मास्टर प्लान दरकिनार, 60 की जगह 90 फ्लैट पास?
दस्तावेज़ों में विरोधाभास का दावा, फर्जी इंजीनियर के नाम से नक्शा स्वीकृत कराने और EWS नियमों की अनदेखी की शिकायत

बिलासपुर hct : बिलासपुर में “Bilaspur Anant Realty” प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है। ग्राम तालापारा स्थित खसरा नंबर 157/1, 157/26 और 158/30 की भूमि पर “मेसर्स अनंत रियाल्टी” द्वारा बनाए जा रहे प्रोजेक्ट को लेकर संचालक नगरीय प्रशासन, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग और कलेक्टर बिलासपुर सहित अन्य अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भेजी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विकास अनुज्ञा प्राप्त करने की प्रक्रिया में दस्तावेज़ों में विरोधाभास रखते हुए नियमों की अनदेखी कर अनुमति हासिल की गई।
एरिया स्टेटमेंट में गड़बड़ी
शिकायत के अनुसार परियोजना के एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत नक्शे के बीच गंभीर अंतर दिखाई देता है। आवेदन में चार मंजिलों में कुल 60 फ्लैट प्रस्तावित बताए गए थे, जबकि अनुमोदित नक्शे में फ्लैटों की संख्या 90 और मंजिलों की संख्या छह दर्शाई गई है। दस्तावेज़ों में इस अंतर को स्पष्ट बताया गया है और सवाल उठाया गया है कि इतनी स्पष्ट विसंगति होने के बावजूद 25 जून 2025 को विकास अनुज्ञा कैसे स्वीकृत कर दी गई। इससे नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की स्वीकृति प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
फर्जी इंजीनियर
शिकायत में नक्शा तैयार करने वाले “विकास सिंह” नामक इंजीनियर की पहचान पर भी संदेह जताया गया है। बताया गया है कि बिलासपुर शहर में इस नाम का कोई पंजीकृत आर्किटेक्ट या इंजीनियर उपलब्ध नहीं है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में इसी नाम का उपयोग कर कई निर्माणों के नक्शे स्वीकृत कराए जाने के मामले सामने आए थे और नगर निगम द्वारा संबंधित लाइसेंस को निलंबित भी किया जा चुका था। इसके बावजूद उसी नाम से तैयार नक्शे को स्वीकृति मिल जाना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इसे भी पढ़ें > किसी अखबार या चैनल में काम करने वाला “हर शख्स पत्रकार” नहीं होता।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित आवास को लेकर भी शिकायत में गंभीर विरोधाभास का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज़ों के अनुसार बिल्डर द्वारा शपथ पत्र में ग्राम तिफरा के खसरा नंबर 407/7 पर EWS फ्लैट बनाने का उल्लेख किया गया है, जबकि शिकायत में दावा किया गया है कि उक्त भूमि बिल्डर के नाम पर दर्ज ही नहीं है। वहीं विकास अनुज्ञा के नक्शे में EWS फ्लैटों का स्थान अलग खसरा नंबरों पर दर्शाया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार निर्धारित प्रतिशत में भी EWS आवास उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात कही गई है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि परियोजना के लिए दर्शाया गया 10 से 12 मीटर चौड़ा पहुंच मार्ग मौके पर उपलब्ध नहीं है। दस्तावेज़ों में जहां 40 फीट चौड़े रास्ते का उल्लेख किया गया है, वहीं विक्रय पत्र में केवल 20 फीट रास्ते का जिक्र बताया गया है। इसके अलावा सीमांकन प्रक्रिया, खुले क्षेत्र और पार्किंग एरिया के निर्धारण में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने इन सभी बिंदुओं की उच्चस्तरीय जांच कर परियोजना की विकास अनुज्ञा की समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

