Chhattisgarh

रायपुर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026, फीस बढ़ोतरी पर बवाल…

रायपुर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 में जमानत राशि बढ़ोतरी और नियम संशोधन पर वकीलों का विरोध, लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

रायपुर hct : रायपुर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 (District Bar Association) की सरगर्मी विवाद में बदल गई है। 2026 के आगामी चुनावों के लिए जारी नई शर्तों ने अधिवक्ताओं के बीच असंतोष की आग भड़का दी। यह मामला अब केवल हार-जीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव लड़ने की बढ़ती ‘कीमत’ को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत शिकायत ने सीधा प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या बार काउंसिल के चुनाव धीरे-धीरे केवल संपन्न वर्ग तक सीमित किए जा रहे हैं।

रायपुर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026, फीस बढ़ोतरी पर बवाल

रायपुर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 में फीस बढ़ोतरी और नियमों के विरोध में अधिवक्ताओं की नाराजगी2021 की तुलना में 2026 के प्रस्तावित नियमों ने विवाद की नींव रख दी है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2021 में अध्यक्ष पद के लिए 15,000 रुपये, सचिव के लिए 10,000 रुपये और कार्यकारिणी सदस्य के लिए मात्र 3,000 रुपये जमानत राशि तय थी। इसे संतुलित और सुलभ व्यवस्था माना गया था। लेकिन अब आरोप है कि 2026 के चुनाव में अध्यक्ष पद की राशि बढ़ाकर 35,000 रुपये कर दी गई है, जो सौ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। वहीं, इसे “नॉन-रिफंडेबल” बनाए जाने की बात ने विवाद को और गहरा कर दिया है, क्योंकि इससे सामान्य पृष्ठभूमि के अधिवक्ताओं के लिए चुनाव लड़ना आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है।

इसे भी पढ़ें > अधिवक्ता संघ रायपुर चुनाव 2026 : निष्पक्षता पर सवाल

आमसभा की अनुमति बिना नियम बदलाव पर सवाल

रायपुर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026, फीस बढ़ोतरी पर नियमों में किए गए इस बदलाव की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि इतनी बड़ी वृद्धि और संशोधन को लागू करने से पहले न तो आमसभा (General Body Meeting) की अनुमति ली गई और न ही निर्वाचित कार्यकारिणी की औपचारिक सहमति प्राप्त की गई। कानूनी जानकारों के अनुसार, बिना बहुमत की स्वीकृति के इस प्रकार का निर्णय ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है। इससे विशेष रूप से उन युवा अधिवक्ताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद संगठन में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।

अधिवक्ता संघ रायपुर निर्वाचन नियमावली 2021 (आधिकारिक दस्तावेज}

अनुभव और महिला आरक्षण पर उठे प्रश्न

वर्ष 2021 की नियमावली में विभिन्न पदों के लिए स्पष्ट अनुभव सीमा निर्धारित की गई थी, जैसे अध्यक्ष पद के लिए 15 वर्ष और उपाध्यक्ष के लिए 13 वर्ष का अनुभव अनिवार्य था। साथ ही महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित पदों का भी उल्लेख किया गया था। लेकिन वर्तमान शिकायत में आरोप है कि 30 प्रतिशत महिला आरक्षण के दिशा-निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा सहायक निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति में भी पारदर्शिता की कमी की बात सामने आई है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

सख्त प्रचार नियम बनाम महंगी नामांकन प्रक्रिया

नियमावली 2021 के अनुसार चुनाव प्रचार केवल विजिटिंग कार्ड के आकार के पोस्टकार्ड तक सीमित रहेगा और किसी भी प्रकार का शोर-शराबा या भोज पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, ताकि खर्च न्यूनतम रखा जा सके। ऐसे में अधिवक्ताओं का तर्क है कि जब प्रचार को पहले ही सीमित कर दिया गया है, तो नामांकन शुल्क को इतना अधिक रखना तर्कसंगत नहीं है। कई वकीलों का कहना है कि जमानत राशि को ‘डिपॉजिट’ के रूप में रखा जाना चाहिए था, न कि ‘फीस’ बनाकर स्थायी रूप से वसूला जाए।

वकीलों की मांगें और बढ़ता दबाव

संघ के भीतर विरोध अब खुलकर सामने आ रहा है। अधिवक्ताओं की प्रमुख मांग है कि अध्यक्ष पद के लिए जमानत राशि को घटाकर अधिकतम 10,000 रुपये किया जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया सभी के लिए समान रूप से सुलभ बनी रहे। इसके साथ ही निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति में राज्य विधिक परिषद के नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने और सहायक निर्वाचन अधिकारियों की टीम में महिला अधिवक्ताओं सहित विभिन्न वर्गों को समुचित प्रतिनिधित्व देने की मांग भी उठाई जा रही है। फिलहाल, अधिवक्ताओं के बीच यह चर्चा लगातार तेज हो रही है कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो यह विवाद और गहराएगा।

whatsapp logo
whatsapp

Back to top button