अभनपुर के आरा मिल में प्रतिबंधित कहवा लकड़ी का भंडारण उजागर
शिकायत के बाद हरकत में आया वन विभाग, रेंजर बोले - जांच में अवैधता मिली तो होगी कार्रवाई।

शिकायत के बाद सामने आया मामला
अभनपुर (रायपुर) hct : अभनपुर क्षेत्र में संचालित आरा मिलों में प्रतिबंधित कहवा लकड़ी के कथित भंडारण को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार राकेश साहू और प्रदीप शर्मा से जुड़े आरा मिल परिसर में बड़ी मात्रा में कहवा लकड़ी रखे जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का संग्रहण बिना किसी संरक्षण या निगरानी के संभव नहीं हो सकता, वहीं विभागीय अमले की अनभिज्ञता भी कई सवाल खड़े कर रही है।

रेंजर ने कहा – जानकारी नहीं !
मामले को लेकर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) महोबिया से उनके मोबाइल नंबर 9755859974 पर संपर्क कर जानकारी मांगी गई। उनसे पूछा गया कि क्या उक्त आरा मिल में कहवा लकड़ी के भंडारण की जानकारी विभाग के संज्ञान में है अथवा नहीं। इस पर रेंजर महोबिया ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अब तक इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त नहीं हुई थी और यह मामला उन्हें बातचीत के माध्यम से पता चला है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जानकारी डिप्टी रेंजर को देकर जांच करवाई जाएगी।
जांच और विभागीय निगरानी पर उठे सवाल
रेंजर ने आगे कहा कि यदि जांच में अवैध भंडारण की पुष्टि होती है तो संबंधित आरा मिल संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वास्तव में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित लकड़ी का भंडारण हुआ है तो विभागीय निगरानी व्यवस्था अब तक इससे अनजान कैसे रही। वन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि कहवा जैसी प्रतिबंधित लकड़ी का परिवहन और भंडारण सामान्य प्रक्रिया नहीं होती तथा इसमें कई स्तरों पर निगरानी अपेक्षित रहती है।
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कार्रवाई होगी या मामला दब जाएगा?

इधर, मामले को लेकर जानकारों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस व्यवसाय से जुड़े और भी कई लोगों में शिकायत की जानकारी सामने आने के बाद हड़कंप मचने की भी खबर है और कई लोग जिनके मिल परिसर में प्रतिबंधित लकड़ी का भण्डारण भी मिलने की अंदेशा है वे हड़बड़ी में भंडारित लकड़ी को खपाने में जुट गए है।
कार्रवाई होगी या मामला दब जाएगा?
अब देखना यह हैं कि शिकायत के बाद वाकई में जांच होगी या जाँच के नाम पर जैसा की होते आया है केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या फिर वास्तव में भंडारण के स्रोत, परिवहन और संभावित संरक्षणकर्ताओं तक कार्रवाई पहुंचेगी। फिलहाल वन विभाग की ओर से जांच का भरोसा जरूर दिया गया है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कार्रवाई फाइलों तक सीमित रहती है या फिर आरा मिलों में जमा लकड़ी का सच भी बाहर आता है।

