Chhattisgarh

भाठागांव अवैध प्लॉटिंग: कार्रवाई के बाद मामले में आया नया मोड़, अमित अग्रवाल और अविनाश सोनकर ‘मोंटी’ के नाम चर्चा में

केसरी बगीचा के पास विवादित प्लॉटिंग पर खसरा 1360/1, 1366/1 और 1367/3 में निगम की कार्रवाई के बाद भी गतिविधियां जारी होने की जानकारी....

रायपुर hct : भाठागांव के केसरी बगीचा के पास खसरा नंबर 1360/1, 1366/1 और 1367/3 को लेकर उठे सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं। अवैध प्लॉटिंग के आरोपों पर नगर निगम की कार्रवाई के बावजूद अब इन्हीं खसरा नंबरों से जुड़ी जमीन पर दोबारा प्लॉटिंग किए जाने और जमीन के विभिन्न हिस्सों की गुपचुप रजिस्ट्री किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

यानी जिस जमीन पर कार्रवाई के बाद अवैध प्लॉटिंग रोकने की उम्मीद थी, वहां कथित तौर पर जमीन के टुकड़े होने और सौदे आगे बढ़ने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल सीधा है—निगम की कार्रवाई के बाद भी यह सब कैसे और किसकी सरपरस्ती में हो रहा है? हालांकि, इसके पहले उक्त जमीन पर अवैध प्लॉटिंग को लेकर राजनीतिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले एक जनप्रतिनिधि के भाई का नाम शुरुआत से ही सामने आता रहा है, लेकिन मीडियाबाजी ने जोर पकड़ा तो दबाव बढ़ा और संभवतः व्हाइट कॉलर में दाग लगने की फिक्रमंदी ने महोदय के भाई को पाला बदलने पर मजबूर कर दिया।

‘अवैध प्लॉटिंग’ का बोर्ड लगाया ही नहीं गया?

पूर्व में इन्हीं खसरा नंबरों से जुड़ी जमीन पर प्लॉटिंग को लेकर विवाद सामने आया था। हमारी खबरों के बाद निगम के जोन कमिश्नर ने अपनी कमिश्नरी का रुतबा दिखाते हुए कार्रवाई के नाम पर “थूक पॉलिश” भी किया। लेकिन शायद ‘मनी भाई’ वाली कार्यशैली में कार्रवाई के बाद संबंधित स्थल पर ‘अवैध प्लॉटिंग’ का बोर्ड लगाकर निगरानी सुनिश्चित करने का कर्तव्य भी बुलडोजर के पहियों तले रौंद दिया गया, प्रतीत होता है। क्योंकि यदि बोर्ड और निगरानी व्यवस्था के बावजूद जमीन के विभिन्न हिस्सों पर रजिस्ट्री की बात ने जोर पकड़ा है; तो मामला केवल प्लॉटिंग का नहीं, बल्कि कार्रवाई के बाद सरकारी निगरानी की प्रभावशीलता का भी है।

भाठागांव प्लॉटिंग मामले में अब क्या हो रहा है?

भाठागांव अवैध प्लॉटिंग मामले से जुड़ा दस्तावेजस्थानीय स्तर से मिल रही जानकारी के मुताबिक खसरा नंबर 1360/1, 1366/1 और 1367/3 में शामिल भूमि के कई टुकड़े किए गए अथवा किए जा रहे हैं। इन टुकड़ों की रजिस्ट्री को लेकर भी जानकारी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम में अमित अग्रवाल और अविनाश सोनकर उर्फ़ मोंटी के नाम चर्चा में हैं। हालांकि संबंधित रजिस्ट्रियों और भूमि अभिलेखों से इसकी आधिकारिक पुष्टि किया जाना अभी शेष है।

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यही वजह है कि अब जांच का सबसे अहम बिंदु हालिया रजिस्ट्री हैं। इन तीनों खसरों से संबंधित हाल में कितनी रजिस्ट्री हुईं? खरीदार कौन हैं? विक्रेता कौन है? भूमि की प्रकृति क्या दर्ज है? और प्लॉटिंग के लिए किस प्रकार की अनुमति ली गई? इन सवालों के जवाब दस्तावेजों में छिपे हैं।

सवाल तो यह भी उठ रहे हैं कि शिकायतों और खबरों के बाद कार्रवाई हुई, लेकिन यदि कार्रवाई के बाद भी उसी खसरा क्षेत्र में प्लॉटिंग और रजिस्ट्री की गतिविधियां चल रही हैं तो क्या कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई? यदि संबंधित भूमि पर दोबारा प्लॉटिंग हो रही है तो निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को यह बताना होगा कि कार्रवाई के बाद स्थल का निरीक्षण कब-कब किया गया और आगे की गतिविधियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।

खबरों पर रोक के बदले सौदेबाजी की सुगबुगाहट ?

मामले को और गंभीर बनाने वाली एक अन्य जानकारी भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। चाय की चुस्कियों से लेकर नाई की दुकानों और क्षेत्र के बिल्डरों के बीच यह चर्चा है कि इस प्रकरण की खबरों के सिलसिलेवार प्रकाशन पर रोक लगाने के नाम पर एक स्थानीय छुटभैया नेता द्वारा एक दबंग पार्षद की बैठकी में बड़ी रकम की कथित लेनदारी और करीब हजार वर्गफुट जमीन के सौदे की बात कही जा रही है। बात बस हवा – हवाई होती तो कोई बात थी, मगर दावेदारों का यहाँ तक कहना है कि यदि जरुरत पड़े तो वे आमने – सामने इस बात की पुष्टि को लेकर भी मजबूती से डटे हुए हैं।

जोन कमिश्नर की कमिश्नरी और अध्यक्ष की जवाबदेही क्या कच्ची घानी का तेल लेने गई है ?

फिलहाल यह दावा स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि की मांग करता है। यदि इसके प्रमाण सामने आते हैं तो जांच का दायरा प्लॉटिंग से आगे बढ़कर खबरों को प्रभावित करने के कथित प्रयास और जमीन के सौदे तक पहुंच सकता है। लेकिन सवाल कार्रवाई का नहीं, कार्रवाई के बाद की स्थिति का है।

भाठागांव प्लॉटिंग मामले में रजिस्ट्री बनी जांच का अहम बिंदु

खसरा नंबर 1360/1, 1366/1 और 1367/3 की जमीन पर यदि दोबारा प्लॉटिंग और रजिस्ट्री की गतिविधियां चल रही हैं तो इसकी जांच कौन करेगा? कार्रवाई के बाद भी जमीन के टुकड़े होते रहे तो जोन कमिश्नर की कमिश्नरी और जोन अध्यक्ष की जवाबदेही कहीं कच्ची घानी का तेल लेने तो नहीं गई है ? और यदि इन खसरा नंबरों पर जमीन की रजिस्ट्री वास्तव में हो रही है, तो रजिस्ट्री दस्तावेज सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

फिलहाल जोन कमिश्नर साहब से सवाल यह है – क्या वास्तव में जेसीबी से प्लॉटिंग हट गई, या कार्रवाई के नाम पर कमिश्नरी का रुतबा दर्शाना था ?

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