Chhattisgarh

संजय वन वाटिका में 14 हिरण की मौत।

आवारा कुत्तों के हमले से उजागर हुई सुरक्षा की पोल, हड़बड़ी में कर्मचारियों का निलंबन

बाड़े में घुसा मौत का झुंड

अंबिकापुर के संजय पार्क में हुई हिरणों की दर्दनाक मौत ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संजय पार्क हिरण मौत घटना में आवारा कुत्तों के हमले से 14 हिरणों की जान चली गई। बीते 21 मार्च की तड़के करीब तीन से साढ़े तीन बजे के बीच आवारा कुत्तों का झुंड हिरणों के बाड़े में घुस आया और देखते ही देखते वहां मौजूद वन्यजीवों पर हमला कर दिया।संजय पार्क हिरण मौत घटना अंबिकापुर

कुत्ते फेंसिंग के नीचे से भीतर पहुंचे और हिरणों को दौड़ा-दौड़ा कर काटने लगे। इस हमले में 14 हिरण बुरी तरह घायल हो गए, जिनमें 6 कोटरा हिरण, 6 चीतल और 2 चौसिंगा शामिल थे। मौके पर ही कई हिरणों की मौत हो गई, जबकि एक घायल चीतल ने अगले दिन दम तोड़ दिया। जिस जगह को घायल और असहाय वन्यजीवों की सुरक्षित शरणस्थली माना जाता है, वहीं इस तरह का मंजर सामने आना सुरक्षा इंतजामों की वास्तविकता बयान करता नजर आया।

निरीक्षण में सामने आए हमले के निशान

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि संजय पार्क हिरण मौत जैसी घटनाएं रेस्क्यू सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी मृत हिरणों के शव ताजा अवस्था में पाए गए। उनके शरीर, गर्दन और पीठ पर गहरे घाव के निशान थे, जबकि कुछ के पिछले हिस्से में नोचने के गहरे जख्म दिखाई दिए। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि आवारा कुत्तों ने बाड़े की फेंसिंग के नीचे से रास्ता बनाकर भीतर प्रवेश किया था। यह तथ्य सामने आते ही सवाल उठने लगे कि आखिर रात के समय रेस्क्यू सेंटर की निगरानी किसके जिम्मे थी और सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों रही कि बाहरी जानवर आसानी से भीतर तक पहुंच गए।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

संजय वन वाटिका जैसे रेस्क्यू सेंटरों का उद्देश्य ही घायल और असहाय वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण देना होता है। लेकिन इस घटना ने यह संकेत दिया कि कागजों में दर्ज सुरक्षा इंतजाम और जमीन पर मौजूद व्यवस्था के बीच बड़ा अंतर है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई कि रात की ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों की सतर्कता उतनी नहीं थी जितनी ऐसे संवेदनशील स्थल पर अपेक्षित होती है। यदि निगरानी व्यवस्था प्रभावी होती तो संभव है कि आवारा कुत्तों का झुंड बाड़े तक पहुंच ही नहीं पाता और इतने बड़े नुकसान से बचा जा सकता था।

इसे भी पढ़े > जंगल सफारी में बसों का संचालन निजी एजेंसियों को देने की तैयारी

संजय पार्क हिरण मौत पर उठी जांच की मांग

घटना सामने आने के बाद इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज़ आलम गांधी ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।

परवेज़ आलम गांधीमहासचिव : छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग
परवेज आलम गांधी

उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था में चूक किस स्तर पर हुई और जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही राज्य के सभी रेस्क्यू सेंटर और वन्यजीव संरक्षण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर उसे मजबूत किए जाने की आवश्यकता भी बताई गई।

सवालों के बीच हुई कार्रवाई

संजय पार्क हिरण मौत के बाद जांचसंजय पार्क हिरण मौत घटना को लेकर उठे सवालों और जांच की मांग के बीच वन विभाग ने प्रारंभिक जांच कर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की। जांच प्रतिवेदन में यह पाया गया कि रात की ड्यूटी पर तैनात चौकीदार और कुछ कर्मचारी अपने कर्तव्यों का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे थे। इसके बाद विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्क में पदस्थ कुछ कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जानकारी के अनुसार उप वनक्षेत्रपाल अशोक सिन्हा, वनपाल ममता परते, वनपाल प्रतिभा लकड़ा और वनपाल बिंदु सिंह को निलंबित किया गया, जबकि वनरक्षक फूलमनी पर भी कार्रवाई की गई। घटना के बाद वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर सवाल लगातार उठते रहे।

whatsapp logo
whatsapp

Back to top button