प्रदेश में इन दिनों एक नए व्यापार ने तेजी से अपना पैर पसारना प्रारंभ कर दिया है, इस व्यापार का नाम है “रक्त व्यापार” राजधानी के साथ-साथ संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश के लगभग प्रमुख आला मेडिकल संस्थानों (चिकित्सालयों) और यहां तक कुकुरमुत्ते की तरह जगह-जगह संचालित पैथोलॉजी लैब में भी अब रक्त के आदान-प्रदान की प्रक्रिया आम हो गई है।
कहीं राजनीतिक दखलअंदाजी तो कहीं बाहुबलियों की गुंडागर्दी तो कहीं रुपयों की हरियाली; जिसने जब चाहा तब “स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार)” द्वारा निर्धारित नियम एवं कानून को; पैसा एवं पहुंच के माध्यम से एक खिलौना बना कर मानवीय संवेदनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। कोई मरे या जिए इन्हें किसी की परवाह नहीं…!
रायपुर (hct)। दिनांक 12 अगस्त 2019 की पहली कड़ी में “बालोद जिला मुख्यालय में अनेक चिकित्सा संस्थानों पैथोलॉजी लैब में ब्लड का अवैध कारोबार” के नाम से पहली कड़ी का प्रसारण किया था। इस कड़ी में हमने यह बताने का प्रयास किया था कि, सन 2011 की स्थिति में समूचे छत्तीसगढ़ प्रदेश में कुल 23 निजी संस्थानों तथा 15 शासकीय चिकित्सालय एवं 4 भारत सरकार के अधीन ब्लड बैंक संचालित हो रहे थे। रक्त कोषालयो के संचालन हेतु “केंद्रीय लाइसेंस स्वीकृति प्राधिकरण, नई दिल्ली” द्वारा निर्धारित अनेक शर्तों एवं नियमों व मापदंडों की औपचारिकताओं को नियमानुसार पूरा करने के पश्चात ही आवश्यक जांच प्रतिवेदन तथा अनुशंसा के बाद “ब्लड बैंक” संचालन हेतु लाइसेंस प्रदान किया जाता है। साथ ही इस कड़ी में यह भी बताया गया था कि, ब्लड बैंक के संचालन हेतु “औषधि एवं प्रसाधन सामग्री, अधिनियम 1940” के तहत निर्धारित नियमों के पालन में अनुमति प्रदान की जाती है; जिसका की बालोद जिला में किसी भी तरह से किसी भी चिकित्सालय एवं कुकुरमुत्ते की तरह संचालित पैथोलॉजी लैब में पालन नहीं किया जा रहा है वही जिला “बालोद जिला कलेक्टर की अनभिज्ञता और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की सांठगांठ से संचालित रक्त के अवैध व्यापार” के किस्सा का खुलासा करने का वादा किया था।
अपने वादे के अनुरूप इस कड़ी में हम आपको बालोद जिला में संचालित अनेक वैध एवं अवैध पैथोलॉजी लैब का पोल खोल रहे हैं। आपको बता दें कि किसी भी मानद पैथोलॉजी लैब के लिए निम्नलिखित सुविधाओं का होना अति-आवश्यक है – 1. कार्यरत कर्मचारियों हेतु जहां तक आवश्यक हो स्वच्छ कपड़े, दास्ताने, एप्रोन तथा सिर और मुंह-नाक आदि पूरे ढंके होने के साथ-साथ वहां पर्याप्त स्वच्छ और सुविधाजनक हाथ धोने और शौचालय की सुविधा होनी चाहिए।
2. प्रत्येक ब्लड बैंक में पूरे समय सक्षम तकनीकी स्टाफ की निम्नलिखित श्रेणीया अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा:- 1. चिकित्सा अधिकारी 2. तकनीशियन 3. पंजीकृत नर्स 4. तकनीकी पर्यवेक्षक

15 जनवरी 2018 को प्रकाशित दैनिक भास्कर के हवाले से सुप्रीम कोर्ट ने पैथोलॉजी लैब को चलाने के लिए एमडी पैथोलॉजिस्ट योग्यता धारक का होना जरूरी माना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब हर कोई व्यक्ति या गैर योग्यता धारक लोग पैथोलॉजी लैब नहीं चला सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने पैथोलॉजी लैब धारक की योग्यता के मामले में एमसीआई की गाइडलाइन को सही माना, और जारी किए नए दिशा-निर्देश :

  1. n रिपोर्ट में साइन करने के लिए पैथोलॉजिस्ट का लैब में रहना जरुरी
  2. • केवल डिजिटल साइन से पैथोलॉजिस्ट की रिपोर्ट मान्य नहीं
  3. • एमबीबीएस और दूसरे विभागों से एमडी पैथोलॉजी लैब नहीं चला सकेंगे।
  4. • लैब टेक्नीशियन जांच रिपोर्ट पर साइन नहीं कर सकेंगे।

प्रदेश में मरीजों की जांच के हित में पैथोलॉजी लैब के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने जो भी दिशा-निर्देश दिया है उसकी सख्ती से पालना करवाई जाएगी व अफसरों को जरूरी निर्देश दिए जाएंगे।

छापा मरेंगे, नोटिस भेजेंगे, मगर कार्यवाही… टाँय-टाँय फिस्स….!

जिला में पंजीकृत पैथोलॉजी लैबों पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है, तो बड़ी संख्या में अपंजीकृत लैब चल रही हैं। कई लैब बिना पैथोलॉजिस्ट के चल रही हैं। चिकित्सा विभाग भी चूहे बिल्ली का खेल खेल रहा है। छापे मारता है, गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भेजता है, मगर कार्रवाई के नाम पर है शून्य। कितनी पैथोलॉजी लैब पर कार्रवाई की गई, इसका रिकार्ड भी विभाग के पास नहीं है।

“छत्तीसगढ़ प्रदेश में इसका (उपरोक्त) कहीं कोई प्रतिपालन नहीं।”

फिलहाल केन्द्र सरकार द्वारा पैथाेलॉजी लैब चलाने की गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं करने के कारण प्रदेश में पैथोलॉजी लैब बिना किसी नियमों के ही चल रहे हैं।

उपरोक्त परिलक्षित पैथोलॉजी लैब के छायाचित्रों में से एक “ॐ साईं नाथ पैथोलाजी लैब” का स्टिंग ऑपरेशन हमारे पास सुरक्षित है, जिसमें उसके संचालक साहू जी के साथ रक्त (ब्लड) चढ़वाने की बातचीत का पूरा ब्यौरा है।

ये जांचें होती हैं पैथोलॉजी में

खून, आरबीसी, ईएसआर, प्लेटलेट्स काउंट, सीबीसी, ब्लीडिंग टाइम, क्लोटिंग टाइम, हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप व टीईसी।

लैब रजिस्ट्रेशन नहीं होने से संख्या पता नहीं

क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पैथोलोजी लैब का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। केन्द्र सरकार की ओर से मिनिमम स्टेंडर्ड के नहीं बनने पैथोलोजी लैब का रजिस्ट्रेशन नहीं होने से संख्या के बारे कहना मुश्किल है। वैसे बालोद जिला में टोटल 15 पैथोलॉजी लैब है, जिसमे से 6 के पास अस्थाई लाइसेंसी है, बाकी…
“आगामी कड़ी में बालोद जिला मुख्यालय स्थित सागर हॉस्पिटल में चल रहे अवैध रूप से रक्त चढाए जाने का भंडाफोड़ जिसे संरक्षण दे रहे हैं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी”

क्रमशः…

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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