Judiciary

अधिवक्ता संघ रायपुर चुनाव 2026 : निष्पक्षता पर सवाल

नियुक्तियों पर आपत्ति, 2024 के विवादों की परछाई में 2026 चुनाव की पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न

रायपुर। अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 की तैयारी जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल भी गहराते जा रहे हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी, अपीलीय अधिकारी और मीडिया प्रभारी की नियुक्तियों को लेकर अधिवक्ताओं के एक समूह ने लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए स्पष्ट कहा है कि जिस प्रक्रिया को स्वतंत्र और पारदर्शी होना चाहिए, वही अब पक्षधरता के आरोपों से घिरती दिखाई दे रही है। ऐसे में चुनाव से पहले ही भरोसे की बुनियाद डगमगाने लगी है, जो संघ की साख के लिए गंभीर संकेत मानी जा रही है।

अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 में नियुक्तियों पर सवाल

अधिवक्ता संघ रायपुर चुनाव 2026 में निष्पक्षता पर सवाल उठाते अधिवक्ताओं का आपत्ति पत्र
निष्पक्षता पर सवाल उठाते अधिवक्ताओं का आपत्ति पत्र

आपत्ति पत्र में सबसे पहले जिन मुद्दों को उठाया गया है, उनमें नियुक्तियों की प्रक्रिया और चयनित नामों की पृष्ठभूमि शामिल है। अधिवक्ताओं का कहना है कि चुनाव की रीढ़ माने जाने वाले पदों पर ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति की गई है, जिनकी निष्पक्षता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। यही वह बिंदु है जहां निष्पक्षता पर सवाल और गहरे हो जाते हैं, क्योंकि जब शुरुआती प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में हो, तो पूरी चुनावी व्यवस्था पर भरोसा कायम रखना मुश्किल हो जाता है।

अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 पर 2024 का साया

इसके बाद स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है, जब 2024 के चुनाव का जिक्र सामने आता है। उस दौरान भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई आपत्तियां और अपीलें दर्ज की गई थीं, जिनका संतोषजनक निराकरण नहीं हो सका। अब उन्हीं परिस्थितियों की छाया 2026 के चुनाव पर पड़ती दिखाई दे रही है। अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि पिछली गलतियों से सबक नहीं लिया गया, तो इस बार भी वही विवाद दोहराए जा सकते हैं।

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चुनाव अधिकारी की भूमिका पर उठी उंगली

मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि संबंधित वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्व में स्टेट बार काउंसिल के पदाधिकारी रह चुके हैं और वर्तमान में भी चुनावी गतिविधियों में उनकी सक्रियता को लेकर शंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक हो जाता है कि क्या वे पूरी तरह निष्पक्ष रह पाएंगे। अब सवाल केवल नियुक्ति का नहीं, बल्कि उस पद की गरिमा और निष्पक्षता का बनता दिख रहा है।

अपीलीय व्यवस्था पर भी अविश्वास

अपीलीय अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी अधिवक्ताओं ने असहमति जताई है। 2024 के चुनाव में अपीलों के निपटारे को लेकर जो असंतोष सामने आया था, वही अविश्वास अब फिर से उभरता नजर आ रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब अपीलीय व्यवस्था ही भरोसे के लायक न दिखे, तो चुनावी विवादों के निष्पक्ष समाधान की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

मीडिया प्रभारी की नियुक्ति पर भी घेरा

मीडिया प्रभारी के चयन को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। पत्र में आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों का जिक्र करते हुए इस नियुक्ति को अनुचित बताया गया है। यह मुद्दा केवल एक पद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर व्यापक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 की निष्पक्षता पर और सवाल खड़े कर दिए हैं

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निष्पक्ष चुनाव की मांग ने पकड़ा जोर

पूरे घटनाक्रम के बीच अधिवक्ताओं ने कार्यकारिणी से मांग की है कि वर्तमान में की गई सभी नियुक्तियों को निरस्त कर नए सिरे से ऐसे वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिवक्ताओं का चयन किया जाए, जिनकी छवि निर्विवाद हो और जिनका किसी भी पक्ष से प्रत्यक्ष या परोक्ष जुड़ाव न हो। उनका मानना है कि केवल इसी तरह चुनाव प्रक्रिया को विवादों से दूर रखते हुए एक पारदर्शी और भरोसेमंद वातावरण तैयार किया जा सकता है, अन्यथा एक बार फिर वही पुराने सवाल संघ के सामने खड़े होते नजर आएंगे। अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 को लेकर अब पारदर्शिता सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, यही वजह है कि अधिवक्ता संघ चुनाव 2026 अब केवल चुनाव नहीं, बल्कि भरोसे की परीक्षा बनता जा रहा है…

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