Chhattisgarh

क़ुतुब मीनार की तर्ज पर 46 लाख की योजना से बनी कोदोभाट की पानी टंकी !

चार माह से बंद जलापूर्ति, लाखों की क्लोरीन मशीन भी बेकार; निर्माण के बाद ही व्यवस्था की खुली पोल...

दिल्ली पर मुस्लिम सत्ता के प्रतीक के रूप में खड़ी कुतुब मीनार आज दुनिया भर में जानी जाती है। आम जनमानस में यह धारणा प्रचलित है कि इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने कराया था, जबकि ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि उसने इसके निर्माण की शुरुआत कराई थी और बाद में इल्तुतमिश ने इसे आगे बढ़ाया। इतिहास में ऐसे निर्माण सत्ता की प्रतिष्ठा और प्रभाव के प्रतीक के रूप में दर्ज होते रहे हैं। लेकिन जब किसी निर्माण का उद्देश्य जनता की सुविधा हो, तब उसकी असली पहचान उसकी भव्यता नहीं, बल्कि उसकी उपयोगिता से होती है।
ऐसा ही एक सवाल गरियाबंद जिले के कोदोभाट में जल जीवन मिशन के तहत निर्मित पानी टंकी को लेकर खड़ा हो रहा है। करीब 46.12 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई योजना का उद्देश्य ग्रामीणों तक पेयजल पहुंचाना था, लेकिन करीब चार माह से जलापूर्ति बंद है। ऐसे में सवाल यही है कि जिस व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च हुए, उसका लाभ ग्रामीणों को क्यों नहीं मिल पा रहा है।

मैनपुर (गरियाबंद) hct : ग्राम पंचायत गोपालपुर के आश्रित ग्राम कोदोभाट में जल जीवन मिशन के तहत एकल ग्राम नल जल प्रदाय योजना स्थापित की गई है। मौके पर लगे योजना सूचना बोर्ड पर इसकी लागत 46.12 लाख रुपये दर्ज है। बोर्ड पर प्रशासनिक स्वीकृति, निर्माण एजेंसी, क्रियान्वयन एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के नाम भी दर्ज हैं। यानी योजना की पूरी पहचान सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर लगे बोर्ड पर मौजूद है। लेकिन योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा – ग्रामीणों तक पानी पहुंचना – फिलहाल बाधित है।

वाल्व खराब हुआ और थम गई पानी की धार

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक पानी टंकी का वाल्व खराब होने के बाद जलापूर्ति बंद हो गई। समस्या को लेकर शिकायतें भी की गईं और ठेकेदार से मरम्मत कराने की मांग उठी, लेकिन करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। एक ऐसी योजना, जिसका मूल उद्देश्य ही घरों तक पानी पहुंचाना है, उसके लंबे समय तक बंद रहने से यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि निर्माण के बाद रखरखाव और जवाबदेही की व्यवस्था आखिर किसके जिम्मे है?

लाखों की क्लोरीन मशीन, धूल में दबा उद्देश्य

पेयजल को शुद्ध करने के लिए यहां क्लोरीन मशीन भी स्थापित की गई है। लाखों रुपये की लागत वाली यह मशीन फिलहाल बंद पड़ी है। मशीन की मौजूदा स्थिति देखकर यह सवाल भी उठता है कि यदि इसका नियमित उपयोग ही नहीं होना है, तो इसे स्थापित करने पर खर्च की गई राशि का वास्तविक लाभ किसे मिला?
कोदोभाट में लाखों की लागत  से निर्मित पानी टंकी की सफाई हेतु क्लोरीन मशीन कक्ष और धूल–धूसरित मशीनस्थानीय लोगों की शिकायत है कि मशीन को चालू करने के प्रयास किए गए, लेकिन वह काम नहीं कर सकी। यहां तक कि मशीन का पंखा तक नहीं चलने की बात सामने आई है। मशीन को रखने के लिए बनाया गया कक्ष भी रखरखाव के अभाव में बदहाल नजर आ रहा है।

टंकी ही नहीं, निर्माण की गुणवत्ता भी सवालों में

कोदोभाट में खराब वाल्व के चलते बंद मशीन

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पानी की सप्लाई बंद होने के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पाइपलाइन, पुताई और रंगाई के काम में कथित तौर पर गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखे जाने की शिकायत सामने आई है। यहां सवाल केवल एक खराब वाल्व या बंद मशीन का नहीं है। 46.12 लाख रुपये की योजना के निर्माण, उसकी निगरानी, तकनीकी गुणवत्ता और बाद के रखरखाव—इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। क्योंकि यदि योजना बनने के बाद ही उसकी व्यवस्था जवाब देने लगे तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सरकारी धन से तैयार सार्वजनिक सुविधा की उपयोगिता का प्रश्न बन जाता है।

अब मरम्मत से आगे जांच की जरूरत

ग्राम पंचायत के उपसरपंच पाश्वर नेगी ने ठेकेदार से तत्काल मरम्मत कराकर जलापूर्ति बहाल कराने की बात कही है। साथ ही निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। लेकिन कोदोभाट में जरूरत केवल टंकी का वाल्व बदल देने की नहीं है। टंकी की तकनीकी स्थिति, पाइपलाइन, क्लोरीन मशीन और निर्माण गुणवत्ता की जांच के साथ यह भी तय होना चाहिए कि चार माह तक पेयजल व्यवस्था बंद रहने की जिम्मेदारी किसकी है। क्योंकि जल जीवन मिशन का अर्थ सिर्फ टंकी खड़ी कर देना नहीं, बल्कि उस टंकी से लगातार पानी पहुंचाना है। कोदोभाट में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि योजना का बोर्ड तो खड़ा है, लेकिन उस पर लिखे ‘हर घर जल’ का वादा जमीन पर कब उतरेगा?

मुकेश सोनी, संवाददाता
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