Bilaspur

आदिवासियों के अधिकारों पर डाका !

'राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र' बैगा समाज के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, साय सरकार की खामोशी पर उठे सवाल!

HIGHLIGHT

  • बैगा समाज के नाम पर 55 फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप,
  • पूर्व विधायक ने राज्यपाल से मांगी उच्चस्तरीय जांच
  • बिलासपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में सरकारी नौकरी पाने वालों की जाति जांच की मांग,
  • सितंबर 2025 की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का भी आरोप

बिलासपुर। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के नाम पर कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी कर सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां हासिल करने का गंभीर मामला सामने आया है। भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने राज्यपाल और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को लिखित शिकायत भेजकर बिलासपुर तथा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में ऐसे 55 मामलों की राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति से जांच कराने की मांग की है।

6 सितंबर 2026 को भरतपुर-सोनहत से जारी पत्र में पूर्व विधायक ने आरोप लगाया है कि अन्य जातियों के व्यक्तियों ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया और उसके आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। शिकायत में ऐसे सभी मामलों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों की नियुक्तियां निरस्त करने तथा उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

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पूर्व विधायक के पत्र के मुताबिक, नागाबैगा जन शक्ति संगठन के अध्यक्ष/सचिव राम सिंह बैगा एवं जेड राम बैगा तथा प्रेमलाल बैगा, जिलाध्यक्ष बैगा समाज, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और अन्य बैगा समाज पदाधिकारियों ने उन्हें इस कथित फर्जीवाड़े से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर बिलासपुर एवं जीपीएम जिले में 55 व्यक्तियों द्वारा शासकीय नौकरी प्राप्त किए जाने की शिकायत किए जाने की बात कही गई है।

सितंबर 2025 में भी हुई थी शिकायत

इस मामले में सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि शिकायत नई नहीं है। पत्र में उल्लेख है कि संबंधित संगठनों द्वारा 16 सितंबर 2025 को तत्कालीन राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग को भी लिखित शिकायत की गई थी। पूर्व विधायक का आरोप है कि उस शिकायत पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

यानी शिकायतकर्ताओं के अनुसार मामला सामने आने के बावजूद करीब एक वर्ष बाद भी कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की व्यापक जांच और सरकारी नियुक्तियों की वैधता पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी है।

गांव वालों के पंचनामा और सर्वे सूची भी शिकायत के साथ

शिकायत में केवल आरोप लगाने तक बात सीमित नहीं रखी गई है। पूर्व विधायक ने बताया है कि नांगाबैगा जन शक्ति संगठन द्वारा संबंधित 55 व्यक्तियों के संबंध में ग्रामवासियों का पंचनामा तैयार कर संलग्न किया गया है। इसके अलावा बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों की आधारभूत सर्वेक्षण सूची भी शिकायत के साथ लगाए जाने की बात कही गई है।

शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित सर्वे सूची में उन 55 शासकीय कर्मचारियों के नाम मौजूद नहीं हैं, जिनके बैगा जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है।

यही दस्तावेज अब इस पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल जाति प्रमाण पत्र की वैधता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए कथित रूप से गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल और संबंधित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तक जांच का दायरा पहुंच सकता है।

विधानसभा में भी उठ चुका है सवाल

पूर्व विधायक के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रश्न उठाया जा चुका है। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं की ओर से कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि बैगा समुदाय विशेष पिछड़ी जनजाति के रूप में संरक्षित समुदायों में शामिल है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी तरीके से बैगा जाति प्रमाण पत्र हासिल कर आरक्षण अथवा सरकारी सेवा का लाभ लिया है, तो इससे वास्तविक पात्र आदिवासी अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होने का सवाल सीधे खड़ा होता है।

अब राज्य स्तरीय जांच की मांग

पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने राज्यपाल और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव से मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तरीय जाति सत्यापन छानबीन समिति के माध्यम से जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में मांग की गई है कि जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर प्राप्त नियुक्तियों को निरस्त किया जाए और संबंधित दोषियों के विरुद्ध कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो।

बैगा समाज के नाम पर कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में 55 मामलों की जांच की मांग
बैगा समाज के नाम पर कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र जारी कर सरकारी नौकरी पाने के 55 मामलों की जांच की मांग।

इस पूरे मामले में अब असली सवाल यह है कि 55 कथित मामलों में जाति प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी हुए, सत्यापन किस स्तर पर हुआ, सरकारी नियुक्ति के समय दस्तावेजों की जांच किस अधिकारी ने की और सितंबर 2025 की शिकायत के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई?

इन सवालों का जवाब केवल विभागीय जांच से ही सामने आ सकता है। फिलहाल पूर्व विधायक की शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि होना बाकी है। लेकिन यदि दस्तावेजों में किए गए दावे जांच में सही साबित होते हैं, तो यह बैगा समाज के संवैधानिक अधिकारों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बन सकता है।

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