Chhattisgarh

मैनपुर कोटवार नियुक्ति विवाद : एसडीएम तुलसीदास का फैसला ‘कटघरे में’

ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद बदला आदेश, नियमों की व्याख्या पर उठे सवाल...

मैनपुर (गरियाबंद) hct : जिले के मैनपुर अनुविभाग अंतर्गत ग्राम धरनीढोड़ा में कोटवार नियुक्ति का मामला अब प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1993 से पदस्थ कोटवार बामदेव सिंह दुर्गा एक दुर्घटना के बाद शारीरिक रूप से अक्षम हो गए थे, जिसके चलते उन्होंने त्यागपत्र दिया। इसके पश्चात अमलीपदर तहसील कार्यालय द्वारा नियमानुसार प्रक्रिया प्रारंभ की गई। पंचायत प्रस्ताव आमंत्रित किया गया, ग्रामसभा की बैठक हुई तथा पात्रता, चरित्र प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया गया।

ग्रामसभा ने वारिस के पक्ष में दिया प्रस्ताव

दस्तावेजों के अनुसार, पंचायत प्रस्ताव में लोचन राम दुर्गा, पिता बामदेव सिंह दुर्गा, का नाम प्रथम वरीयता में भेजा गया। ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से उनके नाम का अनुमोदन किया। वे स्नातक अंतिम वर्ष तक शिक्षित बताए गए हैं और उनका चरित्र प्रमाण पत्र भी संतोषजनक पाया गया। इसके आधार पर 27 जून 2025 को तहसीलदार अमलीपदर द्वारा उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया।

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मैनपुर कोटवार नियुक्ति विवाद

अपील के बाद बदला नियुक्ति आदेश

हालांकि बाद में इस नियुक्ति के विरुद्ध अपील अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम तुलसीदास मरकाम) मैनपुर के समक्ष प्रस्तुत हुई। अपील की सुनवाई के बाद पूर्व आदेश निरस्त करते हुए बालकृष्ण दुर्गा के पक्ष में नियुक्ति आदेश जारी होने की जानकारी सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि इस निर्णय में अधिक शैक्षणिक योग्यता और कंप्यूटर ज्ञान को प्राथमिक आधार माना गया, जबकि परंपरागत रूप से कोटवार पद के लिए न्यूनतम साक्षरता ही पर्याप्त मानी जाती रही है।

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मैनपुर कोटवार नियुक्ति विवाद

नियमों की व्याख्या पर उठा विवाद

स्थानीय लोगों का तर्क है कि कोटवार पद ग्रामीण राजस्व और प्रशासनिक सहयोग से जुड़ा जमीनी दायित्व है, जिसके लिए किसी विशेष डिग्री या कंप्यूटर दक्षता की अनिवार्यता स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं रही। ऐसे में यदि नई व्याख्या लागू की जाती है, तो भविष्य में अन्य कोटवारों की पात्रता भी प्रभावित हो सकती है। यही आशंका अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का कारण बन रही है।

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परिवारिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में

विवाद के दौरान दोनों अभ्यर्थियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएँ तेज हैं। आपत्ति दर्ज कराने वाले ग्रामीणों का कहना है कि एक पक्ष के परिवार के सदस्य पहले से शासकीय सेवा या पेंशन लाभ से जुड़े रहे हैं, जबकि पूर्व कोटवार बामदेव दुर्गा के परिवार में अब तक कोई शासकीय पद पर नहीं रहा। हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया में आधिकारिक रूप से पात्रता और नियम ही निर्णायक आधार माने जाते हैं।

कोटवार संघ ने जताई नाराज़गी

जिला स्तर पर कोटवार संघ के प्रतिनिधियों ने भी इस नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यदि चयन मानदंडों में कोई बदलाव किया गया है तो उसकी स्पष्ट अधिसूचना जारी होनी चाहिए। बिना सार्वजनिक स्पष्टता के प्रक्रिया बदलना पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े करता है। संघ ने संकेत दिया है कि यदि पारंपरिक वरीयता व्यवस्था की अनदेखी की गई तो वे सामूहिक विरोध का रास्ता अपना सकते हैं।

एसडीएम की भूमिका पर भी चर्चा

इस पूरे प्रकरण में निर्णय देने वाले अनुविभागीय अधिकारी तुलसीदास मरकाम का नाम चर्चा में है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा में है कि संबंधित अधिकारी पहले एक अलग प्रकरण में निलंबन की कार्रवाई झेल चुके हैं। हालांकि, वर्तमान नियुक्ति विवाद से उस मामले का आधिकारिक संबंध स्पष्ट नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी कारण इस निर्णय को लेकर अतिरिक्त पारदर्शिता और स्पष्ट स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जा रही है।

उच्च स्तर तक पहुंची शिकायतें

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत उच्च प्रशासनिक स्तर तक भेजी है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद उत्पन्न न हों। गांव में फिलहाल यही प्रश्न चर्चा में है कि ग्रामसभा की अनुशंसा के बावजूद अंतिम निर्णय किन आधारों पर बदला गया।

मुकेश सोनी, संवाददाता
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