आबकारी उड़नदस्ता की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
शराब दुकान संचालकों का दावा - कार्रवाई की आड़ में कथित दबाव बनाकर समझौते की कोशिश, दो अधिकारियों के नाम चर्चा में

रायपुर hct : आबकारी उड़नदस्ता की कार्यप्रणाली को लेकर शराब दुकान संचालकों के बीच असंतोष पनपने लगा है। कई संचालक सवाल उठा रहे हैं कि कुछ कार्रवाईयां निष्पक्ष जांच की आड़ में दबाव बनाने की कवायद अधिक प्रतीत होती हैं। आरोपों के केंद्र में विभाग के एक प्रभावशाली अधिकारी राजेश शर्मा और जिला उड़नदस्ता टीम का नेतृत्व कर रहे सहायक जिला आबकारी अधिकारी (ADEO) अनिल बंजारे का नामसामने आ रहा है !
आबकारी उड़नदस्ता का कथित तयशुदा पैटर्न
शराब दुकान संचालकों का आरोप है कि जिला उड़नदस्ता की कुछ कार्रवाईयों का तरीका एक तयशुदा पैटर्न पर चलता है। उनका कहना है कि टीम के मौके पर पहुंचने से पहले किसी सामान्य व्यक्ति को संबंधित शराब दुकान से शराब खरीदने के लिए भेजा जाता है। बाद में उसी खरीद को आधार बनाकर ओवर रेटिंग अथवा मिलावटखोरी का मामला खड़ा किया जाता है और फिर संबंधित संचालक को कड़ी कानूनी कार्रवाई, लाइसेंस निरस्त होने और जेल भेजे जाने का भय दिखाया जाता है।
आबकारी उड़नदस्ता पर कथित दबाव का आरोप
नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कुछ दुकान संचालकों ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें यह संकेत दिया जाता है कि यदि मामला “आपस में” सुलझा लिया जाए तो बड़ी कार्रवाई से बचा जा सकता है। उनका आरोप है कि इसी भय का फायदा उठाकर कथित रूप से मोटी रकम की मांग की जाती है। सुरक्षा कारणों से संबंधित दुकान संचालकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
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इन अधिकारियों के नाम चर्चा में
विभागीय जानकारी के अनुसार राजेश शर्मा, डीईओ पद पर पदस्थ हैं और वर्तमान में डीसी का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। वहीं, आरोप यह भी है कि अनिल बंजारे,एडीईओ को उनका विशेष संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण जिला उड़नदस्ता की कार्रवाईयों में उनका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अनिल बंजारे के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वे देशी मदिरा वेयरहाउस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं और वेयरहाउस संचालन में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्न
ये आरोप यदि सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल कुछ शराब दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आबकारी विभाग की जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करेगा। उधर, जिन शराब दुकान संचालकों ने ये आरोप लगाए हैं, उनका कहना है कि वे भय और प्रताड़ना के कारण खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।

फिलहाल इस संबंध में जानकारी हेतु आबकारी अधिकारी, राजेश शर्मा (डीईओ) से उनके फोन नम्बर पर whatsApp call किया गया था मगर उनके तरफ से कोई उत्तर नहीं मिला। यह कोई नई बात नहीं है, अमूमन अधिकांश अधिकारी जवाब देने से बचने के लिए ऐसा ही करते है। साथ ही अनिल बंजारे का भी पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी यथावत और प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।


