National

RBI एक्ट धारा 7: 83 साल में क्यों नहीं इस्तेमाल

केंद्र सरकार को निर्देश देने का अधिकार, फिर भी इतिहास में अब तक लागू नहीं; केंद्रीय बैंक और सरकार के संबंधों का संवेदनशील प्रावधान

RBI एक्ट धारा 7 क्या है
RBI एक्ट धारा 7 भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच संबंधों को परिभाषित करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत यह धारा केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह सार्वजनिक हित में रिजर्व बैंक को निर्देश जारी कर सकती है। हालांकि, इस प्रावधान का इस्तेमाल करने से पहले सरकार को आरबीआई गवर्नर से परामर्श करना अनिवार्य है।

RBI Act Section 7 explained India

83 साल में क्यों नहीं हुआ इस्तेमाल

RBI एक्ट धारा 7 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक के लंबे इतिहास में अब तक किसी भी सरकार ने इसका औपचारिक उपयोग नहीं किया है। इसे एक असाधारण और अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाता है, जिसका उपयोग केवल तब किया जा सकता है जब सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच गंभीर मतभेद उत्पन्न हो जाएं।

संशोधन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1949 में आरबीआई के राष्ट्रीयकरण के दौरान इस धारा में संशोधन किया गया था, जिससे केंद्र सरकार को अधिक स्पष्ट रूप से यह अधिकार मिला कि वह सार्वजनिक हित में केंद्रीय बैंक को निर्देश दे सके। इस प्रावधान की संरचना ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक कानूनों से प्रेरित मानी जाती है।

विवाद और हाल के संदर्भ

हाल के वर्षों में RBI एक्ट धारा 7 तब चर्चा में आई, जब सरकार और रिजर्व बैंक के बीच कुछ नीतिगत मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान भी यह मुद्दा उठा था, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि सरकार इस धारा के तहत निर्देश जारी कर सकती है।

आरबीआई और केंद्र सरकार संबंध

सरकार और आरबीआई के बीच संवाद

कुछ मामलों में सरकार ने आरबीआई से विभिन्न आर्थिक मुद्दों—जैसे तरलता, पूंजी भंडार के उपयोग और बैंकिंग नियमन—पर अपने विचार मांगे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं के बावजूद RBI एक्ट धारा 7 को औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया है। यह दर्शाता है कि दोनों संस्थाएं आमतौर पर आपसी संवाद और सहमति से ही निर्णय लेने को प्राथमिकता देती हैं।

जिम्मेदारी और संतुलन का प्रावधान

इस धारा का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार के पास अंतिम अधिकार हो, लेकिन साथ ही यह भी कि वह आरबीआई की विशेषज्ञता और स्वायत्तता का सम्मान करे। इसीलिए, यह प्रावधान व्यवहार में कम और सिद्धांत में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

Back to top button