Chhattisgarh

संजय वन वाटिका में 15 हिरणों की मौत पर फाइलों में कैद सच !

संजय वन वाटिका में 15 हिरणों की मौत के मामले में RTI से पोस्ट मॉर्टम रिपोर्टें नहीं मिलीं, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस तेज

अम्बिकापुर hct : संजय वन वाटिका में मार्च 2026 में हुई 15 हिरणों की मौत का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। घटना को कई महीने बीत जाने के बाद भी इसके विभिन्न पहलू चर्चा में बने हुए हैं। वन विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार 21 मार्च 2026 की सुबह कर्मचारियों और वन प्रबंधन समिति के सदस्यों ने सूचना दी थी कि देर रात आवारा कुत्तों ने हिरणों के बाड़े में प्रवेश कर हमला कर दिया। बताया गया कि फेंसिंग के नीचे बने खाली हिस्से से कुत्ते भीतर घुसे और हिरणों को दौड़ाकर घायल कर दिया। इस हमले में 14 हिरणों की मौत हो गई थी, जबकि एक घायल चीतल ने अगले दिन दम तोड़ दिया। इस प्रकार मृत हिरणों की संख्या 15 तक पहुंच गई। घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और रात्रिकालीन निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे थे।

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15 हिरणों की मौत : पोस्टमार्टम बना रहस्य

घटना के तत्काल बाद वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था। मृत हिरणों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, आवश्यक नमूने और विसरा सुरक्षित किए गए तथा विभागीय जांच भी शुरू की गई। विभागीय प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया था कि प्रथम दृष्टया हिरणों की मौत आवारा कुत्तों के हमले के कारण हुई प्रतीत होती है। इतना ही नहीं, जांच प्रतिवेदन के आधार पर पार्क में तैनात कुछ कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई।अम्बिकापुर संजय वन वाटिका में 15 हिरणों की मौत मामले पर जारी विभागीय प्रेस विज्ञप्ति

उप वनक्षेत्रपाल, वनपालों और वनरक्षक के निलंबन की कार्रवाई यह संकेत देती है कि विभाग ने घटना को गंभीर माना था। इसके बावजूद अब सवाल इस बात पर खड़े हो रहे हैं कि यदि पोस्टमार्टम और जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो संबंधित रिपोर्टों की प्रतियां उपलब्ध कराने में कठिनाई क्यों आ रही है।

मुख्यमंत्री तक पहुंचा था मामला

हिरण मौत कांड में रिपोर्ट गायब, परवेज गांधी का नया कदम
परवेज आलम गांधी

घटना के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने मामले को सार्वजनिक रूप से उठाया था। उन्होंने 27 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर घटना की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। साथ ही यह भी कहा था कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।मुख्यमंत्री कार्यालय से कार्रवाई किए जाने बाबत जारी पत्र शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने भी संज्ञान लेते हुए संबंधित वन अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा जानकारी जनदर्शन पोर्टल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इससे यह मामला केवल स्थानीय प्रशासनिक विषय न रहकर राज्य स्तर तक पहुंच गया।

RTI आवेदन और विभागीय जवाब ने बढ़ाया विवाद

मामले की प्रगति और वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से परवेज गांधी ने 8 मई 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने मृत 15 हिरणों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीएफ सरगुजा द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट की सत्यापित प्रतिलिपि मांगी थी। हालांकि 1 जून 2026 को प्राप्त विभागीय जवाब में कहा गया कि मांगी गई जानकारी संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं है, इसलिए सूचना प्रदान किया जाना संभव नहीं है। यहीं से विवाद का नया अध्याय शुरू हुआ। सवाल यह उठने लगा कि जिस मामले में विभाग स्वयं पोस्टमार्टम और जांच की पुष्टि कर चुका है, उसकी रिपोर्टें आखिर किस कार्यालय में उपलब्ध हैं और उन्हें आवेदक तक पहुंचाने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई।

प्रथम अपील की तैयारी, पारदर्शिता पर बहस तेज

वन विभाग के जवाब पर असंतोष जताते हुए परवेज आलम गांधी ने कहा है कि यदि सूचना संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं थी, तो सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवेदन को सक्षम कार्यालय में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि ऐसा नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर करने की घोषणा की है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अपील की प्रक्रिया में विभाग क्या रुख अपनाता है और मांगी गई रिपोर्टें उपलब्ध कराई जाती हैं या नहीं। फिलहाल 15 हिरणों की मौत का मामला केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, सूचना के अधिकार और सरकारी पारदर्शिता की परीक्षा भी बनता जा रहा है।

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