प्लास्टिक मुक्त बालोद अभियान : आदेश बनाम हकीकत
जिला प्रशासन ने शराब दुकानों के 100 मीटर क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगाया प्रतिबंध, वहीं ग्राम पंचायतों में चल रही जागरूकता मुहिम; लेकिन संयुक्त कार्यालय परिसर में दिखा उलटा नज़ारा

आदेश : शराब दुकानों के आसपास प्लास्टिक पर रोक
बालोद जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्लास्टिक मुक्त बालोद अभियान के तहत जिला प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। प्रशासन ने जिले की सभी शराब दुकानों और उनके आसपास के क्षेत्रों को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत शराब दुकानों के 100 मीटर के दायरे में प्लास्टिक डिस्पोजल, गिलास, प्लेट और पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाने की बात कही गई है।

अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी चंद्रकांत कौशिक ने इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि यह कदम ‘प्लास्टिक मुक्त बालोद जिला अभियान’ के अंतर्गत उठाया गया है। प्रशासन का मानना है कि शराब दुकानों के आसपास अक्सर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा होता है, जिससे पर्यावरण और स्वच्छता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
ग्राम पंचायतों में जागरूकता अभियान

जिला प्रशासन के इस अभियान की गूंज अब ग्राम पंचायतों तक भी पहुंचती दिखाई दे रही है। प्लास्टिक मुक्त बालोद अभियान के तहत विभिन्न गांवों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ग्राम पंचायत ओरमा के आश्रित ग्राम मेढकी में ग्रामीणों को प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने के उद्देश्य से जागरूक किया गया। गांव में रैली निकालकर लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया और ग्रामीणों ने इसे कम करने का संकल्प भी लिया। इस जागरूकता कार्यक्रम में सरपंच श्रीमती मंजूलता परस साहू सहित संतोष साहू, रोशनी साहू, ललिता ठाकुर और अन्य ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
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संदेश स्पष्ट : प्लास्टिक मुक्त जिला
जिला प्रशासन की पहल से यह स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि बालोद को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए केवल सरकारी आदेश ही नहीं बल्कि जनभागीदारी भी जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी किए जा रहे हैं, वहीं गांवों में जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को व्यवहार में बदलाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यही कारण है कि इस अभियान को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर पंचायत स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि लोगों की भागीदारी से प्लास्टिक कचरे को कम किया जा सके।
मगर दीया तले अँधेरा
हालांकि इसी बीच एक ऐसा दृश्य भी सामने आया जिसने इस पूरे अभियान पर एक अलग सवाल खड़ा कर दिया। जिस दिन प्लास्टिक मुक्त बालोद अभियान को लेकर यह संदेश जारी हुआ, उसी दिन संयुक्त कार्यालय बालोद परिसर के आसपास बड़ी मात्रा में प्लास्टिक डिस्पोजल और पॉलिथीन का कचरा फैला हुआ देखा गया। परिसर के आसपास बिखरे प्लास्टिक कचरे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि जिस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है, उसका पालन प्रशासनिक परिसरों में किस स्तर पर सुनिश्चित हो रहा है।

प्लास्टिक मुक्त बालोद अभियान की जमीनी तस्वीर
गांवों में रैली निकल रही है, शराब दुकानों के आसपास प्लास्टिक पर प्रतिबंध के आदेश जारी हो रहे हैं और ‘प्लास्टिक मुक्त बालोद’ का संदेश पूरे जिले में फैलाया जा रहा है। लेकिन इसी बीच संयुक्त कार्यालय परिसर के आसपास बिखरा प्लास्टिक कचरा एक अलग तस्वीर भी दिखाता है। जिस अभियान को प्रशासन गांव-गांव तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, उसी अभियान की पहली झलक जिला मुख्यालय परिसर में ही अलग रूप में दिखाई दे जाए तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठना लाजिमी हो जाता है कि इन निर्देशों की शुरुआत आखिर सबसे पहले किस जगह से होनी चाहिए।
*philip chacko

