वादों की सरकार, जनता बदहाल
जीवराखन साहू ने मनरेगा, महतारी वंदन, श्रमिक सहायता और खनिज निधि के उपयोग पर उठाए सवाल

कांग्रेस कमेटी असंगठित समस्या निवारण प्रकोष्ठ, जिला बालोद के अध्यक्ष जीवराखन साहू ने केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार पर जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि घोषणाओं और उपलब्धियों के प्रचार से जनता की समस्याएं दूर नहीं होतीं। मनरेगा में सामने आई कमियों, श्रम सम्मान राशि के भुगतान, महतारी वंदन योजना के लाभार्थियों और जिला खनिज न्यास (DMF) की राशि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकारों को योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचाने और कमियों पर जवाब देने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मनरेगा में कमियों पर सवाल
केंद्र की मोदी सरकार और छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार विकास तथा जनकल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियां गिनाती हैं, लेकिन ग्रामीण मजदूरों, छोटे किसानों और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की समस्याएं अब भी सवाल खड़े करती हैं। कांग्रेस कमेटी असंगठित समस्या निवारण प्रकोष्ठ, जिला बालोद के अध्यक्ष जीवराखन साहू का कहना है कि योजनाओं के प्रचार के साथ उनके जमीनी क्रियान्वयन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
इसे भी पढ़ें >> महानवमी पर धानापुरी में मचेगा भक्ति का महासंग्राम
छत्तीसगढ़ में मनरेगा के क्रियान्वयन पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की निष्पादन लेखापरीक्षा में योजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, रोजगार सृजन, निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण से संबंधित कमियां दर्ज की गईं। रिपोर्ट में कुछ कार्यों के लिए ग्रामसभा की स्वीकृति और सहभागी नियोजन की प्रक्रिया के पर्याप्त पालन नहीं होने की बात भी सामने आई। ऐसे में ग्रामीण रोजगार योजना की कमियों को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है।
श्रमिकों की सहायता और भुगतान का मुद्दा
जून 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी महासंघ ने आरोप लगाया था कि श्रम सम्मान राशि का भुगतान रुकने से करीब 35 हजार कर्मचारी प्रभावित हुए। महासंघ के मुताबिक, पात्र कर्मचारियों को हर महीने चार हजार रुपये की सहायता मिलती थी। भुगतान रुकने के पीछे नियुक्ति अथवा कार्यादेश से जुड़ी शर्तों का हवाला दिया गया था।
यह संगठन का आरोप है, इसलिए भुगतान की मौजूदा स्थिति और सरकार का पक्ष अलग से स्पष्ट होना जरूरी है। सरकारी व्यवस्था में काम करने वाले अनियमित कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए, जिससे पात्र लोगों की सहायता अनावश्यक रूप से न अटके।
महतारी वंदन योजना में पारदर्शिता जरूरी
महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। हालांकि, लाभार्थियों के नाम हटाए जाने और नए पात्र आवेदकों के पंजीयन को लेकर पारदर्शिता का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा में योजना से 1,64,464 लाभार्थियों के नाम हटाए जाने की जानकारी दी गई थी। इनमें 1,23,700 हितग्राही मृत श्रेणी में और 40,764 अपात्र श्रेणी में रखे गए थे। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विधानसभा में दी थी।
सवाल यह है कि पात्रता संबंधी शिकायतों का निपटारा किस तरह किया जा रहा है और यदि कोई पात्र महिला सूची से छूट गई है, तो उसे योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया कितनी सरल है। योजना की पारदर्शिता और शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना जरूरी है।
खनिज निधि के उपयोग का हिसाब
छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (DMF) की राशि के उपयोग पर भी जवाबदेही आवश्यक है। जुलाई 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015-16 से 2023-24 के दौरान राज्य के जिला खनिज न्यासों को 13,101 करोड़ रुपये मिले, जिनमें से 10,253 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेखापरीक्षा में निधि के उपयोग, नियोजन, निविदा प्रक्रिया और पारदर्शिता से संबंधित कमियां बताई गईं।
खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पेयजल, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर इस निधि का प्रभावी उपयोग होना चाहिए। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनके क्षेत्र के लिए उपलब्ध राशि कहां खर्च हुई और उससे क्या लाभ मिला। लेखापरीक्षा में सामने आई आपत्तियों पर सरकार को जवाब देने के साथ सुधारात्मक कदम भी उठाने चाहिए।
किसानों की आय और सहायता का सवाल
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसान परिवारों को सालाना छह हजार रुपये की सहायता दी जाती है। यह राशि उपयोगी है, लेकिन खेती की बढ़ती लागत, खाद-बीज, सिंचाई, मजदूरी और मौसम संबंधी जोखिम जैसी चुनौतियों का समाधान केवल इससे संभव नहीं है।
यदि सरकारें किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने का दावा करती हैं, तो उन्हें उचित मूल्य, खेती की लागत कम करने और फसल नुकसान की स्थिति में प्रभावी राहत जैसे मुद्दों पर भी जवाब देना होगा।
योजनाओं के साथ जवाबदेही भी जरूरी
जीवराखन साहू की राजनीतिक टिप्पणी का मूल सवाल यह है कि सरकारी योजनाओं को केवल घोषणाओं, विज्ञापनों और लाभार्थियों की संख्या के आधार पर सफल नहीं माना जा सकता। मनरेगा की लेखापरीक्षा में सामने आई कमियां, श्रम सम्मान राशि को लेकर कर्मचारी संगठन की शिकायतें, महतारी वंदन योजना में लाभार्थियों की सूची और DMF के उपयोग पर उठे सवाल पारदर्शिता की जरूरत रेखांकित करते हैं।
केंद्र हो या राज्य, सरकारों को बताना चाहिए कि स्वीकृत राशि कहां खर्च हुई, पात्र लोगों तक लाभ पहुंचा या नहीं और शिकायतों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए। विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह दस्तावेजों और प्रभावित लोगों के अनुभवों के आधार पर सवाल उठाए। जनता को योजनाओं के नाम नहीं, उनका वास्तविक लाभ चाहिए और कमियां सामने आने पर जवाबदेही भी।



