Chhattisgarh

पांडुका वन परिक्षेत्र में वन्य प्राणियों पर संकट।

किरीट ठक्कर
गरियाबंद। पिछले दो वर्षों में ही वन परिक्षेत्र पांडुका में वन्य प्राणियों की संख्या बेहद कम हो चुकी है। नदी, झरने और सुंदर पहाड़ियों से आच्छादित ये जंगल वन्य जीवों के लिए कुछ समय पहले तक बेहद सुरक्षित था।
जतमई-घटारानी
विदित हो वन परिक्षेत्र पांडुका के अंतर्गत तौरेन्गा, दीवना, घटारानी, जतमई, तालेसर, गायडबरी आदि गांव के आस पास घना जंगल है जहां कभी जंगली जानवरों की बहुतायत होती थी। इसी वन परिक्षेत्र में जतमई और घटारानी जैसे सुरम्य प्राकृतिक स्थल भी है। कभी यहाँ हिरणों और नीलगाय के झुंड नजर आते थे, किन्तु अब ये भी एक्का-दुक्का नजर आ जाये तो बड़ी बात है।
प्रतीकात्मक छायाचित्र
जानकारी के अनुसार इस वन परिक्षेत्र में शिकारी सक्रिय है जो इन बेजुबान जानवरों का बेरहमी से शिकार मांस भक्षण के लिए करते है। प्राकृतिक स्थल जतमई घटारानी में लगातार सैलानियों का आना लगा रहता है जिसकी वजह से बाहरी शिकारियों के यहाँ आने पर आसपास के ग्रामीणों को उनके इरादों का इल्म नही हो पाता।

मृत मिला भारी भरकम जंगली सुवर

प्रतीकात्मक छायाचित्र
दो दिनों पूर्व ग्राम तौरेन्गा के पास खेत मे ग्रामीणों ने एक भारी भरकम सुवर को मृत अवस्था मे देखा, जिसकी सूचना वन कर्मियों को दी गई। जानकारों के अनुसार इस मृत सुवर का वजन करीब 200 किलो रहा होगा। कुछ लोगो ने इसे गोली मारने की आशंका व्यक्त की है।
सूत्रों का तो ये भी कहना है कि आए दिन जंगल मे शिकारियों की गोलियों की आवाज सुनाई देती है। यहाँ शिकारी लग्जरी गाड़ियों में आकर अत्याधुनिक हथियारों से लैस, हिरणों और जंगली सुवर का शिकार करते हैं। जिसकी वजह से वन्य जीव जन्तुओ की संख्या लगातार कम होती जा रही है जो चिंता का विषय है।
मृत मिले जंगली सुवर के शव को वन कर्मियों ने खेत से लाकर पोंड डिपो में पोस्टमार्टम कर दफनाया है। रिपोर्ट आने के बाद सुवर की मौत का खुलासा होने की बात कही जा रही है।
“रेंज ऑफिसर अली साहब से हमने इस मुद्दे पर जानकारी ली तो उन्होंने दो चार कार्यवाही की बात करते हुए मीटिंग में होने का हवाला दिया और मोबाइल डिस्कनेक्ट कर दिया…!”

Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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