Chhattisgarh

Gass Memorial की जमीन का राज : भाग 1

रायपुर के ऐतिहासिक Gass Memorial की कहानी में मिशन, ट्रस्ट, नजूल जमीन और शासन की कार्रवाई की उलझी कड़ियां; 2017 से चल रहे प्रकरण ने खड़े किए कई गंभीर सवाल — जिस नाम पर खड़ा हुआ स्मारक, उसकी जमीन आखिर किसकी थी?

रायपुर। राजधानी रायपुर के बीचों-बीच स्थित Gass Memorial का नाम शहर के पुराने सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक इतिहास से जुड़ा हुआ है। लेकिन Gass Memorial की पहचान केवल एक पुराने भवन या खेल मैदान तक सीमित नहीं है। इसके पीछे मिशनरी इतिहास, चर्च से जुड़े ट्रस्ट, अलग-अलग संपत्तियों और सरकारी नजूल भूमि के रिकॉर्ड की ऐसी कड़ियां मौजूद हैं, जिनका पूरा दस्तावेजी इतिहास अभी एक जगह सामने नहीं आया है।

इस पड़ताल की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सामने आती है Gass Memorial Centre से। आयकर अपीलीय अधिकरण, रायपुर के 21 सितंबर 2022 के आदेश में Gass Memorial Centre का पता Ground Floor, K.K. Road, Moudhapara, Raipur दर्ज है। उसी न्यायिक रिकॉर्ड में Gass Memorial Centre ने बताया था कि उसे United Church of Northern India Trust Association (UCNITA) की रायपुर स्थित संपत्तियों – Building, Land, Play Ground आदि- की देखभाल और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि संस्था स्वयं को Church of North India की wing और social service organisation बताती थी।

यहीं से सवाल उठता है कि Gass Memorial Centre की संपत्ति और राजभवन के सामने स्थित Gass Memorial Ground क्या एक ही संपत्ति हैं या अलग-अलग संपत्तियां? उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर फिलहाल दोनों को एक मान लेना उचित नहीं होगा।

Gass Memorial नाम आया कहां से?

Gass Memorial के नाम के पीछे मिशनरी इतिहास जुड़ा है। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों में Gass Memorial Centre को Evangelical Mission द्वारा स्थापित संस्था बताया गया है। इसे रायपुर में reading room और Christian social एवं beneficent activities के केंद्र के रूप में वर्णित किया गया है। 26 अगस्त 1957 को इस केंद्र के भीड़ द्वारा जला दिए जाने का भी ऐतिहासिक उल्लेख मिलता है।

एक अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज में Gass Memorial Centre को जय स्तंभ चौक के पास स्थित Christian Institution बताया गया है और 27 अगस्त 1957 की आगजनी का विवरण दिया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जय स्तंभ चौक वाला Gass Memorial Centre दशकों से रायपुर के सार्वजनिक और सामाजिक इतिहास का हिस्सा रहा है।

आज भी सरकारी रिकॉर्ड में Gass Memorial Center, Jai Stambh Chowk, Raipur का पता दर्ज मिलता है। रायपुर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर Punjab & Sindh Bank का पता Gass Memorial Center, Jai Stambh Chowk दिया गया है। अर्थात एक संपत्ति की पहचान जय स्तंभ चौक/के.के. रोड, मौदहापारा से होती है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

राजभवन के सामने वाली जमीन कौन-सी है?

राजभवन के सामने स्थित जमीन को लेकर उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के जुलाई 2025 के आदेश में प्रकरण क्रमांक 03/ब 121 वर्ष 2017 का उल्लेख है। आदेश में मौजा सिविल स्टेशन, राजभवन के सामने, आकाशवाणी के पास स्थित भूमि को नजूल भूमि बताया गया है। इसका विवरण Block No. 15, Plot No. 05 के रूप में दर्ज है। कुल रकबा 2,59,476 वर्गफुट बताया गया है।

इसी आदेश में बताया गया है कि कुल भूमि में से 2,26,401 वर्गफुट भूमि को शासन में निहित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। शासन ने प्रस्ताव पर नियमानुसार भूमि को शासन में निहित करने की कार्रवाई किए जाने की स्वीकृति प्रदान की। यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है।

सरकारी आदेश में शासन में निहित करने की कार्रवाई की स्वीकृति का उल्लेख है। इस दस्तावेज में यह नहीं कहा गया कि किस तारीख को वास्तविक भौतिक कब्जा लिया गया, कब्जा पंचनामा कब बना या चारदीवारी का निर्माण कब शुरू हुआ। इसलिए इन बातों को इस आदेश के आधार पर तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

2017 में उठी थी Gass Memorial की जमीन की आवाज

विश्वदिनी पांडेप्रदेश अध्यक्ष, हिंदू स्वाभिमान संगठन
विश्वदिनी पांडे
प्रदेश अध्यक्ष, हिंदू स्वाभिमान संगठन

Gass Memorial की जमीन को लेकर विवाद की सरकारी दस्तावेजी कड़ी वर्ष 2017 तक जाती है। उपलब्ध शासन आदेश में इसे प्रकरण क्रमांक 03/ब 121 वर्ष 2017 – “हिंदू स्वाभिमान संगठन बनाम यूनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्दर्न इंडिया ट्रस्ट” के रूप में दर्ज किया गया है। इस प्रकरण से संबंधित दस्तावेजी सामग्री इस पड़ताल के लिए हिंदू स्वाभिमान संगठन की तत्कालीन अध्यक्षा विश्वदिनी पांडे से प्राप्त हुई है।

Gass Memorial की जमीन का राज – भाग 1
रायपुर के Gass Memorial की जमीन से जुड़े पुराने मिशन, ट्रस्ट और नजूल रिकॉर्ड की पड़ताल।

हालांकि उपलब्ध शासन आदेश में विश्वदिनी पांडे की व्यक्तिगत भूमिका या तत्कालीन प्रशासनिक कार्रवाई का विस्तृत विवरण दर्ज नहीं है। इसलिए इस पड़ताल में उनके नाम का उल्लेख स्रोत के रूप में किया जा रहा है, जबकि वर्ष 2017 के प्रकरण, पक्षकारों और भूमि संबंधी विवरण को सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

 

नजूल भूमि और चर्च/ट्रस्ट का संबंध क्या है?

यहीं से Gass Memorial की जमीन का असली सवाल पैदा होता है। अगर संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में नजूल भूमि थी, तो सवाल उठता है कि मिशन या चर्च से जुड़े ट्रस्ट का उस जमीन पर अधिकार किस प्रकार बना?

  • क्या जमीन किसी पुराने पट्टे या लीज के माध्यम से दी गई थी?
  • क्या वह लीज किसी मिशनरी संस्था के नाम थी?
  • क्या बाद में वही अधिकार किसी ट्रस्ट को प्राप्त हुआ?

और यदि ऐसा हुआ तो UCNI, UCNITA और बाद में Church of North India के बीच उस संपत्ति का संबंध किस दस्तावेज के आधार पर बना? इन सवालों का जवाब केवल वर्तमान नाम देखकर नहीं दिया जा सकता। इसके लिए पुराने नजूल रजिस्टर, मूल allotment record और lease deed देखना जरूरी होगा।

UCNITA और Gass Memorial Centre की संपत्ति

2022 के ITAT के रिकॉर्ड में यह कड़ी महत्वपूर्ण रूप से सामने आती है। Gass Memorial Centre ने न्यायाधिकरण के सामने बताया था कि उसकी आय रायपुर में UCNITA की संपत्तियों से संबंधित थी और वह इन संपत्तियों का beneficiary तथा caretaker था। रिकॉर्ड में Building, Land और Play Ground का उल्लेख है।

न्यायाधिकरण ने उस मामले में Gass Memorial Centre की आयकर पंजीयन से संबंधित विवाद पर फैसला दिया और उसकी अपील स्वीकार की। यह फैसला जमीन के मूल स्वामित्व का फैसला नहीं था। इसलिए इस आदेश से यह निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा कि राजभवन के सामने स्थित Block 15, Plot 05 का मूल मालिक UCNITA ही था। लेकिन यह दस्तावेज इतना जरूर साबित करता है कि Gass Memorial Centre और UCNITA के बीच रायपुर की संपत्तियों को लेकर एक दस्तावेजी संबंध मौजूद था। यही संबंध आगे की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

Gass Memorial Centre और Gass Memorial Ground — क्या दोनों एक हैं?

यह सवाल इस पूरी पड़ताल में बेहद महत्वपूर्ण है। एक तरफ न्यायिक रिकॉर्ड में Gass Memorial Centre का पता K.K. Road, Moudhapara है। दूसरी तरफ राजभवन के सामने वाली जमीन सरकारी आदेश में मौजा सिविल स्टेशन, Block 15, Plot 05 के रूप में दर्ज है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर दोनों को एक ही खसरा या संपत्ति घोषित करना जल्दबाजी होगी।बल्कि जांच का पहला सवाल यही होना चाहिए –

क्या जय स्तंभ चौक का Gass Memorial Centre और राजभवन के सामने का Gass Memorial Ground अलग-अलग संपत्तियां हैं? अगर अलग हैं, तो दोनों का मूल स्वामित्व और जमीन का इतिहास भी अलग हो सकता है। और अगर किसी पुराने रिकॉर्ड में दोनों एक ही मूल संपत्ति के अलग-अलग हिस्से साबित होते हैं, तो फिर उस संपत्ति के विभाजन और पुराने खसरा/प्लॉट नंबर की कहानी सामने आएगी।

33,075 वर्गफुट का सवाल

सरकारी आदेश में कुल जमीन का रकबा 2,59,476 वर्गफुट है, जबकि शासन में निहित करने के प्रस्ताव में 2,26,401 वर्गफुट भूमि का उल्लेख है। दोनों के बीच 33,075 वर्गफुट का अंतर है। यह अंतर क्यों है?

  1. क्या 33,075 वर्गफुट हिस्सा किसी दूसरे उपयोग में था?
  2. क्या वह अलग parcel था?
  3. क्या भवन या अन्य संरचना उस हिस्से में आती थी?
  4. क्या किसी अन्य व्यक्ति/संस्था का अधिकार था?
  5. या नजूल रिकॉर्ड में जमीन अलग-अलग हिस्सों में दर्ज थी?

इन सवालों का जवाब मूल नजूल नक्शा, प्लॉट रजिस्टर, सीमांकन रिपोर्ट और 2017 की केस फाइल से ही मिल सकेगा।

क्या 1922 की लीज ही पूरी कहानी की चाबी है?

Gass Memorial की जमीन को लेकर 1922 की दीर्घकालीन लीज का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों और चर्चाओं में मिलता रहा है। लेकिन इस पड़ताल में अभी तक मूल 1922 Lease Deed हमारे सामने नहीं है। इसलिए 1922 की लीज को फिलहाल अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। अगर मूल लीज डीड मिलती है, तो वह इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकती है। उसमें यह पता चलेगा कि जमीन किसके नाम दी गई, किसने दी, कितने वर्षों के लिए दी गई, जमीन का तत्कालीन विवरण क्या था और लीज की शर्तें क्या थीं।

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लेकिन उससे भी बड़ा सवाल होगा – 1922 से पहले इस जमीन का मालिक कौन था? यदि जमीन पहले से सरकारी नजूल भूमि थी, तो 1922 का दस्तावेज केवल lease का इतिहास बताएगा, मूल ownership का नहीं।और अगर उससे पहले किसी मिशन या अन्य संस्था का वैध title था, तो कहानी पूरी तरह दूसरी दिशा ले सकती है।

2025 की शासन कार्रवाई ने क्यों बढ़ाई जिज्ञासा?

जुलाई 2025 का सरकारी आदेश इस पूरे विवाद को नया मोड़ देता है। इसमें शासन ने संबंधित प्रस्ताव पर भूमि को शासन में निहित करने की कार्रवाई की स्वीकृति दी है। लेकिन इस आदेश को पढ़ते समय यह अंतर समझना जरूरी है कि शासन में निहित करने की कार्रवाई की स्वीकृति और वास्तविक भौतिक कब्जा दो अलग बातें हैं। इसलिए अब जांच का अगला चरण यह पता लगाना है कि 2025 के आदेश के बाद:

  • क्या अंतिम vesting order जारी हुआ?
  • क्या नामांतरण हुआ?
  • क्या कब्जा पंचनामा तैयार हुआ?
  • क्या सीमांकन हुआ?
  • संबंधित भूमि का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड क्या कहता है?
  • और क्या जमीन का पूरा 2,59,476 वर्गफुट हिस्सा शासन के अधिकार में आया या केवल 2,26,401 वर्गफुट?

2026 में फिर सामने आया Gass Memorial

Gass Memorial का नाम 2026 में भी सामने आया है। उपलब्ध बजट संबंधी प्रकाशित रिपोर्टों में Gass Memorial खेल मैदान के उन्नयन के लिए ₹15 करोड़ के बजटीय प्रावधान का उल्लेख किया गया है। लेकिन यहां भी दस्तावेजी सावधानी जरूरी है। अभी इस पड़ताल के पास नगर निगम की मूल बजट पुस्तिका, DPR, प्रशासनिक स्वीकृति और परियोजना से संबंधित भूमि-अधिकार दस्तावेज नहीं हैं। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि यह राशि निश्चित रूप से उसी Block 15, Plot 05 की पूरी जमीन पर खर्च होनी है।

बल्कि यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है – जिस भूमि को 2025 में शासन में निहित करने की कार्रवाई की स्वीकृति मिली, उस पर 2026 में प्रस्तावित सार्वजनिक विकास परियोजना का कानूनी और राजस्व आधार क्या है?

पहली किस्त में सामने आए सवाल

Gass Memorial की कहानी को केवल “चर्च की जमीन” या “सरकार की जमीन” कहकर खत्म नहीं किया जा सकता। अभी उपलब्ध दस्तावेज तीन महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखते हैं।

पहला – Gass Memorial Centre का रायपुर की चर्च-संबंधित संपत्तियों और UCNITA से दस्तावेजी संबंध न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज है।
दूसरा – राजभवन के सामने, आकाशवाणी के पास स्थित Block 15, Plot 05 की भूमि को जुलाई 2025 के सरकारी आदेश में नजूल भूमि बताया गया और 2,26,401 वर्गफुट को शासन में निहित करने की कार्रवाई की स्वीकृति दी गई।
तीसरा – इस जमीन से संबंधित राजस्व प्रकरण वर्ष 2017 से चल रहा था और 2024 में आयुक्त रायपुर संभाग के पत्र के माध्यम से मामला शासन तक पहुंचा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है – जिस जमीन को आज सरकारी रिकॉर्ड में नजूल भूमि बताया जा रहा है, वह मिशन/ट्रस्ट के पास किस अधिकार से पहुंची? और इसके साथ जुड़े दूसरे सवाल भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं –

  • Gass Memorial Centre की जमीन और राजभवन के सामने के Gass Memorial Ground की जमीन क्या एक ही है?
  • UCNI से UCNITA और फिर CNI तक संपत्ति का अधिकार किस दस्तावेज से पहुंचा?
  • 1922 की कथित लीज वास्तव में किस जमीन की थी और उससे पहले जमीन किसके नाम थी?
  • Block 15, Plot 05 का पुराना खसरा या प्लॉट नंबर क्या था?
  • और 2,59,476 वर्गफुट में से 33,075 वर्गफुट का अंतर आखिर किस वजह से है?

इन सवालों के जवाब अब पुराने नजूल रिकॉर्ड, मूल लीज डीड, राजस्व न्यायालय के वर्ष 2017 के प्रकरण और 2024 के आयुक्तीय प्रस्ताव में तलाशे जाएंगे। यहीं से Gass Memorial की जमीन की वह कहानी शुरू होती है, जो वर्तमान नाम और दावों से नहीं, बल्कि पुराने सरकारी रिकॉर्ड से सामने आएगी।

पड़ताल जारी है…

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