Chhattisgarh

शराब में मिलावटखोरी, ओवररेटिंग और सिस्टम में सेटिंग! सवालों में आबकारी तंत्र

इनोसोर्सेज प्लेसमेंट कंपनी से जुड़े हेमंत वैष्णव पर समझौता कराने, रकम मांगने और पुराने विवादों से जुड़े आरोप; कार्रवाई की बजाय ‘मैनेजमेंट मॉडल’ पर उठे सवाल

रायपुर hct : सद्दू विदेशी शराब दुकान से सामने आए कथित गड़बड़ी के मामले ने “आबकारी तंत्र सेटिंग” पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुकान के सुपरवाइजर अनिल राणा और सेल्समैन सोमेश राजवंशी पर कथित रूप से शराब में पानी मिलाकर बेचने और निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने के आरोप हैं। सूत्रों के मुताबिक यह खेल लंबे समय से जारी था, लेकिन हर बार मामला विभागीय स्तर पर दबा दिया जाता रहा। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि “आबकारी तंत्र सेटिंग” के कारण कार्रवाई अक्सर कमजोर पड़ जाती है।

जांच पर ‘सेटिंग’ हावी

बताया जा रहा है कि हाल ही में इनोसोर्सेज कंपनी के एक फील्ड ऑफिसर द्वारा दुकान का निरीक्षण किया गया, जिसमें कथित तौर पर कई अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि जांच के दौरान शराब की गुणवत्ता, स्टॉक संचालन और बिक्री प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई गईं। हालांकि कार्रवाई आगे बढ़ने से पहले ही मामला कथित तौर पर “सेटिंग” की दिशा में मुड़ गया। चर्चा यह है कि दुकान कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने की बजाय पूरे मामले को अंदरखाने निपटाने की कोशिश हुई।

संदिग्धता के कटघरे में हेमंत वैष्णव

इनोसोर्सेज प्लेसमेंट कंपनी से जुड़े हेमंत वैष्णवइसी कड़ी में इनोसोर्सेज प्लेसमेंट कंपनी से जुड़े हेमंत वैष्णव का नाम भी विवादों में सामने आ रहा है। आरोप है कि उन्होंने मामले में हस्तक्षेप करते हुए कथित तौर पर समझौते और पैसों के लेन-देन की भूमिका निभाई। यह भी कहा जा रहा है कि दुकान कर्मचारी सोमेश राजवंशी से बड़ी रकम की मांग की गई। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है, लेकिन विभागीय और ठेका प्रणाली से जुड़े लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि दुकान में वास्तव में ओवररेटिंग और मिलावट जैसी अनियमितताएं पकड़ी गई थीं, तो नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

हेमंत वैष्णव के दीगर कारनामे

हेमंत वैष्णव को लेकर पुराने विवादों का जिक्र भी अब सामने आने लगा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान संचालित A to Z प्लेसमेंट व्यवस्था में अवैध शराब और विभिन्न अनियमितताओं से जुड़े मामलों में भी उसका नाम चर्चा में रहा था। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में हुए कई विवादित मामलों में उसकी भूमिका को लेकर अंदरखाने सवाल उठते रहे हैं। वहीं भाजपा शासनकाल में राजदीप कंपनी में कार्य के दौरान नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों के साथ कथित धोखाधड़ी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

इसे भी पढ़ें >> रायपुर : शराब दुकानों में फिर शुरू हुआ ओवररेटिंग और मिलावट का काला खेल?

परछाई जो पीछा नहीं छोड़ रही

इसके अलावा बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी (BIS) में कार्यकाल के दौरान “डैमेज शराब” के नाम पर कर्मचारियों के वेतन से प्रति व्यक्ति 12 से 15 हजार रुपये तक की कटौती किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो मामला केवल विभागीय अनियमितता तक सीमित नहीं बल्कि कर्मचारियों के आर्थिक शोषण से भी जुड़ सकता है। अब मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाए।

आबकारी तंत्र सेटिंग पर उठे सवाल

आबकारी विभाग के नियमों के अनुसार शराब में मिलावट, ओवररेटिंग और वित्तीय अनियमितता जैसे मामलों में संबंधित कर्मचारियों पर निलंबन, ब्लैकलिस्टिंग और आपराधिक कार्रवाई तक का प्रावधान है। लेकिन सड्डू शराब दुकान का मामला यह संकेत देता है कि कार्रवाई से ज्यादा जोर कथित तौर पर “मैनेजमेंट” पर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अब “आबकारी तंत्र सेटिंग” को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

telegram link

Back to top button