Chhattisgarh

रोहिणा में ‘जल जीवन मिशन’ बना शोपीस

लाखों खर्च के बाद भी गांव में नहीं पहुंचा पानी, अधूरी व्यवस्था पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

सुनील महापात्र : ब्यूरो प्रमुख 

महासमुंद hct : बसना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रोहिणा में संचालित रोहिणा जल जीवन मिशन अब ग्रामीणों के बीच सवालों का विषय बनता जा रहा है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का लाभ लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, ताकि गांवों में पानी की समस्या दूर हो सके। इसी योजना के तहत बसना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत रोहिणा में वर्ष 2021-22 के दौरान पेयजल व्यवस्था विकसित करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए। कागजों में यह योजना ग्रामीणों के लिए राहत का जरिया दिखाई देती है, लेकिन जमीनी स्थिति अब भी अधूरी तस्वीर पेश कर रही है। गांव में बनाई गई पानी टंकी और उससे जुड़ी व्यवस्थाएं उपयोग में नहीं आ पा रही हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

रोहिणा गांव में जल जीवन मिशन योजना का सूचना बोर्ड, जिस पर परियोजना लागत और निर्माण विवरण अंकित है
रोहिणा गांव में जल जीवन मिशन योजना का सूचना बोर्ड, जिस पर परियोजना लागत और निर्माण विवरण अंकित है

रोहिणा जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत

जानकारी के अनुसार इस योजना की अनुमानित राशि 58.21 लाख रुपये बताई गई थी, जबकि अनुबंधित राशि लगभग 70.21 लाख रुपये तक पहुंची। निर्माण कार्य का जिम्मा ठेकेदार मुकुल चंद्रा को सौंपा गया था। योजना के तहत पानी टंकी, पाइपलाइन और बोर खनन का कार्य कराया गया, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को नियमित जल आपूर्ति नहीं मिल सकी। गांव के कई हिस्सों में पाइपलाइन तो बिछाई गई, परंतु नलों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में ग्रामीण अब योजना की उपयोगिता और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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रोहिणा जल जीवन मिशन में अधूरी व्यवस्था पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि जिन स्थानों पर बोर खनन किया गया था, वहां से बाद में संरचनाएं और उपकरण तक हटा लिए गए। पंचायत को अब तक विधिवत रूप से योजना हस्तांतरित नहीं की गई है। गांव में खड़ी पानी टंकी अब केवल एक प्रतीक बनकर रह गई है, जबकि लोगों को आज भी पानी के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जब कई परिवारों को दूरस्थ जलस्रोतों का सहारा लेना पड़ता है।

रोहिणा गांव में जल जीवन मिशन के तहत निर्मित अधूरी पानी टंकी परिसर, जहां पेयजल व्यवस्था शुरू होने का अब भी इंतजार है
रोहिणा गांव में जल जीवन मिशन के तहत निर्मित अधूरी पानी टंकी परिसर, जहां पेयजल व्यवस्था शुरू होने का अब भी इंतजार है

स्थानीय लोगों का कहना है कि रोहिणा जल जीवन मिशन शुरू होने के समय ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि अब पेयजल संकट खत्म हो जाएगा, लेकिन वर्षों बाद भी हालात में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। कई ग्रामीण निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर निगरानी और जवाबदेही तय होती, तो शायद यह योजना अधूरी स्थिति में नहीं पहुंचती।

रोहिणा जल जीवन मिशन में जवाबदेही की मांग

रोहिणा का मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी कितनी प्रभावी है। सरकारें गांवों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन यदि योजनाएं धरातल पर अधूरी रह जाएं तो उसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि योजना को जल्द शुरू कर लोगों तक पेयजल सुविधा पहुंचाई जा सके।

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