Welcome to CRIME TIME .... News That Value...

ChhattisgarhConcern

छग जेल विभाग को भी सरकारी पहल की प्रतीक्षा ?

अपनी बहुप्रतीक्षित मांगों को लेकर जेल परिवार ने कलेक्टर रायगढ़ के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

राज्य में गृह-मंत्रालय के अधीन प्रदेश पुलिस के जेल-विभाग से दोयम दर्जे का व्यवहार, सुधार को लेकर जेल परिवार को भी नई सरकार से अपेक्षा

*नितिन सिन्हा।

रायगढ़। आम तौर पर जेल परिसर का ध्यान आते ही हमारे मानस-पटल पर जेल ड्यूटी में तैनात चुस्त-दुरुस्त, बेहद चौकस, सजग और जिम्मेदार जेल-प्रहरियो सहित बुद्धिमान तर्क शील, तत्वरित निर्णय लेने की क्षमता वाले जेल-अधिक्षकों की तस्वीर उभर आती है।
हालांकि सातों दिन, चौबीसों घण्टे निरन्तर सेवा देने वाले जेल-प्रहरियों और अधीक्षकों का एक दूसरा दुःखद पहलू हमारे सामने कभी नही आ पाता है। जिसका सीधा सरोकार जेल विभाग के इस सबसे जिम्मेदार वर्ग के आर्थिक, मानसिक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। हालांकि राज्य सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राज्य पुलिस का यह अहम हिस्सा जिसे हम जेल विभाग (परिवार) के नाम जानते हैं। जेल परिवार की माने तो जेल विभाग छ ग राज्य निर्माण के समय से ही उपेक्षा का दंश झेल रहा हैं। राज्य शासन जेल विभाग छ ग को लेकर प्रारम्भ से ही दोयम दर्जे का व्यवहार करते आ रहा है। इस बात से आहत जेल परिवार के सदस्यों ने 7 जनवरी 2018 को जिला कलेक्टर रायगढ़ के माध्यम से राज्य इधर राज्य में जैसे ही नई संवेदनशील कांग्रेस सरकार सत्ता में आई है, तब से जेल विभाग को भी पुलिस विभाग की तरह सुधार होने की अपेक्षा नजर आने लगी है। जेल परिवार चाहता है कि कांग्रेस सरकार जिस तरह अपने चुनाव घोषणा पत्र के तहत पुलिस विभाग को सुधार व सुविधाएं देने की पहल कर रही है, उसी तरह जेल विभाग को भी सुधार व सुविधाएं प्रदान करे। जेल परिवार के लोग अपने इस मांग को लेकर मुखर रूप से सामने आने लगे हैं। इस क्रम में रायगढ़ जिला मुख्यालय के जेल परिवार के सदस्यों ने बीते 7 जनवरी 2019 को राज्य के मुख्यमंत्री के नाम जेल प्रहरी एवं मुख्य प्रहरी को पुलिस विभाग के समान वेतन भत्ते व अन्य सुविधाएं प्रदान करने हेतु लिखित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन पत्र में जेल-परिवार ने यह मांग की है कि जेल प्रहरी पुलिस सेवा के लिए आरक्षक के समान उपयुक्त मापदंड वाली शैक्षणिक व शारीरिक योग्यता रखते हुए भर्ती होता है। जबकि जेल में कार्यरत प्रहरी एवं मुख्य प्रहरी 24 घंटे सातों दिन गंभीर आपराधिक धाराओं में जेल में निरुद्ध दुर्दांत बंदियों के बीच विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए बंदियों निहत्थे ही देख-रेख व सुरक्षा करते हैं। बंदी जब चाहे तो किसी भी समय उन्हें अकेले पाकर हमला कर क्षति पहुंचा सकता है राज्य में ऐसी कई घटनाएं घटी भी हैं जिनमें जेल-
प्रहरियो को जानलेवा हमले का सामना करना पड़ा है। फिर भी जेल नियमावली के तहत जेल प्रहरियों बिना अनुमति के जेल परिसर को छोड़ना मना है और किसी भी समय आवश्यक होने पर उन्हें तत्काल ड्यूटी के लिए बुलाया जाता है।
जेल में कार्य प्रहरीयों को किसी प्रकार की साप्ताहिक अवकाश या शासकीय अवकाश नहीं मिल पाता है ! ना ही इसके एवज में पुलिस के समान उसे वर्ष में एक माह का अतिरिक्त वेतन दिया जाता है जेल प्रहरी को मात्र 700 से 800 रु का आवास भत्ता दिया जाता है। इतने कम पैसे में राज्य के किसी भी जिले में आवास मिलना संभव नहीं है जिसका सुधार किया जाना नितांत आवश्यक है। पुलिस विभाग के एक आरक्षक को नियमित समय अवधि के पश्चात पदोन्नति हेतु कई पद किए गए हैं, परंतु जेल प्रहरी को सिर्फ प्रहरी से मुख्य प्रहरी की एक ही पदोन्नति का अवसर प्राप्त होता है। यही नहीं बहुत कम वेतनमान पर जेल प्रहरी सेवा देते हैं ! पूरी सेवाकाल में अपना आवास तक नहीं बना पाते हैं। पुलिसकर्मियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना दी जाती है, जबकि जेल कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिलती है। ऐसी परिस्थितियों में जेल प्रहरी अपने माता-पिता की सेवा या परिजनों के साथ समय नहीं बिता पाता। जिसके कारण वह गहरे मानसिक तनाव और दूसरी अन्य बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। कम वेतनमान होने के कारण उन्हें अत्यधिक आर्थिक बोझ का उठाना पड़ता है इसे लेकर जेल विभाग के आला अधिकारी भी कभी कोई आवश्यक कदम उठाते नहीं दिखते हैं, अतः ज्ञापन पत्र के माध्यम से जेल परिवार के लोगों ने राज्य के नए मुख्यमंत्री से उनकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यथाशीघ्र सुधार कार्य हेतु पहल करने की अपील की है। उन्होंने ज्ञापन पत्र में यह भी कहा है कि, छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात पूर्व गृहमंत्री रामविचार नेताम के द्वारा कर्मचारियों को एक माह का वेतन देने के साथ ही प्रहरी वर्ग में भर्ती होने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति हेतु करने की घोषणा की थी, परंतु आज तक उस घोषणा का पालन नहीं हुआ जो कि जेल प्रहरियों के साथ अन्याय है अपनी मांगों के विषय में आगे लिखते हुए जेल परिवार ने राज्य के मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि ज्ञापन पत्र मिलते ही वे जेल विभाग को मांग उपयुक्त सुविधाएं प्रदान करने की कृपा करें जिससे जेल परिवार मुख्यमंत्री का सदैव आभारी होगा। बहरहाल जेल परिवार के सदस्यों ने पुलिस आरक्षकों की तरह प्रहरियों को 1800 रु ग्रेड पे की जगह आरक्षकों के समान 2100 रु का ग्रेड पे,13 महीनें का वेतन, साप्ताहिक अवकाश, एक समान भत्ता दिए जाने की जायज मांग कब पूरी होती है यह देखना लाजिमी होगा।
इस विषय मे मांग करने वाले जेल परिवार के एक सदस्य ने कहा कि बिना रोये खुद मां भी अपने बच्चे को दूध नही पिलाती तब सरकार कैसे उनकी तर्ज ध्यान देगी ?

क्या कहते है जेल अधिक्षक

इस संबंध में जेल अधीक्षक संतोष मिश्रा से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बताया कि ऐसी किसी मांग को लेकर ज्ञापन सौपने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है यह जेल परिवार के सदस्यों की निजी मांग हो सकती है।

जेल प्रहरी ही नही अधीक्षकों की स्थिति भी खराब।

कम वेतनमान कठिन सेवा का दबाव होने के कारण बड़ी संख्या में नौकरी छोड़ने जैसी स्थिति बन रही है। अपना नाम न बताने की शर्तों में एक पीड़ित सहायक जेल-अधिक्षक ने बताया कि उनका पद पुलिस टी आई के लेवल का होता है फिर भी उन्हें टी आई से निम्न स्तर का वेतन मिलता है। राज्य में सहायक जेल अधिक्षक को सिर्फ 2400 रु का ग्रेड पे मिलता है जो हेड कांस्टेबल के बराबर है।जबकि टी आई को 4600 रु का ग्रेड पे दिया जाता है। जबकि म प्र में सहायक जेल अधीक्षक को 3600 रु तथा तेलंगाना,उ प्र में सहायक जेल अधीक्षकों को 4600 ग्रेड पे दिया जाता है। ऊपर राज्य में विगत 20 वर्षों से पद्दोन्नति का अवसर जेल-विभाग को नही मिला है। इन सब कारणों से psc परीक्षा के माध्यम से सहायक जेल अधीक्षक नियुक्त होने वाले प्रत्यासी तेजी से विभाग की नौकरी छोड़ कर पलायन करने लगे है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page