गरियाबंद : वायरल ऑडियो के बाद कोतवाली पुलिस घेरे में
₹20 हजार की कथित मांग के ऑडियो के बाद एएसआई निलंबित, टीआई लाइन अटैच; एफआईआर और कार्रवाई के दायरे पर उठे प्रश्न

गरियाबंद hct : जिला में वायरल ऑडियो के बाद कोतवाली पुलिस घेरे में आ गई है। बीते माह मारपीट की एक घटना की पुलिस में हुई शिकायत मामले में राजनीतिक दबाव के चलते पीड़ित पक्ष को ही हवालात जाने से बचाने के लिए पुलिस के द्वारा 20,000 रूपए की मांग का एक काल रिकॉर्डिंग वायरल होने से जिला पुलिस की कलाई खुलने लगी है। जैसे ही काल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया में वायरल हुआ विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में आलाधिकारी हरकत में आए, मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए एक एएसआई को निलंबित कर थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया गया।
होली के दिन विवाद से शुरू हुआ घटनाक्रम
दरअसल, मामला ऐसा है कि, घटना दिनांक 4 मार्च (होली के दिन) ग्राम बारुला में यह तय हुआ था कि सारे ग्रामीण एक जगह मिलकर त्योहार मनाएंगे। इस बात पर ग्रामीण दो फाड़ में बंट गए और दोनों पक्षों में विवाद हो गया। बारुला निवासी ममता किरण यादव के अनुसार उसका पति नंदकुमार बस्ती से होली खेलकर लौट था कि कुछ लोग उसके घर के सामने नगाड़ा बजाने लगे। तभी श्याम दीवान आया और उसके पति से यह कहकर बहस करने लगा कि नगाड़े वालों को अपने घर क्यों बुलाया है। बहस हो ही रही थी कि गरियाबंद जनपद अध्यक्ष सोहन ध्रुव और पूर्व जनपद उपाध्यक्ष प्रवीण यादव भी आ गए और कथित तौर पर गालियां देते हुए उसके पति से मारपीट करने लगे।
मारपीट और शिकायत, लेकिन अधूरी FIR?
मारपीट में बीच-बचाव के उद्देश्य से पति को बचाने गई तो उस पर भी हमला कर दिया। इसके पहले कि घटना दूसरा रूप लेता, आसपास के लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। पीड़ित पक्ष के मुताबिक जब वह घटना की इत्तला करने थाना पहुंची और एफआईआर दर्ज किया गया तो आरोपियों में सिर्फ श्याम दीवान का नाम लिखा गया और जनपद अध्यक्ष तथा पूर्व जनपद उपाध्यक्ष के नाम को लिखा ही नहीं गया।
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ऑडियो वायरल, एएसआई निलंबित – कार्रवाई पर सवाल
कार्यालय पुलिस अधीक्षक, जिला गरियाबंद से जारी आदेश (पत्र) क्रमांक – पुअ / गरि /स्टेनो /निलं /05/2026/पीई /12/183/2026 दिनांक 16/04/2026 के अनुसार सोशल मीडिया में वायरल ऑडिओ में बातचीत की आवाज कोतवाली गरियाबंद में पदस्थ उप निरीक्षक अजय सिंह का होना पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाता है।

उच्च स्तर की भूमिका पर भी चर्चाएं
मगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय जिला गरियाबंद की यह कार्रवाई अब तूल पकड़ने लगा है। चूँकि ऑडिओ को पूरा सुनने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मामले में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कार्रवाई एक स्तर तक सीमित रखी गई, जबकि इस मामले ऑडियो के आधार पर कुछ उच्च स्तर की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं, जिन पर अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है !!
टीआई की भूमिका पर पीड़ित पक्ष के आरोप
रिश्वत के मामले में एसआई के सस्पेंड होने के बाद अब केस में टीआई ओमप्रकाश यादव का नाम भी जुड़ गया है। पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार टीआई ने पीड़ित पक्ष की एफआईआर में मुख्य आरोपियों के नाम नहीं लिखे। उल्टा उन्हीं के खिलाफ एट्रोसिटी का मामला बनाकर उन्हें जेल भिजवा दिया।
आंदोलन की चेतावनी, जांच जारी
इधर मामला को तूल देते हुए छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने टीआई को थाने से हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना दबाव बनाते हुए कहा है कि ऐसा न होने पर प्रदेशभर के सेनानियों को गरियाबंद में इकट्ठा कर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। फ़िलहाल इस संबंध में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
