Chhattisgarh

भाठागांव अवैध प्लाटिंग: नाम सामने, कार्रवाई फिर भी ‘अज्ञात’ पर ?

रवि सोनकर और लखन सोनकर पर आरोप, शिकायत के बाद दबाव और ‘अज्ञात’ कार्रवाई पर सवाल

भाठागांव में प्लाटिंग से बढ़ा सियासी ताप

रायपुर hct : भाठागांव में चल रही कथित अवैध प्लाटिंग अब सिर्फ जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसमें स्थानीय पार्षद रवि सोनकर और उनके भाई लखन सोनकर का नाम शिकायत में दर्ज होने से मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील हो गया है।

वार्ड क्रमांक 61 के केशरी बगीचा क्षेत्र में करीब 4 एकड़ जमीन पर प्लाटिंग को लेकर शिकायतकर्ताओं में शामिल स्थानीय नेता उर्फ छाया पार्षद ब्रम्हा सोनकर ने प्रेस वार्ता कर दस्तावेजों सहित आरोप लगाए हैं कि यह पूरा काम बिना वैधानिक स्वीकृति के किया जा रहा है।

खसरा नंबरों के साथ सीधे आरोप

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि लखन सोनकर और अविनाश सोनकर द्वारा संबंधित भूमि पर प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं, जबकि आवश्यक अनुमतियां जैसे लेआउट पासिंग और पंजीयन स्पष्ट नहीं हैं।भाठागांव केसरी बगीचा क्षेत्र में कथित अवैध प्लाटिंग का दृश्य

इसी क्रम में भरीखार क्षेत्र में “शंकरा विहार” नाम से एक अन्य परियोजना का भी जिक्र है, जहां अलग-अलग खसरा नंबरों की जमीन पर बड़े स्तर पर प्लाटिंग किए जाने की बात सामने आई है।

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शिकायत के बाद दबाव और पलटवार के आरोप

मामले की गंभीरता यहीं नहीं रुकती। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रशासन से लिखित शिकायत की, तब उन्हें समझौते के लिए दबाव बनाया गया।
आरोप यह भी है कि दबाव के आगे न झुकने पर उन पर 35 लाख रुपये की वसूली का झूठा आरोप लगाकर कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स में खबरें चलवाई गईं। शिकायतकर्ता अब खुले तौर पर कह रहे हैं कि यदि ऐसे किसी आरोप का कोई प्रमाण है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

नाम स्पष्ट, फिर भी ‘अज्ञात’ कार्रवाई क्यों?

इधर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायत में नाम, खसरा नंबर और स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज हैं, तो कार्रवाई शुरुआती स्तर से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रही है। फिर कार्रवाई “अज्ञात” के खिलाफ क्यों ? क्या प्रभाव और दबाव जांच की दिशा तय कर रहे हैं, या फिर यह महज प्रक्रिया की धीमी गति है – यह स्थिति अब प्रशासनिक जवाबदेही के केंद्र में आ चुकी है।

एकतरफा खबरों पर कानूनी चेतावनी

इस बीच शिकायतकर्ताओं ने यह भी संकेत दिया है कि यदि एकतरफा खबरें चलाने वाले मीडिया संस्थान अपने तथ्यों में सुधार नहीं करते, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन जिस तरह से आरोप, पलट-आरोप और दबाव की परतें सामने आ रही हैं, उसने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है।

अब निगाह प्रशासन की अगली चाल पर

अब निगाह इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन आरोपों को सिर्फ कागज़ों तक सीमित रखता है या फिर मौके पर जाकर सच्चाई की परतें खोलने की कोशिश करता है – क्योंकि जमीन पर खिंची लकीरें सिर्फ प्लॉट नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की सीमाएं भी तय कर रही हैं।

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