करोड़ों का छात्रावास, उद्घाटन से पहले ही दीवारों में सीपेज; निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
सूचना बोर्ड भी गायब, निर्माण की लागत और जिम्मेदार एजेंसी की जानकारी सार्वजनिक नहीं; सवाल—इंजीनियर मौके की हकीकत देखेंगे या फाइलों में ही होगा मूल्यांकन?

गुरूर (बालोद) hct : सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता के दावों के बीच बालोद जिले के गुरूर से सामने आई तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। यहां करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा छात्रावास उद्घाटन से पहले ही अपनी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है।

उद्घाटन से पहले ही दीवारों पर सीपेज के निशान
बताया जा रहा है कि छात्रावास की दीवारों पर सीपेज और नमी के निशान दिखाई दे रहे हैं। जिस भवन को विद्यार्थियों के उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है, उसमें उद्घाटन से पहले ही सीपेज नजर आना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भवन की टिकाऊपन को लेकर चिंता पैदा करता है।
सिर्फ सीपेज नहीं, सूचना बोर्ड भी गायब
मामला केवल दीवारों में दिखाई दे रही नमी तक सीमित नहीं है। निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड भी नजर नहीं आने की बात सामने आई है। आमतौर पर ऐसे सरकारी निर्माण कार्यों में लागत, स्वीकृति, कार्य एजेंसी, विभाग, निर्माण अवधि और अन्य आवश्यक जानकारियां सूचना बोर्ड के माध्यम से सार्वजनिक की जाती हैं। ऐसे में बोर्ड का मौके पर नहीं होना पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़ा करता है।
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करोड़ों के काम की जानकारी जनता से क्यों छिपी?
सरकारी निर्माण में खर्च होने वाली राशि जनता के धन से आती है। ऐसे में आम नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि भवन का निर्माण कितनी लागत से हो रहा है, निर्माण एजेंसी कौन है और कार्य पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा क्या है। जब निर्माण स्थल पर ही जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं दिखाई देती, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर निर्माण कार्य की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?
उद्घाटन से पहले सीपेज, आगे क्या होगा?
सबसे गंभीर सवाल भवन की दीर्घकालिक मजबूती को लेकर है। यदि निर्माण पूरा होने और विद्यार्थियों के उपयोग में आने से पहले ही दीवारों पर सीपेज दिखाई दे रहा है, तो लगातार बारिश और भवन के नियमित उपयोग के बाद इसकी स्थिति कैसी होगी?

क्या संबंधित इंजीनियर ने भवन का मौके पर विस्तृत निरीक्षण किया है? क्या सीपेज के कारणों की तकनीकी जांच कराई गई है? क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और वाटरप्रूफिंग व्यवस्था की गुणवत्ता की जांच हुई है?
इंजीनियर मौके पर जांच करेंगे या फाइलों में ही सब ‘ओके’?
इस पूरे मामले में अब निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकारी निर्माण की गुणवत्ता का वास्तविक आकलन केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर भवन की स्थिति देखकर किया जाना जरूरी है। सवाल यह है कि संबंधित इंजीनियर और अधिकारी मौके पर पहुंचकर दीवारों में दिखाई दे रहे सीपेज की जांच करेंगे या फिर फाइलों में दर्ज प्रगति और गुणवत्ता रिपोर्ट के आधार पर ही निर्माण कार्य को सही मान लिया जाएगा?
करोड़ों का भवन, जिम्मेदारी किसकी?
छात्रावास में यदि निर्माण संबंधी कोई कमी है तो उद्घाटन से पहले उसे सामने लाकर सुधारना ही सबसे उचित कदम होगा। इससे भविष्य में विद्यार्थियों और विभाग दोनों को संभावित परेशानी से बचाया जा सकता है। उद्घाटन से पहले सीपेज की शिकायत सामने आना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बाद में भवन के उपयोग के दौरान किसी बड़ी समस्या की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना और मुश्किल हो सकता है।
सीधे सवाल
- उद्घाटन से पहले दीवारों में सीपेज क्यों दिखाई दे रहा है?
- निर्माण स्थल का सूचना बोर्ड कहां है?
- भवन की कुल स्वीकृत लागत कितनी है?
- निर्माण एजेंसी कौन है?
- गुणवत्ता की तकनीकी जांच किस अधिकारी ने की है?
- क्या सीपेज की वजह जानने के लिए जांच कराई गई है?
- क्या उद्घाटन से पहले भवन का दोबारा तकनीकी निरीक्षण होगा?
- क्या मूल्यांकन मौके की वास्तविक स्थिति देखकर किया जाएगा?



