छत्तीसगढ़ : कमिश्नरेट सिस्टम के बीच बढ़ता अपराध !
रायपुर में अधिवक्ता पर जानलेवा हमला और रायगढ़ में महिला अधिवक्ता की संदिग्ध मौत के बाद कानून व्यवस्था पर उठे सवाल।

छत्तीसगढ़ में बेलगाम अपराध अब सरकार के कानून व्यवस्था संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रायपुर में अधिवक्ता पर जानलेवा हमला और रायगढ़ में महिला जूनियर वकील की संदिग्ध मौत ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली की कार्यप्रणाली को कठघरे में ला खड़ा किया है।
छत्तीसगढ़ hct : प्रदेश में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब कानून की लड़ाई लड़ने वाले वकील भी सुरक्षित नहीं हैं। एक तरफ साय सरकार के मंत्री कानून व्यवस्था मजबूत होने के दावे करते नहीं थकते, वहीं दूसरी तरफ राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
हत्या, चाकूबाजी, लूट, महिलाओं के खिलाफ अपराध और खुलेआम गुंडागर्दी की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। लगातार सामने आ रही वारदातों ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ही नहीं, अब आम जनता और कानून से जुड़े लोग भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल प्रदेश के गृहमंत्री Vijay Sharma की कार्यशैली को लेकर खड़ा हो रहा है। सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि प्रदेश में कानून का राज स्थापित है, लेकिन ज़मीनी हालात उन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
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मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने राजधानी में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की थी। दावा किया गया था कि इससे अपराधों पर लगाम लगेगी, पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी और त्वरित कार्रवाई होगी। लेकिन मौजूदा हालात देखकर सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कमिश्नरेट सिस्टम का असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा?
छत्तीसगढ़ में बेलगाम अपराध
रायपुर में वकील पर हमला
बीते दिनों राजधानी रायपुर के राजातालाब इलाके में अधिवक्ता रमीज खान पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक उन्होंने कुछ युवकों को सड़क किनारे शराब पीने से मना किया था। मामूली विवाद इतना बढ़ा कि बदमाशों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल अधिवक्ता का इलाज मेकाहारा अस्पताल में होने की जानकारी है।
घटना के बाद अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। बड़ी संख्या में वकील सिविल लाइन थाने पहुंचे और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी व सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों की सुरक्षा पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
रायगढ़ में महिला वकील की हत्या
इधर रायगढ़ जिले से भी बेहद भयावह मामला सामने आया है। शहर से सटे पूंजीपथरा इलाके में 12 मई को नग्न अवस्था में मिली अज्ञात युवती की लाश की पहचान अब एक जूनियर महिला अधिवक्ता के रूप में हुई है, जो रायगढ़ न्यायालय में प्रैक्टिस करती थीं। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
एक महिला वकील की संदिग्ध परिस्थितियों में इस तरह लाश मिलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर प्रदेश में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं? और जब न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग ही अपराध का शिकार हो रहे हैं, तब आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
आखिर जिम्मेदारी किसकी?
प्रदेश में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। सवाल यह है कि क्या अपराधियों के मन से अब पुलिस और कानून का भय पूरी तरह खत्म हो चुका है? जिस पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को अपराध नियंत्रण और त्वरित कार्रवाई के बड़े दावों के साथ लागू किया गया था, उसका असर ज़मीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा?
राजधानी रायपुर से लेकर रायगढ़ तक सामने आ रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। हत्या, चाकूबाजी और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के बीच गृहमंत्री Vijay Sharma की कार्यशैली और सरकार के कानून व्यवस्था संबंधी दावे भी कठघरे में नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकार अपराध नियंत्रण को लेकर गंभीर कब दिखाई देगी, और कब तक प्रदेश में अपराधी बेखौफ होकर कानून व्यवस्था को चुनौती देते रहेंगे?

