Chhattisgarh

जंगल सफारी में बसों का संचालन निजी एजेंसियों को देने की तैयारी

नया रायपुर स्थित जंगल सफारी में बसों का संचालन को निजी हाथों में देने की तैयारी, कर्मचारियों में रोष...

राजधानी hct : नया रायपुर स्थित जंगल सफारी, जिसे राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2016 से संचालित किया जा रहा है, अब निविदा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार सफारी प्रबंधन द्वारा इसके संचालन के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार सफारी में पर्यटकों को बसों से भ्रमण कराने का जिम्मा निजी एजेंसियों को सौंपने की योजना पर काम चल रहा है। इस खबर के सामने आने के बाद सफारी में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है।

जंगल सफारी निविदा को लेकर कर्मचारियों में असंतोष

जंगल सफारी से जुड़े कर्मचारी पिछले एक दशक से भी अधिक समय से यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कई कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी आजीविका पूरी तरह इस संस्थान पर निर्भर है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सफारी संचालन का जिम्मा निजी एजेंसियों को सौंप दिया गया तो वर्तमान में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की स्थिति असमंजस में पड़ सकती है। उनका तर्क है कि शासन से मिलने वाले कुछ लाभ और स्थिरता समाप्त होने की आशंका है, जिससे उनके भविष्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

कर्मचारियों का पत्र और आपत्ति

जंगल सफारी बस संचालन निजी एजेंसियों को देने के विरोध में कर्मचारी संगठन का पत्रइस संबंध में छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ की ओर से भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। संघ के पदाधिकारियों ने शासन को पत्र भेजकर जंगल सफारी में बस संचालन के लिए प्रस्तावित निविदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को दरकिनार कर यदि बाहरी एजेंसियों को संचालन सौंपा जाता है तो इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ सकता है।

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ग्रामीणों में भी बढ़ रहा असंतोष

जंगल सफारी का क्षेत्र नया रायपुर के आसपास स्थित गांवों से जुड़ा हुआ है। स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि इस क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसर हैं और सफारी से जुड़े कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी रही है। यदि संचालन पूरी तरह निजी एजेंसियों को सौंप दिया जाता है तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से आसपास के गांवों में भी इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

घेराव की चेतावनी

कर्मचारी संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि निविदा प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं पर विचार नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से विरोध दर्ज करा सकते हैं। कर्मचारियों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर आसपास की ग्राम पंचायतों के सहयोग से जंगल सफारी परिसर के घेराव जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। फिलहाल यह पूरा मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है, लेकिन इस मुद्दे ने जंगल सफारी से जुड़े कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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