Chhattisgarh

धनवाड़ा पावर प्रोजेक्ट पर कानूनी ग्रहण

11 KV और 33 KV लाइन को लेकर उठे सवाल, हाईकोर्ट में जनहित याचिका

रायपुर hct : धनवाड़ा पावर प्रोजेक्ट : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित 1320 मेगावाट के ‘धनवाड़ा पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड‘ से जुड़े विवाद ने अब पूरी तरह से न्यायिक रूप ले लिया है। बिलासपुर उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (WPPIL क्रमांक 33/2026) के बाद यह मामला केवल बिजली लाइन से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा है। उपलब्ध न्यायालयीन अभिलेख बताते हैं कि याचिकाकर्ता नागरिक विवेक कुमार पांडेय द्वारा दायर इस याचिका के बाद संबंधित विभागों और परियोजना से जुड़े पक्षों का ध्यान इस प्रकरण की ओर गया है।

 

चीफ जस्टिस की बेंच में सुनवाई और 13 जुलाई की तारीख

धनवाड़ा पावर प्रोजेक्ट का यह मामला फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन (Sub-judice) है। उपलब्ध न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार, इस जनहित याचिका की प्रारंभिक सुनवाई 18 जून 2026 को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष हुई थी। उस दिन राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए न्यायालय से समय मांगा गया, जबकि कंपनी (धनवाड़ा पावर) की ओर से भी अधिवक्ता ने न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है। फिलहाल न्यायालय ने किसी पक्ष के या विपक्ष में कोई अंतिम निष्कर्ष व्यक्त नहीं किया है।

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धनवाड़ा पावर प्रोजेक्ट प्रतिवादियों की सूची (The Big-6)

Dhanwada Power Project Raigarh Chief Justice Bench Hearing
धनवाड़ा पावर प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका, जिसकी अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष होनी है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक निजी ताप विद्युत परियोजना से जुड़े विवाद में केवल स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र के सबसे बड़े विभाग शामिल हैं। प्रतिवादियों की यह सूची अपने आप में संकेत देती है कि विवाद का दायरा व्यापक है :

  • छत्तीसगढ़ शासन (राज्य सरकार)
  • प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF)
  • डीएफओ (DFO), धरमजयगढ़ वनमंडल
  • कलेक्टर, रायगढ़
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार
  • M/s धनवाड़ा पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड

धनवाड़ा पावर प्रोजेक्ट 11 KV बनाम 33 KV: विवाद की मुख्य कड़ी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार विवाद का प्रमुख बिंदु 33 केवी विद्युत लाइन से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि भालूपखाना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण के दौरान नए पोल लगाए गए थे यहीं से कई बड़े प्रश्न जन्म लेते हैं – क्या 11 केवी लाइन के नवीनीकरण और 33 केवी लाइन के विवाद का आपस में कोई संबंध है, या दोनों पूरी तरह अलग-अलग कार्य हैं? यदि ये दोनों कार्य अलग हैं, तो एक सामान्य लाइन के लिए जनहित याचिका में वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय जैसे शीर्ष विभागों को पक्षकार बनाए जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

 संवेदनशील क्षेत्र

धरमजयगढ़ वनमंडल लंबे समय से हाथियों की आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यह वनमंडल लेमरू एलीफेंट रिजर्व से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यदि किसी विद्युत अवसंरचना का निर्माण अथवा विस्तार वन क्षेत्र से होकर प्रस्तावित होता है, तो वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण से जुड़े पहलू भी स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

“हाईवे क्राइम टाइम” की विशेष पड़ताल जारी

यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या विवाद केवल विद्युत लाइन के मार्ग तक सीमित है, या फिर परियोजना की वैधानिक स्वीकृतियों, वन भूमि, पर्यावरणीय प्रक्रियाओं अथवा प्रशासनिक अनुमतियों से जुड़े व्यापक मुद्दे भी इसमें शामिल हैं? आने वाली सुनवाई (13 जुलाई) में राज्य सरकार, संबंधित विभागों और कंपनी के जवाब इस पूरे विवाद की वास्तविक दिशा को स्पष्ट करेंगे।

।। अस्वीकरण ।।
यह मामला बिलासपुर उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इस समाचार में उल्लिखित तथ्य उपलब्ध न्यायालयीन अभिलेखों, सार्वजनिक दस्तावेज़ों तथा संबंधित रिकॉर्ड पर आधारित हैं। किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायालय के निर्णय के अधीन होगा।

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