गुरूर के अंदरूनी इलाकों में बेखौफ, बिना अनुमति धडल्ले से चल रही पेड़ों पर आरी।
आदिवासी जमीन की घेराबंदी में लकड़ी के खूंटों के इस्तेमाल का आरोप, एसडीएम ने पटवारी और आरआई को सौंपी जांच

बालोद/गुरूर। बालोद जिले के गुरूर क्षेत्र के अंदरूनी इलाकों में हरे-भरे पेड़ों की कथित रूप से बिना अनुमति कटाई कर उसी लकड़ी से खेतों की घेराबंदी किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, पेड़ों के तनों से खूंटे तैयार कर जमीन की सीमाओं पर गाड़े जा रहे हैं और तार लगाकर बाड़ बनाई जा रही है। मामले में गुरूर की अनुविभागीय अधिकारी प्राची ठाकुर ने संज्ञान लेते हुए पटवारी और राजस्व निरीक्षक (आरआई) को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
पेड़ों की कटाई कर बनाई जा रही बाड़
क्षेत्र के कुछ हिस्सों में जमीन की घेराबंदी के लिए लकड़ी के खूंटों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इन खूंटों को तैयार करने के लिए हरे पेड़ों की कटाई की गई। हालांकि, संबंधित पेड़ों की संख्या, कटाई की अनुमति और जमीन के स्वामित्व से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पटवारी और आरआई करेंगे जांच
मामले को संज्ञान में लेते हुए एसडीएम प्राची ठाकुर ने संबंधित पटवारी और आरआई को जांच कर प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच में पेड़ों की कटाई, उपलब्ध अनुमति, जमीन से संबंधित दस्तावेज और घेराबंदी में इस्तेमाल की गई लकड़ी की स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। एसडीएम के अनुसार, जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जमीन के दस्तावेजों की भी होगी पड़ताल
क्षेत्र में जमीन की खरीदी-बिक्री और उसके इस्तेमाल को लेकर सामने आ रही गतिविधियों के बीच राजस्व विभाग की जांच में संबंधित भूमि के दस्तावेजों का सत्यापन भी अहम रहेगा। मौके पर पेड़ों की कटाई की स्थिति, भूमि की सीमा और घेराबंदी में इस्तेमाल की गई लकड़ी की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित गतिविधियां नियमों के अनुरूप हुई हैं या नहीं।
इसे भी पढ़ें >> एनएच 30 पर एसपी का सेफ्टी ऑपरेशन
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पेड़ों की कटाई बिना अनुमति किए जाने के आरोप की पुष्टि और जिम्मेदारी तय होना जांच प्रतिवेदन तथा उपलब्ध दस्तावेजों पर निर्भर करेगा।



