भैजा मैदानी में 700 पेड़ों की अतिरिक्त कटाई पर सवाल
935 पेड़ों की मिली थी अनुमति, शिकायत में 1635 पेड़ काटने का दावा; 13.85 लाख रुपये के हिसाब पर भी उठे सवाल

गुरूर/बालोद। ग्राम पंचायत भैजा मैदानी में नीलगिरी के पेड़ों की कटाई का मामला अब विवादों में घिरता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राजस्व विभाग से 935 पेड़ों की कटाई की अनुमति मिलने के बावजूद मौके पर कुल 1635 पेड़ काट दिए गए। यदि शिकायत में बताए गए आंकड़े सही हैं, तो अनुमति प्राप्त संख्या से 700 पेड़ अधिक काटे जाने का सवाल खड़ा होता है।
मामला ग्राम भैजा मैदानी स्थित खसरा नंबर 10/1 से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस जमीन पर कुल 1635 नीलगिरी के पेड़ थे, जिनमें से पुराने और जर्जर बताए गए 935 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी। अब शिकायत के जरिए पूछा जा रहा है कि शेष 700 पेड़ों की कटाई किस अनुमति या आदेश के आधार पर की गई।
अनुमति 935 पेड़ों की, शिकायत में कटाई 1635 की

जानकारी के मुताबिक 8 सितंबर 2025 को कुछ शर्तों के साथ 935 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी। अनुमति से जुड़ी शर्तों में प्रत्येक कटे हुए पेड़ के बदले दस गुना फलदार पौधे लगाए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसके बाद 26 सितंबर 2025 से पेड़ों की कटाई शुरू होने की बात सामने आई है। लेकिन शिकायत में दावा किया गया है कि कटाई केवल स्वीकृत 935 पेड़ों तक सीमित नहीं रही और कुल 1635 पेड़ काट दिए गए। यहीं से मामले का सबसे अहम सवाल सामने आता है—यदि अनुमति 935 पेड़ों की थी, तो अतिरिक्त 700 पेड़ों की कटाई किस आधार पर हुई?
13.85 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि का हिसाब कहां?
विवाद सिर्फ पेड़ों की संख्या तक सीमित नहीं है। शिकायत में पेड़ों की बिक्री और उससे प्राप्त होने वाली राशि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, नियमों के तहत निविदाकारों से 25 हजार रुपये की अमानत राशि जमा कराए जाने और सबसे ऊंची बोली लगाने वाले निविदाकार द्वारा पूरी राशि पंचायत में जमा किए जाने के बाद ही पेड़ों की कटाई की अनुमति दिए जाने की बात कही गई है।
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शिकायतकर्ता के मुताबिक 935 पेड़ों की बिक्री 18.50 लाख रुपये में किए जाने की प्रक्रिया में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है। वहीं, अनुमति से अतिरिक्त काटे गए बताए जा रहे 700 पेड़ों की अनुमानित कीमत 13.85 लाख रुपये बताई गई है। अब सवाल यह है कि यदि अतिरिक्त 700 पेड़ वास्तव में काटे गए, तो उनकी बिक्री से प्राप्त राशि का क्या हुआ? क्या यह राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा हुई? यदि हुई तो उसका रिकॉर्ड क्या है? और यदि नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
वीडियो और फोटोग्राफी से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
शिकायत में यह भी बताया गया है कि पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने के लिए अनुविभागीय अधिकारी, गुरूर के समक्ष आवेदन दिया गया था। ऐसे में मौके पर उपलब्ध फोटो-वीडियो, कटाई से पहले और बाद के रिकॉर्ड, पेड़ों की वास्तविक संख्या, अनुमति पत्र, निविदा दस्तावेज और पंचायत के बैंक खाते की जानकारी पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि रिकॉर्ड में 935 पेड़ों की ही अनुमति दर्ज है और मौके पर 1635 पेड़ों की कटाई प्रमाणित होती है, तो अतिरिक्त 700 पेड़ों की कटाई की वैधानिक अनुमति और उससे संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच अहम हो जाएगी।
प्रशासन के सामने पांच बड़े सवाल
- 935 पेड़ों की अनुमति के बावजूद 1635 पेड़ काटे जाने की शिकायत सही है या नहीं?
- यदि 700 पेड़ अतिरिक्त काटे गए, तो उनकी कटाई किस आदेश या अनुमति के आधार पर हुई?
- काटे गए पेड़ों की बिक्री से प्राप्त पूरी राशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा हुई या नहीं?
- अतिरिक्त 700 पेड़ों की अनुमानित 13.85 लाख रुपये की राशि का लेखा-जोखा क्या है?
- अनुमति की शर्त के अनुसार काटे गए पेड़ों के बदले फलदार पौधों का रोपण हुआ या नहीं?
फिलहाल ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर पेड़ों की वास्तविक कटाई, अनुमति की सीमा, बिक्री प्रक्रिया, प्राप्त राशि और पौधरोपण की स्थिति की जांच कराने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभाग की जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और मौके के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी। हाईवे क्राइम टाइम ने इस मामले में संबंधित पक्ष का जवाब जानने और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर आगे की पड़ताल की आवश्यकता को महत्वपूर्ण माना है।


