क्लब अजोरा : वेप से उड़ता धुआँ, नियमों के पालन पर उठे सवाल।
क्लब के भीतर उड़ते वेप के धुएँ में आबकारी अधिकारी डीडी पटेल की जिम्मेदारी और संबंधित थाना पुलिस की निगरानी संदेह के दायरे में...!

रायपुर hct : राजधानी रायपुर में क्लबों और बार के संचालन को लेकर नियम-कायदों और उनकी निगरानी पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी कड़ी में विगत दो-तीन दिनों से राजधानी के कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्लब अजोरा से सामने आया एक वायरल वीडियो क्लब परिसर में होने वाली कथित अवैधानिक गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है …
वीडियो के दृश्य परीक्षण में क्लब के भीतर लोगों के एक समूह के बीच एक उपकरण और उसके इस्तेमाल के तरीके ने ही इस समय संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह की सुई टिकाकर रख दी है। वायरल वीडियो का बारीकी से अवलोकन करने पर उक्त उपकरण वेपिंग डिवाइस के रूप में दिखाई देता है। मामला केवल किसी उपकरण के क्लब की मेज पर रखे होने का नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल का है। यही दृश्य इस पूरे मामले को गंभीर बनाता है।
मुख्य निर्देश और नियम
- समय सीमा : सभी बार, क्लब और होटल देर रात रात 12:00 बजे तक अनिवार्य रूप से बंद करने होंगे। इसके बाद संचालन मिलने पर लाइसेंस निलंबन या सील करने की कार्रवाई की जाती है।
- नाबालिगों की एंट्री प्रतिबंधित : क्लब, पब और बार में 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- CCTV और रिकॉर्ड : सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिसरों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे चालू हालत में रखना और आगंतुकों/ग्राहकों के रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज व्यवस्थित रखना अनिवार्य किया गया है।
- अन्य नियम : बिना वैध दस्तावेजों के विदेशी नागरिकों को न ठहराना, पार्किंग व यातायात नियमों का सख्ती से पालन करना तथा हुक्का/वेप आदि के अवैध संचालन पर रोक शामिल है।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
क्लब अजोरा से सामने आए वीडियो में वेपिंग का दृश्य सामने आने के बाद सवाल उठता है कि क्या आबकारी विभाग के नुमाइंदे राजधानी में संचालित होने वाले होटल्स एवं बार की ईमानदारी से नियमित निरीक्षण और निगरानी करते हैं ? नहीं। और यदि निरीक्षण होता है, तो क्लब परिसर के भीतर होने वाली ऐसी गतिविधियां निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आतीं?
हालांकि, केवल इस वीडियो के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि क्लब प्रबंधन वेपिंग की अनुमति देता है या स्वयं वेप उपलब्ध कराता है। इस संबंध में वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच और क्लब प्रबंधन के पक्ष से ही स्पष्ट हो सकती है।
डीडी पटेल का फोन खामोश, पुलिस बोली – होगी कार्रवाई
चूँकि मीडिया ट्रायल (कोर्ट) नहीं है, अतः हम निर्णय नहीं, तथ्य को आधार बनाकर समाचार का रूप देते हैं। अतः मामले में आबकारी विभाग की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि क्लब एवं बार जैसे प्रतिष्ठानों में लागू नियमों के पालन की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर विभाग से जवाब अपेक्षित होता है। ऐसे में आबकारी अधिकारी डीडी पटेल से इस बाबत जानकारी लेकर उनका पक्ष सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया, तो महोदय फोन नहीं उठाने की बीमारी से ग्रस्त मालूम हुए।
थाना प्रभारी आशीष यादव का कहना है – “सोशल मीडिया के माध्यम से क्लब परिसर से जुड़े कथित वीडियो के वायरल होने की खबर मिली है। मामले में क्लब प्रबंधन से जानकारी ली जा रही है और मामला सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”
क्लब अजोरा के संचालक जयंत चौधरी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि, “एडिटेड वीडियो को वायरल किया जा रहा है, कोई आधार नहीं है। उसी वीडियो को भेजकर मुझसे रकम उगाही का प्रयास किया गया। मेरे द्वारा मना किए जाने पर प्रपंच रचा गया है। वे तमाम लोग, जिनके द्वारा भ्रामक खबर चलाकर हमारे संस्थान को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया गया है, कानूनी प्रक्रिया से गुजरने को तैयार रहें।”
क्लब अजोरा से उड़ रहे धुएँ के साथ उठ रहा सवाल
क्लब अजोरा के भीतर वेपिंग का वीडियो सामने आने के बाद सवाल यह भी है कि क्या संबंधित थाना पुलिस को इस गतिविधि की जानकारी थी? यदि जानकारी थी, तो क्या कोई कार्रवाई की गई? और यदि जानकारी नहीं थी, तो क्लब की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी कही जा सकती है? यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध वीडियो मात्र से संबंधित थाना पुलिस अथवा आबकारी अधिकारी डीडी पटेल की व्यक्तिगत लापरवाही, मिलीभगत या संरक्षण साबित नहीं होता। लेकिन वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण की जरूरत जरूर पैदा करती है।
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मामला केवल एक व्यक्ति के वेप इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। असली सवाल उस व्यवस्था का है जिसके तहत क्लबों में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना है। यदि क्लब परिसर में वेप का इस्तेमाल हो रहा है और यह गतिविधि नियमों के विपरीत है, तो फिर यह सवाल अपनी जगह कायम है कि निगरानी के बावजूद यह गतिविधि कैसे होती रही? क्या संबंधित विभागों का निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित है या वास्तव में क्लब के भीतर की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाती है?


