर चर्चा इस बात को लेकर भी है कि ADEO अनिल बंजारे के पास एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। सूत्रों के अनुसार उनके पास—
- जिला उड़नदस्ता का प्रभार
- जिला कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार
- मंडल संबंधी दायित्व
- वेयरहाउस का प्रभार
जैसी जिम्मेदारियां हैं। प्रश्न यह उठ रहा है कि इतने महत्वपूर्ण प्रभार एक ही अधिकारी को सौंपे जाने के पीछे प्रशासनिक आवश्यकता है या कोई अन्य कारण? विभाग के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि इससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होती हैं।
पुरानी शिकायतें, लेकिन कार्रवाई नहीं?
लगातार सामने आ रहे आरोपों ने आबकारी विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़ा कर दिया है। अब यह मामला केवल कथित अवैध वसूली तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह भी जांच का विषय बन चुका है कि आखिर किन परिस्थितियों में शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।


