बोदल राशन वितरण में गड़बड़ी? ऑनलाइन रिकॉर्ड में पूरा हिसाब
गुंडरदेही की उचित मूल्य दुकान में अगस्त-सितंबर की शक्कर-नमक नहीं मिलने का हितग्राहियों का आरोप, सरपंच पति पर दुकान संचालन को लेकर भी सवाल

गुंडरदेही। बालोद जिले के गुंडरदेही क्षेत्र की ग्राम पंचायत बोदल स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में बोदल राशन वितरण को लेकर हितग्राहियों की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अगस्त और सितंबर माह की शक्कर तथा नमक उन्हें निर्धारित मात्रा में नहीं मिला, जबकि ऑनलाइन राशन वितरण रिकॉर्ड में सामग्री के वितरण की जानकारी दर्ज दिखाई दे रही है।
बोदल की राशन दुकान में शक्कर-नमक वितरण पर सवाल
हितग्राहियों की शिकायत के अनुसार बोदल राशन वितरण में अगस्त और सितंबर माह की शक्कर तथा नमक को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। वास्तविक वितरण, स्टॉक रजिस्टर और ऑनलाइन रिकॉर्ड के मिलान से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दर्ज वितरण और हितग्राहियों को प्राप्त सामग्री में कोई अंतर है या नहीं।
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हितग्राहियों के अनुसार दुकान से अगस्त और सितंबर माह की शक्कर एवं नमक का वितरण नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें राशन सामग्री प्राप्त नहीं हुई, जबकि ऑनलाइन पोर्टल पर वितरण दर्ज होने की जानकारी सामने आ रही है। इस स्थिति में वास्तविक वितरण और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि पोर्टल पर दर्ज वितरण और हितग्राहियों को मिली सामग्री में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी।
बोदल राशन दुकान के संचालन को लेकर सवाल

ग्रामीणों के मुताबिक बोदल की संबंधित उचित मूल्य दुकान में सेल्समैन के रूप में सरपंच चित्रलेखा के पति अविनाश गंजीर दुकान का संचालन कर रहे हैं। हितग्राहियों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित राशन सामग्री पूरी मात्रा में नहीं मिल रही है। इसी को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि संबंधित सामग्री का वास्तविक वितरण नहीं हुआ, तो ऑनलाइन व्यवस्था में वितरण दर्ज किस आधार पर किया गया।
सितंबर की शक्कर को लेकर अलग-अलग जानकारी
सितंबर माह की शक्कर के संबंध में दुकान संचालक अविनाश गंजीर से जानकारी लेने पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पहले सितंबर माह में शक्कर का आबंटन नहीं होने की बात कही गई, जबकि बाद में सितंबर के अंतिम दिनों में शक्कर दुकान पहुंचने की बात सामने आई। आबंटन नहीं होने और बाद में दुकान तक सामग्री पहुंचने से जुड़े इन दोनों बयानों के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए आबंटन-पत्र, आपूर्ति रिकॉर्ड और दुकान के स्टॉक का मिलान आवश्यक है।
बोदल राशन वितरण पर हितग्राहियों की शिकायत
मामले का प्रमुख बिंदु ऑनलाइन वितरण रिकॉर्ड है। ग्रामीणों का कहना है कि सितंबर माह की शक्कर उन्हें नहीं मिली, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में वितरण पूर्ण दर्ज दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि पोर्टल पर दर्ज वितरण के अनुसार कितने हितग्राहियों को कितनी मात्रा में शक्कर और नमक वितरित किया गया तथा संबंधित हितग्राहियों के पास वास्तव में कितनी सामग्री पहुंची। यदि जांच में ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच अंतर सामने आता है, तो यह पीडीएस व्यवस्था में गंभीर अनियमितता का विषय बन सकता है।
स्टॉक, ई-पॉस और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान जरूरी
मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए दुकान के स्टॉक रजिस्टर, आबंटन-पत्र, वितरण रजिस्टर, ई-पॉस मशीन का रिकॉर्ड, ऑनलाइन पोर्टल की एंट्री और गोदाम से दुकान तक सामग्री पहुंचने के दस्तावेजों की जांच आवश्यक होगी। इसके साथ दुकान में उपलब्ध वास्तविक भौतिक स्टॉक का भी रिकॉर्ड से मिलान किया जाना होगा। अगस्त और सितंबर में शक्कर तथा नमक की कितनी मात्रा का आबंटन हुआ, कितनी मात्रा दुकान तक पहुंची, कितनी सामग्री वितरित हुई और कितनी मात्रा शेष रही—इन आंकड़ों के मिलान से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
खाद्य निरीक्षक ने गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की बात कही
गुंडरदेही खाद्य निरीक्षक एकांत वर्मा से मामले की जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि प्रत्येक माह उचित मूल्य दुकानों में राशन सामग्री पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी दुकान में राशन सामग्री के वितरण में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अनियमितता प्रमाणित होने पर कार्रवाई का प्रावधान
यदि जांच में राशन सामग्री के कम वितरण, स्टॉक में अंतर, वास्तविक वितरण के विपरीत ऑनलाइन प्रविष्टि अथवा अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ लागू नियमों के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। मामले की प्रकृति और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर उचित मूल्य दुकान के संचालन से संबंधित अनुमति या लाइसेंस के संबंध में भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार निर्णय लिया जा सकता है।
वास्तविक वितरण और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच अहम
ग्रामीणों की शिकायत के केंद्र में राशन सामग्री नहीं मिलने और ऑनलाइन वितरण दर्ज होने के बीच का अंतर है। इसलिए मामले में केवल हितग्राहियों के बयान ही नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और दुकान के भौतिक स्टॉक का सत्यापन भी महत्वपूर्ण है। यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर मिलता है तो यह भी देखा जाना आवश्यक होगा कि दुकान के स्टॉक और वितरण का नियमित सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। फिलहाल किसी अधिकारी की मिलीभगत का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर अगस्त और सितंबर माह के राशन का वास्तविक स्टॉक, वितरण रिकॉर्ड, ई-पॉस मशीन की प्रविष्टियां और ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का मिलान कराने की मांग की है। जांच के दस्तावेज और वास्तविक स्टॉक के मिलान से ही शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



