महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनान्तर्गत के तहत बनने वाले निजी डबरी पर मजदूरों के जगह अधिकतम डबरी पर जेसीबी और ट्रेक्टर से निर्माण करवाया जा रहा है।

निजी डबरी पर तकनीकी सहायक और रोजगार सहायकों की अहम भूमिका।

सारंगढ़ जनपद पंचायत पर लगभग 189 हितग्राहियो को आबंटन हुआ डबरी अधिकतम पर जेसीबी और ट्रेक्टर से निर्माण।

सूत्रों से छन कर आयी जानकारी।

दिनेश जोल्हे
।।सारंगढ़।।
जनपद क्षेत्रो में ऐसे ग्राम पंचायतो की भरमार लगी हुई है। जहाँ ग्रामीण हितग्राहियो के नाम पर निजी डबरी की स्वीकृति हुई है, जिसकी लागत एक लाख दस हजार की बननी है। जानकारी अनुसार इसकी उद्देश्य मछली पालन, पानी एकत्रीत कर अपने बाड़ी, साग, सब्जियों, फसल पर बेहतर तरीका से किया जा सकता है। लेकिन रोजगार गारंटी मनरेगा विभाग में इसकी निर्माण को मजदूरो के हाथों में फावड़ा, गैंती के सहारे निर्माण करना होता है, जिसकी 20 मीटर लंबाई के साथ ही साथ 12 इंच की 10 लेयर तैयार करना होता है जिससे डबरी की निर्माण को देखते हुए इसकी मूल्यांकन की दायित्व तकनीकी सहायको की होती है लेकिन अधिकतम निजी डबरी पर तो जेसीबी से निर्माण कार्य करवाया जा रहा है।
ताजा उदाहरण आपको ग्राम सिलयारी और ग्राम पंचायत कटेकोनी में देखने को भली-भांति मिल ही जायेगा जिसकी निर्माण जेसीबी और ट्रेक्टर से करवाया गया है। आपको बता दे ऐसे भी बहोतो डबरी निर्माण करवाया गया है जिस पर दूसरे जगह की मिट्टी को खनन कर लाकर तालाब की आकार को दिखाने के लिए मिट्टी को ट्रेक्टर से किनारे किनारे डाला गया है। जिस पर ट्रेक्टर जेसीबी के सहारा काम करवाया गया है।
जिसकी आकार पहले से डबरी पर ही निर्भर है सरकारी राजस्व भूमि पर भी डबरी खोदवाया गया जिसकी निर्माणाधीन अवस्था को आप देख कर अंदाजा लगा सकते है कि किस तरह तकनीकी सहायको की मास्टर एस्ट्रोक दिमाग लगाया जा रहा है।
मजदूरों को 150 दिन की मजदूरी देना है लेकिन यहां तो जेसीबी में काम करवाकर मजदूरों की नाम पर एफटीओ कर राशि जनरेट किया जा रहा है जिससे आगामी सर्वदारी निर्माण कामो से वंचित हो सकते है ग्रामीणों की मजदूरी को एक जीवनशैली की गतिविधि रोजगार गारंटी के तहत मिलती उसको भी भ्रस्टाचार से जोड़ कर जेसीबी से करवाया जा रहा है। हमने एक-दो तकनीकी सहायको को भी दूरभाष की माध्यम से सम्पर्क साधने की कोशिश किया, लेकिन परिचय सुनते ही पत्रकार की नाम फोन जाने पर बिजी और चुनाव ड्यूटी का हवाला दिया जा रहा है।

By Dinesh Soni

जून 2006 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेरे आवेदन के आधार पर समाचार पत्र "हाइवे क्राइम टाईम" के नाम से साप्ताहिक समाचार पत्र का शीर्षक आबंटित हुआ जिसे कालेज के सहपाठी एवं मुँहबोले छोटे भाई; अधिवक्ता (सह पत्रकार) भरत सोनी के सानिध्य में अपनी कलम में धार लाने की प्रयास में सफलता की ओर प्रयासरत रहा। अनेक कठिनाइयों के दौर से गुजरते हुए; सन 2012 में "राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा" और सन 2015 में "स्व. किशोरी मोहन त्रिपाठी स्मृति (रायगढ़) की ओर से सक्रिय पत्रकारिता के लिए सम्मानित किए जाने के बाद, सन 2016 में "लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की तरफ से निर्भीक पत्रकारिता के सम्मान से नवाजा जाना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्यजनक रहा।

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