आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र के लिए पालकों की दौड़भाग
स्कूल में दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा करीब, गुरूर तहसील में प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे पालक; देरी हुई तो बच्चों से जुड़ी योजनाओं और छात्रहित की प्रक्रियाओं पर असर की चिंता

स्कूल की डेडलाइन सिर पर, गुरूर तहसील में प्रमाण पत्र बनवाने दफ्तरों के चक्कर काट रहे पालक; समय पर दस्तावेज नहीं मिले तो बच्चों के सामने योजनाओं और छात्रहित से जुड़ी प्रक्रियाओं में परेशानी का सवाल
गुरूर (बालोद)। बच्चों के आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर गुरूर तहसील क्षेत्र के पालकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। स्कूलों में आवश्यक दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा नजदीक है, लेकिन प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पालकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्कूल की डेडलाइन और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच फंसे पालकों को आखिर राहत कब मिलेगी?
एक तरफ स्कूल की डेडलाइन, दूसरी तरफ प्रमाण पत्र की दौड़
पालकों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि बच्चों के स्कूल संबंधी कामकाज के लिए जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। स्कूलों में दस्तावेज जमा करने की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ ही प्रमाण पत्र बनवाने की दौड़ भी तेज हो गई है।
एक ओर बच्चों के दस्तावेज समय पर जमा करने की चिंता है, तो दूसरी ओर प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की मजबूरी। ऐसे में पालकों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि प्रक्रिया में देरी होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
दस्तावेज अटके तो बच्चों के हित पर असर की चिंता
आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न शासकीय योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आवश्यक दस्तावेज के रूप में मांगे जा सकते हैं। ऐसे में समय पर प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होने से पात्र विद्यार्थियों को संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी आने की आशंका पालक जता रहे हैं।
पालकों की चिंता केवल कागज मिलने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि दस्तावेज समय पर तैयार नहीं हुए और स्कूल की निर्धारित समय-सीमा निकल गई, तो उसका असर बच्चों की पढ़ाई या योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं पर नहीं पड़ना चाहिए।
लंबित आवेदनों के जल्द निराकरण की मांग
पालकों की मांग है कि आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र से संबंधित लंबित आवेदनों की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और पात्र आवेदकों को निर्धारित समय के भीतर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए।
पालकों का कहना है कि स्कूलों में दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा पहले से निर्धारित रहती है। ऐसे में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी समयबद्ध हो, ताकि विद्यार्थियों और उनके परिवारों को अंतिम समय में अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े।
डेडलाइन तय है तो प्रमाण पत्र की प्रक्रिया भी समयबद्ध क्यों नहीं?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्कूलों में दस्तावेज जमा करने की समय-सीमा तय है, तो प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पालकों को इतनी भागदौड़ क्यों करनी पड़ रही है? यदि किसी आवेदन में दस्तावेजों की कमी है तो आवेदक को समय रहते इसकी जानकारी मिलनी चाहिए और पात्र आवेदनों का निराकरण अनावश्यक देरी के बिना होना चाहिए।
गुरूर तहसील के पालकों की अपेक्षा फिलहाल साफ है—उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र चाहिए, ताकि बच्चों के दस्तावेज समय पर स्कूल में जमा हो सकें और किसी पात्र विद्यार्थी को दस्तावेजी प्रक्रिया की वजह से परेशानी न उठानी पड़े।



