आखिर कैसे “स्कूल चलें हम…?”
कीचड़ भरे रास्ते से परेशान बच्चे…
लगभग 50 लाख की लागत से एनटीपीसी लारा प्रबन्धन ने बनवाया था स्कूल

नीतिन सिन्हा
रायगढ़। जिले में मानसून ने भले काटने की जल्दीबाजी में शाला भवन अजर आहता निर्माण में बरती ही कुछ धांधलियों पर उद्योग प्रबन्धन का उचित ध्यान नही गया। जिसका दुष्परिणाम यह रहा कि स्कूल भवन ने मुख्य द्वार के पास एनटीपीसी प्रबन्धन के द्वारा 12-15 फ़ीट चौड़ी तथा 5 फिट गहरी ड्रेन खोद कर छोड़ दी गई। जिसका निर्माण न हो पाने की वजह से प्राथमिक शाला भवन तक बच्चे और शिक्षक पहुंच नही पा रहे हैं। तीन दिनों से जारी बारिश की वजह से स्कूल के मुख्य द्वार पर खोदे गए ड्रेन से निकाली गई मिट्टी दलदल में बदल गई। जिसे पार कर स्कूल भवन तक जाना किसी चुनौती से कम नही है। यही वजह रही कि मानसून के प्रथम चरण की बारिश के बीच स्कूल बीते दो दिनों से बन्द पड़ा हुआ है।
स्कूल भवन निर्माण में कुछ अन्य खामियां भी पाई गई है जो बारिश के होते ही सामने दिखने लगी है। स्कूल भवन का प्रांगण (मैदान) जिसे नई मिट्टी से पाटा गया है वह भी अधिकांश जगहों पर कीचड़ भरे दलदल में तब्दील हो गया है। बहरहाल बारिश के बीच आज सुबह जब कुछ उत्साही बच्चे स्कूल भवन पहुंचे तो कल की तरह आज भी स्कूल भवन को बंद पाया। स्कूल के मेंन-गेट के पास कीचड़ में घुसकर खड़े कुछ बच्चों को जब किसी जागरूक नागरिक ने देखा तो उसने सोशल मीडिया में यूनिफार्म में खड़े इन नन्हे-मुन्हे बच्चो की तस्वीरें इन दो लाइनों के साथ पोस्ट कर कि “कीचड़ भरे रास्ते….आखिर कैसे स्कूल चलें हम”
सोशल मीडिया में वायरल हुई यह तस्वीर जैसे ही मीडिया कर्मियों तक पहुँची सबने अपने अंदाज में खबरें बनानी शुरू कर दी। वही हमने भी बच्चों की समस्या को लेकर एनटीपीसी के पीआरओ अरूण मिश्रा से बात की तो उन्होंने कहा आप (मीडिया) के माध्यम से जैसे ही हम तक स्कूल के बच्चों की परेशानी सामने आई हमने पूरी जिम्मेदारी के साथ वहां सुधार कार्य प्रारम्भ करवा दिया है। हम अपनी तरफ से बच्चों और शिक्षकों को हुई समस्या के लिए खेद प्रकट करते है। भविष्य में स्कूल की व्यवस्था में कोई चूक न हो इस बात का पूरा ध्यान एनटीपीसी प्रबन्धन रखेगा।
इधर हमने स्थानीय ग्रामीणों से एनटीपीसी के पीआरओ के कथन की पुष्टि भी करवा ली और पाया कि वास्तव में एनटीपीसी प्रबंधन ने सुधार कार्य शुरू करवा दिया है।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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