भाठागांव शराब दुकान में बवाल, युवक पर जानलेवा हमला…
सेल्समेन की दोगलई को लेकर हुए विवाद में युवक की हत्या का प्रयास : आरोप, सवालों के दायरे में "पुलिस कमिश्नरेट"

राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिला और तहसील मुख्यालयों में संचालित शराब दुकानों में ओवररेटिंग और कथित मिलावटखोरी को लेकर प्रसारित खबर को अभी कुछ ही घंटे बीते थे कि भाठागांव ओवरब्रिज स्थित क्रोमा मॉल के पास संचालित कम्पोजिट शराब दुकान से बेईमानी, दबंगई और हिंसक विवाद का एक नया मामला सामने आ गया। इस घटना ने न केवल आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि रायपुर पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम की संवेदनशीलता और कार्रवाई शैली को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।
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रायपुर hct : राजधानी रायपुर के भाठागांव स्थित कम्पोजिट शराब दुकान में ओवररेटिंग और कथित गुंडागर्दी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। दुकान में पदस्थ एक सेल्समेन, जिसे ‘बिट्टू’ नाम से जाना जाता है, पर आरोप है कि वह लंबे समय से भीड़भाड़ का फायदा उठाकर ग्राहकों से निर्धारित कीमत से अधिक रकम वसूल रहा है। शिकायतें यह भी हैं कि अतिरिक्त पैसे लेने के बावजूद ग्राहकों को पूरी मात्रा में शराब नहीं दी जाती।
शिकायत पर ADO से संपर्क नहीं होने का आरोप
मामले को लेकर सहायक आबकारी अधिकारी (ADO) टेक बहादुर कुर्रे से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उपलब्ध मोबाइल नंबर 83191 54550 पर कई बार कॉल किए गए, लेकिन; शायद “साहब बहादुर” के हाथ ओवररेटिंग से मिली कमीशन की रकम गिनने में व्यस्त रहे होंगे ! आरोप है कि बाद में शिकायतकर्ता का नंबर ब्लॉक कर दिया गया। इससे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बोतल से हमला, युवक के हाथ में लगे 11 टांके
जानकारी के अनुसार 17 मई 2026 की रात करीब 9 बजे से 9:30 बजे के बीच लक्ष्मण नामक युवक कम्पोजिट शराब दुकान पहुंचा था। आरोप है कि उसने तीन क्वार्टर (पौव्वा) शराब की मांग की, लेकिन उसे केवल दो पौव्वा दिए गए। इसी बात को लेकर बहस शुरू हुई जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। आरोप है कि दुकान में पदस्थ सेल्समेन ‘बिट्टू’ ने जान से मारने की नियत से धारदार कांच की बोतल से लक्ष्मण पर हमला कर दिया, जिससे उसका हाथ बुरी तरह चीर गया। घायल युवक को 11 टांके लगाए गए हैं, मगर कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
पुरानी बस्ती थाना तक पहुंचा मामला
मामला पुरानी बस्ती थाना तक पहुंचा, लेकिन आरोप है कि वहां शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि 24 घंटे बीतने को हैं, पुलिस ने मामले को केवल रोजनामचे में दर्ज कर औपचारिकता निभाई और किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कागज हिले, कलम चली और सिस्टम ने अपना फर्ज पूरा मान लिया।
मामला जानलेवा हमले का था, बाकी युवक का हाथ कटा, खून बहा…; शायद यह सब उस Raipur Police Commissionerate की प्राथमिकता में शामिल नहीं था, जिसे शहर की कानून व्यवस्था का आधुनिक मॉडल बताकर पेश किया जाता है।

