गरियाबंद। मैनपुर क्षेत्र की एक नर्सरी में इन दिनों विभिन्न प्रजाती के फलदार एवं अन्य किस्म के पौधों, वृक्षों को उगाने के लिए सीड़ बाल तैय्यार किये जा रहे हैं। हालॉकि विभाग के पास इस कार्य के लिए फिलहाल कोई बजट नही है, किन्तु वनकर्मीे स्व-प्रेरित इसका निर्माण कर रहे हैं।
मैनपुर की नर्सरी में तैयार सीड बॉल्स।
करीब 400 सीड़ बाल तैय्यार किये जा चुके हैं इनमें आम, कुसुम, चिरौंजी, कटहल, जामुन आदि के बीज है जिन्हे मानसून के पूर्व एक बडे इलाके में अलग-अलग स्थानों पर डाल दिया जायेगा। वन कर्मियों के अनुसार हर व्यक्ति इस अनोखी पहल के साथ जुड सकता है और प्रकृति की सेवा कर सकता है, ये वैसा ही है जैसे पक्षी पेडों के बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थानों तक फैलाते है।
कैसे बनाते हैं सीड़ बॉल्स
थोडी सी उपजाउ दोमट मिट्टी, थोडा वर्मी कंपोस्ट खाद या गोबर खाद, कोयले का चूरा इत्यादि में इतना पानी मिलाए की मिट्टी को हथेलियों के बीच रखकर आटे की लोई की तरह आकार दिया जा सके, लोई को हथेलियों में दबाकर चपटा करते हुए इसके बीच में बीज रखकर, बीजों के आकार के अनुसार बॉल बनायें फिर इसे एक तसलें में तैय्यार गोबर के गाढे घोल में डुबाकर पुराने अखबार बारदाने या तिरपाल पर रखते जाये। करीब 24 से 48 घंटे छांव में सुखने के बाद सीड बाल तैय्यार हो जाते हैं।
क्या करना होगा ?
कही भी आते जाते घुमने-फिरने के दौरान रोजाना दो-चार सीड बॉल अपने साथ रखें, उचित स्थान देखकर इन बॉल्स को फेंक दे या जमीन में क्रमबद्घ तरीके से एक – एक मीटर की दूरी पर मानसून के पूर्व इन्हे रोपित कर दें। बच्चे भी इस कार्य में आपकी मदद कर सकते हैं, वैसे भी बच्चों को मिट्टी से खेलना अच्छा लगता है लिहाजा गर्मियों की छुट्टीयों में उनका टाईम पास भी बेहतर हो जायेगा और लगे हाथ एक सृजनात्मक कार्य करने का अनुभव भी हो जाएगा।
केन्या में सफल वृक्षारोपण
सीड़ बॉल का प्रयोग सबसे पहले केन्या में किया गया था। धीरे-धीरे पूरे विश्व ने इस टेक्निक को अपना लिया है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा में इसका प्रयोग सफल रहा है, अब रायपुर संभाग के वनों में सीड़ बॉल का छिडकाव किया जा रहा है।
बीजों का चयन
एक पानी से भरी बाल्टी या टब में एक घंटे या अधिक समय के लिए बीजों को डाल दें, पानी के नीचे बैठे बीज का उपयोग करें। सतह पर तैरते बीजों का प्रयोग ना करें।