ब्रह्मा सोनकर के भाई धन्नु के निर्माण पर निगम के दो नोटिस, कार्रवाई की चेतावनी के बीच सवालों के घेरे में ‘छाया पार्षद’
वार्ड 61 की राजनीति में सक्रिय ब्रह्मा सोनकर के भाई धन्नु सोनकर के रावतपुरा फेस-2 स्थित निर्माण पर नगर निगम जोन-06 के दो नोटिस; धारा 307(3) के तहत कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद निर्माण की स्थिति पर सवाल।

रायपुर hct : वार्ड क्रमांक 61 की राजनीति में सक्रिय रहे कांग्रेस के तत्कालीन पार्षद प्रत्याशी ब्रह्मा सोनकर को स्थानीय स्तर पर ‘छाया पार्षद’ कहे जाने के बीच उनके परिवार से जुड़े मामलों ने भी सवाल खड़े किए हैं। इस श्रृंखला की पहली कड़ी उनके भाई धन्नु सोनकर के रावतपुरा फेस-2 स्थित निर्माण से जुड़ी है, जिसे लेकर नगर निगम जोन क्रमांक-06 के दो नोटिस सामने आए हैं।
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नगर निगम के दस्तावेजों में निर्माण को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। पहले नोटिस के बाद दूसरे नोटिस में जवाब को संतोषजनक नहीं पाए जाने का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 307(3) के तहत निर्माण हटाने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि धन्नु सोनकर, ब्रह्मा सोनकर के भाई हैं और ब्रह्मा वार्ड 61 की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। हालांकि उपलब्ध नोटिस धन्नु सोनकर के निर्माण से संबंधित हैं; इन दस्तावेजों में ब्रह्मा सोनकर की किसी प्रत्यक्ष भूमिका का उल्लेख होने का दावा नहीं किया गया है।
पहले नोटिस में निर्माण पर आपत्तियां
नगर निगम जोन क्रमांक-06 की ओर से जारी पहले नोटिस में स्थल निरीक्षण का उल्लेख करते हुए निर्माण से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

नोटिस में निर्माण कार्य बंद करने तथा निर्धारित समय में लिखित सूचना देने के निर्देश दिए गए थे। यानी नगर निगम ने निर्माण को लेकर आपत्ति दर्ज कर संबंधित पक्ष से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
लेकिन नोटिस जारी होना अंतिम निर्णय नहीं है। निर्माण की वैधानिकता से संबंधित वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्वीकृत नक्शा, अनुमति, संबंधित दस्तावेज और निगम की आगे की कार्रवाई को देखना जरूरी है।
दूसरे नोटिस में जवाब भी संतोषजनक नहीं
इसके बाद जारी दूसरे नोटिस में पहले नोटिस का संदर्भ देते हुए जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने तथा प्रस्तुत जवाब को संतोषजनक नहीं पाए जाने की बात दर्ज है।

इसी नोटिस में धारा 307(3) के तहत निर्माण हटाने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
इस बिंदु पर नगर निगम की कार्रवाई को लेकर स्वाभाविक सवाल खड़ा होता है—जब विभाग ने निर्माण पर आपत्ति दर्ज की, फिर जवाब को संतोषजनक नहीं माना और कार्रवाई की चेतावनी दी, तो उसके बाद वास्तविक कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची?
मौके पर निर्माण, फाइल में क्या कार्रवाई?

ऐसे में नगर निगम के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होना चाहिए कि दोनों नोटिस जारी होने के बाद क्या कदम उठाए गए। क्या निर्माण कार्य बंद कराया गया? क्या आगे कोई आदेश जारी हुआ? क्या धारा 307(3) के तहत कार्रवाई आगे बढ़ी? या मामला अभी किसी प्रक्रिया में लंबित है?
नगर निगम की कार्रवाई पर सीधा सवाल
किसी निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी करना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। असली सवाल उसके बाद की कार्रवाई का है।
- यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया गया था तो नोटिस के बाद निगम ने क्या किया?
- यदि बाद में निर्माण को वैध माना गया या कोई अनुमति प्राप्त हुई तो उसका रिकॉर्ड क्या है?
- और यदि कार्रवाई लंबित है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
धन्नु सोनकर के निर्माण को लेकर नगर निगम के दो नोटिस मौजूद हैं; सवाल यह है कि इन नोटिसों के बाद सरकारी रिकॉर्ड में अगला कदम क्या दर्ज है और क्या वह कदम मौके की वर्तमान स्थिति से मेल खाता है?


