भाठागांव : शिकायत के बावजूद ‘थूक पॉलिश’ कार्रवाई (IV)
पार्षद कनेक्शन वाले रवि सोनकर की कथित अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई का दावा, लेकिन तीन घंटे की जेसीबी कार्रवाई के बाद भी उठने लगे सवाल

रायपुर hct : भाठागांव क्षेत्र में कथित अवैध प्लॉटिंग को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। केसरी बगीचा के पास स्थित खसरा नंबर 1360/1, 1366/1 और 1367/3 सहित आसपास की जमीनों पर अवैध प्लॉटिंग की गतिविधियों को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत पहुँचने के बाद नगर निगम जोन क्रमांक 6 की ओर से 24 मार्च को जेसीबी चलाकर कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया।
बताया गया कि जोन कमिश्नर हितेंद्र यादव के निर्देश पर विवादित भूमि पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दावा जितना बड़ा बताया गया, मौके पर उसका असर उतना दिखाई नहीं दिया।

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‘हिचकी’ तो दूर इन्हें ‘डकार’ भी नहीं आती जनाब
चूँकि नगर पालिका निगम क्षेत्र में कहीं भी किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ अथवा अवैध प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है तो उसकी विधिवत प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाती है। इसी क्रम में यहाँ भी जोन कमिश्नर हितेंद्र यादव की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, लेकिन उसमें पूरे मामले को “अज्ञात व्यक्तियों द्वारा की जा रही अवैध प्लॉटिंग” करार दिया गया !
जबकि लिखित शिकायत में नाम सामने आने के बावजूद वार्ड पार्षद रवि सोनकर के भाई लखन सोनकर का उल्लेख नहीं किया गया। ऐसे में क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह पूरा मामला संरक्षण की ओर इशारा तो नहीं करता। स्थानीय स्तर पर तो यहाँ तक कहा जा रहा है कि यदि शिकायत में नाम आने के बाद भी उसे “अज्ञात” बताकर मामला हल्का करने की कोशिश की जा रही है, तो फिर मामले में मोटी रकम पचा लेने की सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
कार्रवाई देख “लाल बुझक्कड़” आया याद
कार्रवाई के नाम पर जो दृश्य सामने आया, उसने कई लोगों को बचपन में पढ़े गए “लाल बुझक्कड़ की सूझ” पाठ की याद दिला दी। उस पाठ में आधी-अधूरी समझ और उलटबांसी तर्कों के सहारे निष्कर्ष निकालने की जो व्यंग्यात्मक तस्वीर खींची गई थी, वैसा ही कुछ मंजर यहाँ भी दिखाई देता रहा।
मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने उसी प्रसिद्ध पंक्ति को याद करते हुए तंज कसा—
“लालबुझक्कड़ बूझ के और न बूझो कोय,
पैर में चक्की बाँध के हिरना कूदो होय।”
इसी तर्ज पर अब इलाके में यह व्यंग्य भी सुनाई देने लगा है—
“यादव जी बूझ के और न बूझो कोय,
जेसीबी में झाड़ू बाँध के पेट्रोल बहुत बोहाय।”
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर कुछ भी ठोस नहीं हुआ; केवल जेसीबी का तेल जलाया गया और मामले पर ‘थूक पॉलिश’ कर दी गई। यही वजह है कि क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि वार्ड पार्षद रवि सोनकर के भाई लखन सोनकर को कथित अवैध प्लॉटिंग के मामले में संरक्षण दिए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है।
मामला कहीं ‘सेटिंग’ का तो नहीं?
इसी क्रम में यह चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है कि तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई का जो नतीजा सामने आया, उसे देखकर कोई नादान बच्चा भी समझ सकता है कि जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्य के साथ समझौता कर लिया है। क्षेत्र के अनुभवी लोगों के बीच पहले से यह बात चल रही थी कि संबंधित स्थल पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने के एवज में कथित तौर पर लेनदेन की चर्चाएं रही हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हम (highwaycrimetime.in) नहीं करते। अब जब कार्रवाई के नाम पर सीमित हलचल दिखाई दी, तो लोगों का कहना है कि शिकायतकर्ता को “कार्रवाई हो गई” का लॉलीपॉप थमाकर मामले को शांत करने की कोशिश की गई और अधिकारी अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त दिखाई दिए।
शिकायत और पार्षद कनेक्शन की चर्चा
लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता दिनेश सोनी द्वारा महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, राजस्व मंत्री तथा कलेक्टर रायपुर सहित कई अधिकारियों को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम जोन क्रमांक 6 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 61 के पार्षद रवि सोनकर के भाई लखन सोनकर के नाम से भाठागांव क्षेत्र में कथित रूप से प्लॉटिंग और प्लॉट बुकिंग से जुड़ी गतिविधियों की चर्चा सामने आ रही है। शिकायत में केसरी बगीचा के पास स्थित खसरा नंबर 1360/1, 1366/1 और 1367/3 सहित कई भूखंडों का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
शंकरा विहार कार्रवाई की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भाठागांव क्षेत्र इससे पहले भी “शंकरा विहार” नाम से विकसित की जा रही कॉलोनी को लेकर चर्चा में रह चुका है। उस समय लगभग 6 से 7 एकड़ भूमि पर बिना अनुमति प्लॉटिंग की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर सड़क और रास्तों को ध्वस्त किया था और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्ती का संदेश दिया था। लेकिन उसी इलाके के आसपास अब खसरा नंबर 1360/1, 1366/1 और 1367/3 से जुड़ा नया विवाद सामने आने के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ नियमों की सख्ती हर जगह समान रूप से लागू हो रही है।

