Chhattisgarh

रायपुर : जोन-6 में ‘मिस्टर इंडिया’ बने सफाईकर्मी

रिकॉर्ड में 38 कर्मचारियों की तैनाती, कई दिन मौके पर आधे भी नहीं—ठेका व्यवस्था और निगरानी पर उठे सवाल

राजधानी रायपुर में नगर निगम स्वच्छता व्यवस्था को लेकर बड़े दावे करता है। स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर स्थान पाने की बात अक्सर कही जाती है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में जमीनी स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती। खासतौर पर नगर निगम के जोन क्रमांक-6 में सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर इन दिनों सवाल उठने लगे हैं। रिकॉर्ड में कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या दर्ज होने के बावजूद कई वार्डों में नियमित रूप से कम कर्मचारी दिखाई देने की जानकारी सामने आ रही है। इससे न केवल सफाई कार्य की गति प्रभावित हो रही है, बल्कि निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

वार्ड 61 में कर्मचारियों की कमी पर चर्चा

जोन क्रमांक-6 के अंतर्गत आने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड क्रमांक-61 की स्थिति इन दिनों खास चर्चा में है। इस वार्ड के लिए कुल 38 सफाई कर्मचारियों की तैनाती का प्रावधान बताया जाता है। लेकिन स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों में निर्धारित संख्या के अनुरूप कर्मचारी मौके पर नहीं दिखे। उदाहरण के तौर पर 7 मार्च को वार्ड में केवल 4 कर्मचारी काम करते नजर आए। इसके बाद 8 मार्च को 13 कर्मचारी, 9 मार्च को 11 कर्मचारी और 10 मार्च को 17 कर्मचारी ही मौजूद पाए गए। यानी कई दिनों तक तय संख्या का आधा स्टाफ भी उपलब्ध नहीं रहा।

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ठेका व्यवस्था के बाद भी सवाल बरकरार

वार्ड की सफाई व्यवस्था का जिम्मा शांति ट्रेडर्स नामक फर्म को दिया गया है, जिसके प्रोपराइटर वेद प्रकाश सिंह बताए जाते हैं। नगर निगम की सहमति प्रक्रिया के तहत 20 जुलाई 2025 को इस फर्म को सफाई कार्य का ठेका सौंपा गया था। ठेके की शर्तों के अनुसार निर्धारित संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता और नियमित सफाई कार्य सुनिश्चित करना ठेकेदार की जिम्मेदारी मानी जाती है। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कर्मचारी संख्या कई बार तय मानक से कम दिखाई देती है, जिसके कारण ठेका व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

जवाबदेही को लेकर अधिकारियों से सवाल

जवाबदेही को लेकर अधिकारियों से सवाल
हितेंद्र यादव, जोन कमिश्नर

इस विषय में जब जोन स्वास्थ्य अधिकारी आदित्य हजारी से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने विस्तृत प्रतिक्रिया देने के बजाय इस विषय को उच्च अधिकारियों के स्तर का बताते हुए उनसे चर्चा करने की सलाह दी। कर्मचारियों की संख्या कम होने या ठेकेदार को किसी प्रकार की नोटिस अथवा कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद जोन क्रमांक-6 के जोन कमिश्नर हितेंद्र यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कार्यालय में चर्चा करने की बात कही। फोन पर उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति या संभावित कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।

अन्य वार्डों की स्थिति भी चर्चा में

जानकारी के अनुसार जोन क्रमांक-6 के वार्ड क्रमांक-60 और 65 में भी इसी ठेका फर्म द्वारा सफाई कार्य किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन वार्डों में भी कई बार कर्मचारी संख्या निर्धारित मानक से कम दिखाई देती है। हालांकि यह स्थिति सभी दिनों में समान नहीं बताई जाती, लेकिन समय-समय पर कम कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर चर्चा होती रहती है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर दिखाई देता है तो उसकी निगरानी और जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाती है।

रिकॉर्ड और हकीकत के अंतर ने खड़े किए सवाल

नगर निगम के नियमों में साफ तौर पर यह प्रावधान है कि ठेकेदार को तय संख्या में कर्मचारी उपलब्ध कराने होते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो नोटिस, जुर्माना या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की व्यवस्था भी रहती है। लेकिन जोन क्रमांक-6 में सामने आ रही स्थिति को देखते हुए अब यह चर्चा तेज हो गई है कि कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति की नियमित जांच किस प्रकार की जा रही है। रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों और मौके पर दिखाई देने वाली संख्या के बीच का यह अंतर ही इस समय पूरे मामले को चर्चा का विषय बना रहा है।

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