Chhattisgarh

रिंग रोड जमीन विवाद में बड़ा नाम

फेंसिंग तोड़फोड़, हमले और राजनीतिक संरक्षण की चर्चाओं से इलाके में बढ़ा तनाव

रायपुर hct : रिंग रोड जमीन विवाद सिर्फ संपत्ति नहीं रहीं, बल्कि ताकत और पहुंच का खुला मैदान बन चुकी हैं। कहीं फेंसिंग खड़ी की जा रही है, तो कहीं रातों-रात उसे उखाड़ दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि इस पूरे खेल के पीछे रसूखदार लोगों का हाथ है, और इसी कड़ी में स्काई वॉक (Skywalk) प्रोजेक्ट से जुड़े एक चर्चित विधायक का नाम चर्चा में है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ज़मीन पर जो हालात दिख रहे हैं, वे किसी बड़े संरक्षण की ओर इशारा जरूर करते हैं।

गुर्गों की दखलअंदाजी पर सवाल

रिंग रोड जमीन विवाद में सक्रिय कुछ तथाकथित “गुर्गों” की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये लोग जमीन के विवादों में सीधे दखल दे रहे हैं – किसी को फेंसिंग करने दे रहे हैं, तो किसी की फेंसिंग उखाड़ फेंक रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि शिकायत करने के बाद भी सिस्टम सुनने को तैयार नहीं दिखता। उल्टा, कई लोगों को सलाह दी जाती है कि “ऊपर तक पहुंच” बनाकर ही बात करें, वरना नुकसान उठाने के लिए तैयार रहें।

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रिंग रोड जमीन विवाद चाकूबाजी से बढ़ा खौफ

हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले एक बिल्डर पर चाकू से हमला कर दिया गया। हमले के पीछे किन लोगों की भूमिका रही, इसे लेकर इलाके में कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन डर का माहौल इतना है कि कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। बिल्डर खुद चुप है, जबकि उसके जानने वाले बताते हैं कि मामला “सिर्फ जमीन का नहीं, दबाव का” है। यह घटना इलाके में फैले खौफ को और गहरा कर गई है।

शिकायतें, पर कार्रवाई सुस्त

दूसरी ओर, बिल्डर एसोसिएशन और स्थानीय लोगों ने अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है। ज्ञापन दिए जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार सवालों के घेरे में है। लोग कह रहे हैं कि जब तक इस पूरे नेटवर्क पर सख्ती नहीं होगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे। दिलचस्प यह है कि हर चर्चा अंततः एक ही सवाल पर आकर टिक जाती है – क्या यह सब बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव है?

राजनीतिक नाम से बढ़ी संवेदनशीलता

इसी बीच, उसी नाम के सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि उनके स्तर से इस तरह के आरोपों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जरूर है कि रिंग रोड की जमीनों को लेकर जो खींचतान चल रही है, उसमें बड़े नामों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि जमीन किसकी है, बल्कि यह है कि फैसले कौन ले रहा है और किसके इशारे पर हालात बदल रहे हैं।

रिंग रोड जमीन विवाद डर का सन्नाटा

स्थानीय लोग अब खुलकर नहीं, लेकिन दबे स्वर में जरूर कह रहे हैं कि हालात “सामान्य विवाद” से आगे बढ़ चुके हैं। खून के आंसू रोते लोग, चुप बिल्डर और बेबस शिकायतकर्ता—यह तस्वीर किसी भी विकसित शहर की नहीं होनी चाहिए। लेकिन रिंग रोड के आसपास आज यही हकीकत बनती जा रही है, जहां बहुत कुछ समझा जा रहा है, पर कोई खुलकर बोल नहीं रहा।

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