खोखमा पंचायत में ₹1.51 लाख का घोटाला !
गरियाबंद में पंचायती भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: उपसरपंच को उपकृत करने सचिव ने खेला बिलों का खेल, खुद कबूली गलती।

गरियाबंद hct : खोखमा पंचायत से विकास कार्यों के नाम पर आने वाली सरकारी राशि में गड़बड़झाला कर चहेतों को फायदा पहुंचाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। मैनपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत खोखमा में पंचायत के वित्तीय लेन-देन से संबंधित एक बड़ा मामला सामने आया है। ताजा मामला पंचायत सचिव थानसिंह नायक के कारनामों से जुड़ा है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपने ही ग्राम पंचायत के उपसरपंच को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए लगभग ₹1.51 लाख के बिल काट डाले।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत खोखमा में विभिन्न कार्यों और सामग्रियों की खरीदी के नाम पर जो बिल हमारे हाथ आए हैं इन बिलों में वृहद तौर पर अनियमितता और फर्जीवाड़ा साफ नजर आ रहा है। बिना उचित प्रक्रिया और सरकारी नियमों का पालन किए, चुने हुए जनप्रतिनिधि के नाम पर ही लाखों रुपये का भुगतान दर्शाने की साज़िश रची गई। जैसे ही इस ‘बिल का खेल’ की भनक पंचायत के अन्य लोगों और ग्रामीणों को लगी, पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
1.51 लाख का घपला – घोटाले का पुलिंदा

हमारे संवाददाता के माध्यम से जो बिल हमें प्राप्त हुआ है उसमे एक बिल डोजर द्वारा 10 घंटा सफाई कार्य के नाम पर चढ़ाकर व्यय राशि रुपए 12000 दर्शाया गया है गौर करने वाली बात यह है कि यह एक ऐसे फर्म का है जो “मेसर्स खुशबु कृषि फार्म” का है जो बिल्डिंग मटेरियल भी सप्लाई का काम करता है। वहीं दूसरा बिल जो “मेसर्स ओंकार हार्डवेयर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स” नाला बंधान दर्शाते हुए मात्रा में 49 और राशि के कालम में रूपए 49000 अंकित है तो एक तीसरा बिल जो मेसर्स जी एस राजपुरोहित, धुरवागुडी का है जो अनाज, वनोपज के साथ – साथ बिल्डिंग मटेरियल भी सप्लाई का काम करता है, में सामुदायिक शौचालय स्थल धुरवागुड़ी हेतु बिल्डिंग मटेरियल (गिट्टी, सीमेंट, छड़ और तार) की राशि ₹35 हजार, ₹26,550, ₹25,515 और ₹2,935 की चार अलग-अलग प्रविष्टियां दर्ज कुल रूपए 90000 की रकम व्यय मद में समायोजित किया गया है।
सचिव ने माना गलती हुई है
मामले का खुलासा होते ही जब पंचायत सचिव थानसिंह नायक से सवाल किए गए, तो उन्होंने कि गलती तो हुई है, लेकिन काम तो हुआ है, सरपंच ने काम लिया है। अतः काम हुआ है तो बिल लगवाए हैं। सचिव का यह भी कहना है गलती स्वीकार करे ना करे जो हुआ है वह तो दिख ही रहा है, उनके इस कथन से साफ हो गया है कि पंचायत में किस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। मामले की जानकारी जिला पंचायत प्रशासन तक भी पहुंच चुकी है। जिला पंचायत गरियाबंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए संज्ञान में लिया है।
प्रशासन सख्त, कार्रवाई की तैयारी:
इस पूरे गंभीर वित्तीय घपले पर गरियाबंद जिला पंचायत के सीईओ प्रखर चंद्राकर ने सख्त रुख अपनाया है, उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला बेहद गंभीर है। एक टीम बनाकर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


